दुआए नूर (इफ्तार के वक़्त)
اللّٰهُمَّ رَبَّ النُّوْرِ الْعَظِيْمِ وَ رَبَّ الْكُرْسِيِّ الرَّفِيْعِ
अल्लाहुम्मा रब्बन नूरील अज़ीमि व रब्बल कुर्सीयिर रफीइ
ऐ अज़ीम नूर के रब, ऐ बुलंद ओ बाला आसमानों के मालिक,
وَ رَبَّ الْبَحْرِ الْمَسْجُوْرِ وَ رَبَّ الشَّفْعِ الْكَبِيْرِ
व रब्बल बह्रिल मस्जूरी व रब्बश शफिअल कबीर
ऐ बहते हुए समंदरों के रब, ऐ अज़ीम शफ़ाअत करने वाले के रब,
وَ النُّوْرِ الْعَزِيْزِ وَ رَبَّ التَّوْرَاةِ وَ الْإِنْجِيْلِ وَ الزَّبُوْرِ وَالْفُرْقَانِ الْعَظِيْمِ
व नूरील अज़ीज़ व रब्बत-तौराती वल इंजीलि वज़्ज़बूरी वल फ़ुरक़ानिल अज़ीम
ऐ बहते हुए समंदरों के रब, ऐ अज़ीम शफ़ाअत करने वाले और रौशन नूर के रब, ऐ तौरात, इंजील और अज़ीम फ़ुरक़ान के रब,
أَنْتَ إِلٰهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَ إِلٰهُ مَنْ فِي الْأَرْضِ-
अन्ता इलाहु मन फ़िस्समावाति व इलाहु मन फ़िल अरज़ी
तू ही आसमानों और ज़मीन का वाहिद मा'बूद है।
لا إِلٰهَ فِيْهِمَا غَيْرُكَ وَ أَنْتَ مَلِكُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ
ला इलाहा फीहिमा गैरुक व अन्ता मलिकु मन फ़िस्समावाति
तेरे सिवा कोई मा'बूद नहीं, तू ही हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है, आसमानों और ज़मीन में कोई क़ुदरत वाला तेरे सिवा नहीं।
وَ مَلِكُ مَنْ فِي الْأَرْضِ لا مَلِكَفِيْهِمَا غَيْرُك
व मलिकु मन फ़िल अरज़ी ला मलिका फीहिमा गैरुक
तू ही आसमानों और ज़मीन का मालिक है, तेरे सिवा कोई मालिक नहीं।
أَسْأَلُكَ بِاسْمِكَ الْكَبِيْرِ وَ نُوْرِ وَجْهِكَ الْمُنِيْرِ وَ بِمُلْكِكَ الْقَدِيم
असअलुका बिस्मिकल कबीरि व नूरी वज्हिकल मुनीरि व बिमुल्किकल क़दीम
मैं तुझसे तेरे अज़ीम नाम, तेरे रौशन और बरतर वुजूद, और तेरी हमेशा बाक़ी रहने वाली सल्तनत के वसीले से दुआ करता हूँ।
يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ
या हय्यु या क़य्यूम, या हय्यु या क़य्यूम, या हय्यु या क़य्यूम
ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ खुद क़ायम रहने वाले, ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ खुद क़ायम रहने वाले!
أَسْأَلُكَ بِاسْمِكَ الَّذِيْ أَشْرَقَ بِه كُلُّ شَيْءٍ
असअलुका बिस्मिकल्लज़ी अशरक़ा बिहि कुल्लु शयइन
मैं तुझसे तेरे उस नाम के ज़रिए दुआ करता हूँ जो हर चीज़ को मुनव्वर करता है,
وَ بِاسْمِكَ الَّذِيْ أَشْرَقَتْ بِهِ السَّمَاوَاتُ وَ الْأَرْضُ
व बिस्मिकल्लज़ी अशरकत बिहिस समावातु वल अरज़ू
और तेरे उस नाम के ज़रिए जो आसमानों और ज़मीन को रौशनी बख़्शता है।
وَ بِاسْمِكَ الَّذِيْ صَلَحَ بِهِ الْأَوَّلُوْنَ وَ بِهٖ يَصْلُحُ الْآخِرُوْنَ
व बिस्मिकल्लज़ी सलहा बिहिल अव्वालून व बिही यसलहुल आख़िरून
वो नाम जिससे तमाम ज़मानों के लोग राह-ए-रास्त पर आ गए, पहले लोग भी और बाद के लोग भी।
يَا حَيُّ قَبْلَ كُلِّ حَيٍّ وَ يَا حَيُّ بَعْدَ كُلِّ حَيٍّ
या हय्यु क़ब्ल कुल्लि हय्यिन, व या हय्यु बा'दा कुल्लि हय्यिन
ऐ वो जो हर ज़िंदगी से पहले भी ज़िंदा था, और ऐ वो जो उस वक़्त भी बाक़ी रहेगा जब कोई ज़िंदगी बाक़ी न होगी।
وَ يَا حَيُّ لا إِلٰهَ إِلا أَنْتَ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ
व या हय्यु ला इलाहा इल्ला अंता, सल्लि अला मुहम्मदिन व आले मुहम्मद
ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! तेरे सिवा कोई मा'बूद नहीं, मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) और उनकी आल पर दुरूद व सलाम भेज।
وَ اغْفِرْ لِيْ ذُنُوْبِيْ وَ اجْعَلْ لِيْ مِنْ أَمْرِي يُسْرًا وَ فَرَجًا قَرِيْبًا
वग़फिर ली जुन्नूबी वजअल ली मिन अमरी युसरन व फराजन क़रीबन
मेरे गुनाहों को बख़्श दे, मेरे मामलात को आसान बना दे, और ज़ुहूर को क़रीब कर दे।
وَ ثَبِّتْنِيْ عَلٰى دِيْنِ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ عَلٰى سُنَّةِ مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ عَلَيْهِ وَ عَلَيْهِمُ السَّلامُ
व सब्बितनी अला दीनी मुहम्मदिन व आले मुहम्मद व अला सुन्नति मुहम्मदिन व आले मुहम्मद
हमें मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) और उनके अहल-ए-बैत के दीन पर साबित क़दम रख, उनकी हिदायत पर चला, और मोहम्मद व आल-ए-मोहम्मद (अलैहिमुस्सलाम) की सुन्नत पर क़ायम रख।
وَ اجْعَلْ عَمَلِيْ فِي الْمَرْفُوْعِ الْمُتَقَبَّلِ
वज अल अमली फ़िल मरफूइल मुतक़ब्बल
मेरे आमाल को बुलंद और मक़बूल बना दे।
وَ هَبْ لِي كَمَا وَهَبْتَ لِأَوْلِيَائِكَ وَ أَهْلِ طَاعَتِكَ
व हब ली कमा वहबत लि औलियाइक व अहलि ताअतिक
मुझे वैसे ही अता कर जैसे तूने अपने नेक और इताअतगुज़ार बंदों को अता किया।
فَإِنِّيْ مُؤْمِنٌ بِكَ وَ مُتَوَكِّلٌ عَلَيْكَ
फ़-इन्नी मोमिनुन बिका व मुतवक्किलुन अलैक
यक़ीनन मैं तुझ पर ईमान रखता हूँ और तुझ पर भरोसा करता हूँ।
مُنِيْبٌ إِلَيْكَ مَعَ مَصِيْرِيْ إِلَيْكَ وَ تَجْمَعُ لِيْ
मुनीबुन इलैक मअ मसीरी इलैक व तजमऊ ली
मैं तेरी जानिब तौबा करते हुए पलट रहा हूँ, और मेरी तमाम राहें तुझ ही पर ख़त्म होती हैं।
وَ تَجْمَعَ لئِ وَ لِأَهْلِيْ وَ وُلْدِيَ الْخَيْرَ كُلَّه
व तजमअ ली व लिअहली व वुल्दियल खैर कुल्लह
मेरे और मेरे अहल ओ अ'याल के लिए तमाम भलाईयों को जमा कर दे।
وَ تَصْرِفُ عَنِّيْ وَ عَنْ وُلْدِيْ وَ أَهْلِيَ الشَّرَّ كُلَّه
व तस्रिफु अन्नी व अन वुल्दी व अहलियश शर्र कुल्लह
और मुझसे, मेरे अहल ओ अ'याल और मेरे वालिदैन से हर बुराई को दूर कर दे।
أَنْتَ الْحَنَّانُ الْمَنَّانُ بَدِيْعُ السَّمَاوَاتِ وَ الْأَرْضِ
अंतल हन्नानुल मन्नानु बदीअुस समावाति वल अर्ज़
तू निहायत मेहरबान, बख़्शने वाला, और आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला है।
تُعْطِي الْخَيْرَ مَنْ تَشَاءُ وَ تَصْرِفُه عَمَّنْ تَشَاءُ فَامْنُنْ عَلَيَّ بِرَحْمَتِكَ
तुअतील खैरा मन तशाऊ व तस्रिफुह अम्मन तशाऊ फ़म्नुन अलैया बिरहमतिका
तू जिसे चाहे भलाई अता करता है और जिससे चाहे उसे दूर करता है, पस अपनी रहमत से मुझ पर करम फ़रमा।
يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِيْنَ.
या अरहमर-राहिमीन
ऐ सब से ज़्यादा मेहरबान और रहम करने वाले!
यह सिफ़ारिश की जाती है कि रोज़ा इफ़्तार करने के पहले निवाले पर यह दुआ पढ़ी जाए:
بِسْمِ اللّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अल्लाह के नाम से, जो निहायत मेहरबान, बे-हद रहम करने वाला है।
يَا وَاسِعَ الْمَغْفِرَةِ اِغْفِرْ لِي
या वासिअल-मग़फिरति, इग़फिर ली
ऐ वसीअ मग़फिरत वाले! मुझे माफ़ फ़रमा।
हज़रत नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम) ने यह दुआ हज़रत इमाम अली (अलैहिस्सलाम) को सिखाई और फ़रमाया कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) मेरे पास आए और कहा: "जो कोई भी माह-ए-रमज़ानुल मुबारक में इफ़्तार से पहले इस दुआ को पढ़े, अल्लाह उसकी दुआ क़बूल करता है, उसके रोज़े और दुआ को शरफ़-ए-क़बूलियत बख़्शता है, उसकी दस ज़रूरतें पूरी करता है, उसके गुनाहों को माफ़ फ़रमाता है, उसके ग़मों को दूर करता है, उसके दिल को सुकून अता करता है, उसकी हाजतें पूरी करता है, उसके आमाल को अंबिया और सालिहीन के आमाल के साथ बुलंद फ़रमाता है, और क़यामत के दिन उसे अपने नूरानी चेहरे के साथ चमकते चाँद की मानिंद अपने हुज़ूर में लाएगा।"
सय्यद इब्ने ताउस और कफ'अमी ने दर्ज़ ज़ेल दुआ रिवायत की है: