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माहे रमज़ान उल मुबारक
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सहरी की तमाम दुआएँ | | पीडीएफ

फ़ज्र से पहले रोज़ा शुरू करते वक़्त सूरह क़द्र और ये दुआएँ पढ़ें
दुआ – या मफ़ज़ई
दुआ – बहा
दुआ – या उ़द्दती
दुआ – इदरीस
तस्बीह

दुआ – अबू हमज़ा सुमाली
इमाम सज्जाद (अ.स.) की सिखाई हुई लंबी और अज़ीम दुआ – ज़िंदगी बदल देने वाली, रमज़ान में ज़रूर पढ़ें

इफ्तार की तमाम दुआएँ और आदाब | पीडीएफ
सूरह क़द्र पढ़ें – इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) की ताकीद


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيم
اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَ عَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ وَ عَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अल्लाहुम्मा लका सुम्तु व अला रिज़्किका अफ़्तर्तु व अ़लैक तवक्कल्तु
ऐ मेरे अल्लाह, मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरी अता की हुई रोज़ी से इफ्तार किया और तुझ पर भरोसा किया।

पहला लुक़्मा लेते वक़्त पढ़ें
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ يَا وَاسِعَ الْمَغْفِرَةِ اغْفِرْ لِي
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम या वासिअल मग़फिरह इग़फ़िर ली
अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है। ऐ बहुत बख्शने वाले, मुझे माफ़ फरमा।

इमाम अली (अ.स.) ये पढ़ा करते थे :
بِسْمِ للَّهِ اللَّهُمَّ لَكَ صُمْنَا وَ عَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْنَا
فَتَقَبَّلْ مِنَا إِنَّكَ أَنْت السَّمِيعُ الْعلِيمُ
बिस्मिल्लाह अल्लाहुम्मा लका सुम्ना व अला रिज़्किका अफ़्तर्ना
फ़तक़ब्बल मिन्ना इन्नका अंतस समीउल अलीम
अल्लाह के नाम से, ऐ अल्लाह हमने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरी दी हुई रोज़ी से इफ्तार किया, इसे कबूल फरमा, बेशक तू सुनने वाला और जानने वाला है।


आयतुल्लाह रूहुल्लाह करहवी इफ्तार के वक़्त ये 4 अमल की तजवीज़ देते हैं ताकि इमाम (अ.ज.) की मंज़ूरी हासिल हो – 1) सूरह फ़ातिहा बीबी नरगिस खातून (अ.स.) के लिए, 2) इमाम महदी (अ.ज.) को सलाम “अस्सलामो अलैक या साहिब अस्र वज़्ज़मान”, 3) इमाम हुसैन (अ.स.) को सलाम “अस्सलामो अलैक या अबा अब्दिल्लाह”, 4) दुआ हुज्जत – अल्लाहुम्मा कुन लिवलिय्यकल
मदरसतुल क़ाइम का मरजई क्लिप

दुआ नूर (इफ्तार)



اللّٰهُمَّ رَبَّ النُّوْرِ الْعَظِيْمِ وَ رَبَّ الْكُرْسِيِّ الرَّفِيْعِ
अल्लाहुम्मा रब्बन्नूरिल अज़ीम व रब्बल कुर्सिय्यिर रफ़ीअ
ऐ अज़मत वाले नूर के रब, और बुलंद कुर्सी के मालिक,

وَ رَبَّ الْبَحْرِ الْمَسْجُوْرِ وَ رَبَّ الشَّفْعِ الْكَبِيْرِ
व रब्बल बह्रिल मस्जूर व रब्बश शफ़्अिल कबीर
और जोश मारते समंदर के रब, और बड़े शफ़ाअत करने वाले के मालिक,

وَ النُّوْرِ الْعَزِيْزِ وَ رَبَّ التَّوْرَاةِ وَ الْإِنْجِيْلِ وَ الزَّبُوْرِ وَالْفُرْقَانِ الْعَظِيْمِ
वन नूरिल अज़ीज़ व रब्बत्तौराति वल इंजीलि वज़्ज़बूरि वल फुरकानिल अज़ीम
और इज़्ज़त वाले नूर के रब, तौरात, इंजील, ज़बूर और अज़ीम फुरकान के मालिक,

أَنْتَ إِلٰهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَ إِلٰهُ مَنْ فِي الْأَرْضِ-
अंता इलाहु मन फ़िस्समावाति व इलाहु मन फ़िल अर्ज़
तू ही आसमानों और ज़मीन वालों का इकलौता माबूद है।

لا إِلٰهَ فِيْهِمَا غَيْرُكَ وَ أَنْتَ مَلِكُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ
ला इलाहा फीहिमा ग़ैरुक व अंता मलिकु मन फ़िस्समावाति
तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू ही आसमानों का मालिक है।

وَ مَلِكُ مَنْ فِي الْأَرْضِ لا مَلِكَفِيْهِمَا غَيْرُك
व मलिकु मन फ़िल अर्ज़ ला मलिका फीहिमा ग़ैरुक
और ज़मीन का भी तू ही मालिक है, तेरे सिवा कोई मालिक नहीं।

يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ
या हय्यु या कय्यूम, या हय्यु या कय्यूम, या हय्यु या कय्यूम
ऐ ज़िंदा रहने वाले, ऐ क़ायम रखने वाले।

وَ اغْفِرْ لِيْ ذُنُوْبِيْ وَ اجْعَلْ لِيْ مِنْ أَمْرِي يُسْرًا وَ فَرَجًا قَرِيْبًا
वग़फिर ली ज़ुनूबी वजअल ली मिन अम्री युस्रन व फरजन क़रीबा
मेरे गुनाह माफ़ फरमा, मेरे काम आसान कर और क़रीब राहत अता कर।

أَنْتَ الْحَنَّانُ الْمَنَّانُ بَدِيْعُ السَّمَاوَاتِ وَ الْأَرْضِ
अंतल हन्नानुल मनान बदीउस्समावाति वल अर्ज़
तू बड़ा मेहरबान, बड़ा एहसान करने वाला, आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला है।

تُعْطِي الْخَيْرَ مَنْ تَشَاءُ وَ تَصْرِفُه عَمَّنْ تَشَاءُ فَامْنُنْ عَلَيَّ بِرَحْمَتِكَ
तु'ती अलख़ैर मन तशा व तस्रिफुहु अम्मन तशा फम्नुन्न अलय्य बिरहमतिका
तू जिसे चाहे भलाई देता है और जिससे चाहे रोक लेता है, मुझ पर अपनी रहमत फरमा।

يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِيْنَ.
या अरहमर्राहिमीन
ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।

पहला लुक़्मा लेते वक़्त ये पढ़ना मुस्तहब है :

بِسْمِ اللّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है।

يَا وَاسعَ الْمَغْفِرَةِ اِغْفِرْ لِي
या वासिअल मग़फ़िरह इग़फ़िर ली
ऐ बहुत बख्शने वाले, मुझे माफ़ फरमा।

हुज़ूर-ए-अक़्दस रसूल-ए-अकरम (स.अ.व.) ने ये दुआ इमाम अली (अ.स.) को तालीम फरमाई और इरशाद फरमाया कि जिब्रील (अ.स.) मेरे पास आए और कहा, “जो शख़्स माहे रमज़ान में इफ्तार से पहले ये दुआ पढ़े, अल्लाह उसकी दुआ क़बूल करता है, उसके रोज़े और नमाज़ को क़बूल फरमाता है, उसकी दस हाजतें पूरी करता है, उसके गुनाह माफ़ करता है, उसके ग़म दूर करता है, उसके दिल को सुकून देता है, उसकी मुरादें पूरी करता है, उसके आमाल को अंबिया और औलिया के आमाल के साथ बुलंदी देता है और क़यामत के दिन उसे अपने हुज़ूर रोशन चेहरे के साथ पेश करेगा जैसे चमकता हुआ चाँद।”
सय्यिद इब्ने ताऊस और अल-काफ़अमी ने ये दुआ नक़्ल की है:









तारीख़ के मुताबिक़ अलग सफ़्हा
डेट वाइज सफ़्हों के मज़मून का तआरुफ़
बहुत सी दुआएँ ऐसी हैं जो “तमाम तारीख़ों” में मुश्तरक हैं यानी; हर रात | , हर दिन | सहरी | , इफ्तार | , फर्ज़ नमाज़ के बाद
इनके अलावा महीने की हर रात और हर दिन के लिए मख़सूस दुआएँ भी मौजूद हैं।
‘इक़बाल आमाल’ किताब सय्यिद इब्ने ताऊस की तस्नीफ़ है जिसमें हर तारीख़ के लिए ये उमूर शामिल हैं:
-शब की नमाज़
1) शब की दुआ – हुज़ूर नबी करीम (स.अ.व.) से मरवी
2) शब की दुआ – अमाल-ए-शहर-ए-रमज़ान से मरवी, मुहम्मद इब्न अबी क़र्रह
3) मशहूर मुख़्तसर रोज़ की दुआ
4) अस्हाब की कदीम किताब से दुआ
5) दूसरी रोज़ की दुआ – सय्यिद इब्ने बाक़ी
6) दुआ – इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.)

कुछ तारीख़ों के लिए ख़ास दुआएँ भी हैं जो मुताल्लिक़ा दिन के सफ़्हों पर दी गई हैं :
पहली रात-दिन
13,14,15 – दुआ मुजीर
17वीं रात की ख़ास दुआ
19,21,23 – शब-ए-क़द्र
आख़िरी 10 रातें
आख़िरी रात

<- अहम तारीख़ें ->
10वीं – हज़रत ख़दीजा (स.अ.) की वफ़ात
15वीं 3 हिजरी – विलादत इमाम हसन मुजतबा (अ.स.)
21वीं 40 हिजरी – शहादत इमाम अली (अ.स.)

सहीफ़ा अलाविया – महीने के दिनों की दुआएँ


सभी दुआओं का एक मख़सूस पेज | PDF

दुआ या अलीय्यु या अज़ीम
يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ
या अलीय्यु या अज़ीम
रिवायत में आया है कि माहे रमज़ान में हर फर्ज़ नमाज़ के बाद ये दुआ पढ़ी जाए:



يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ
या अलीय्यु या अज़ीम
ऐ बुलंद और अज़ीम।

يَا غَفُورُ يَا رَحِيمُ
या ग़फूरु या रहीम
ऐ बड़ा बख्शने वाला, ऐ रहम करने वाला।

أَنْتَ ٱلرَّبُّ ٱلْعَظِيمُ
अंता अर्रब्बुल अज़ीम
तू ही अज़ीम रब है।

ٱلَّذِي لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ
अल्लज़ी लैसा कमिस्लिही शय्उन
जिसके जैसा कोई नहीं।

وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْبَصِيرُ
वहुवस्समीउल बसीर
और वही सब सुनने वाला, सब देखने वाला है।

وَهٰذَا شَهْرٌ عَظَّمْتَهُ وَكَرَّمْتَهُ
व हाज़ा शहरुन अज़्ज़मतहु व कर्रमतहु
ये वो महीना है जिसे तूने अज़मत और इज़्ज़त दी।

وَشَرَّفْتَهُ وَفَضَّلْتَهُ عَلَىٰ ٱلشُّهُورِ
व शर्रफ्तहु व फज़्ज़ल्तहु अलश्शुहूर
और इसे तमाम महीनों पर फ़ज़ीलत दी।

وَهُوَ ٱلشَّهْرُ ٱلَّذِي فَرَضْتَ صِيَامَهُ عَلَيَّ
वहुवश्शहरु अल्लज़ी फरज़्ता सियामहु अलय्या
इसमें रोज़ा तूने मुझ पर फ़र्ज़ किया।

وَهُوَ شَهْرُ رَمَضَانَ ٱلَّذِي أَنْزَلْتَ فِيهِ الْقُرْآنَ
वहुव शहर रमज़ान अल्लज़ी अंज़ल्ता फ़ीहिल क़ुरआन
ये रमज़ान का महीना है जिसमें तूने क़ुरआन नाज़िल किया।

هُدَىً لِلنَّاسِ وَبَيِّنَاتٍ مِنَ ٱلْهُدَىٰ وَٱلْفُرْقَانِ
हुदन लिन्नासि व बय्यिनातिन मिनल हुदा वल फुरकान
लोगों के लिए हिदायत और रौशन निशानियाँ।

وَجَعَلْتَ فِيهِ لَيْلَةَ ٱلْقَدْرِ
व जअल्ता फ़ीहि लै़लतल क़द्र
और इसमें शब-ए-क़द्र रखी।

وَجَعَلْتَهَا خَيْراً مِنَ الفِ شَهْرٍ
व जअल्तहा ख़ैरन मिन अल्फि शहर
और उसे हज़ार महीनों से बेहतर बनाया।

فَيَا ذَا ٱلْمَنِّ وَلاَ يُمَنُّ عَلَيْكَ
फ़या ज़ल मन्नि व ला युमन्नु अलैक
ऐ एहसान करने वाले, तुझ पर कोई एहसान नहीं कर सकता।

مُنَّ عَلَيَّ بِفَكَاكِ رَقَبَتِي مِنَ ٱلنَّارِ فِي مَنْ تَمُنُّ عَلَيْهِ
मुन अलय्या बिफ़काकि रक़बती मिनन्नारि फी मन तमुन्नु अलैहि
मुझ पर एहसान कर और मुझे जहन्नम से आज़ाद कर।

وَأَدْخِلْنِي ٱلْجَنَّةَ
व अदख़िल्नी अलजन्नह
और मुझे जन्नत में दाख़िल कर।

بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ ٱلرَّاحِمِينَ
बिरहमतिका या अरहमर्राहिमीन
अपनी रहमत से, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।



दुआ अल्लाहुम्मा अदख़िल अला
اَللَّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَىٰ
अल्लाहुम्मा अदख़िल अला
किताब ‘अल-मिस्बाह’ और ‘अल-बलदुल-अमीन’ में रिवायत है कि जो शख़्स रमज़ान में हर फर्ज़ नमाज़ के बाद ये दुआ पढ़े, क़यामत के दिन उसके तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे:



اَللَّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَىٰ أَهْلِ ٱلْقُبُورِ ٱلسُّرُورَ
अल्लाहुम्मा अदख़िल अला अहलिल क़ुबूरिस्सुरूर
ऐ अल्लाह, अहले क़ुबूर को खुशियाँ अता फरमा।

اَللَّهُمَّ أَغْنِ كُلَّ فَقِيرٍ
अल्लाहुम्मा अग़्नि कुल्ल फ़क़ीर
ऐ अल्लाह, हर ग़रीब को बेनियाज़ कर दे।

اَللَّهُمَّ أَشْبِعْ كُلَّ جَائِعٍ
अल्लाहुम्मा अश्बिअ कुल्ल जाअिइन
ऐ अल्लाह, हर भूखे को सैर कर दे।

اَللَّهُمَّ ٱكْسُ كُلَّ عُرْيَانٍ
अल्लाहुम्मा इकसु कुल्ल उरयान
ऐ अल्लाह, हर बे-कपड़ा को लिबास अता कर।

اَللَّهُمَّ ٱقْضِ دَيْنَ كُلِّ مَدِينٍ
अल्लाहुम्मा इक़्ज़ि दैना कुल्लि मदी़न
ऐ अल्लाह, हर कर्ज़दार का कर्ज़ अदा कर दे।

اَللَّهُمَّ فَرِّجْ عَنْ كُلِّ مَكْرُوبٍ
अल्लाहुम्मा फर्रिज़ अ़न कुल्लि मक़रूब
ऐ अल्लाह, हर परेशान हाल की परेशानी दूर कर दे।

اَللَّهُمَّ رُدَّ كُلَّ غَرِيبٍ
अल्लाहुम्मा रुद्द कुल्ल ग़रीब
ऐ अल्लाह, हर मुसाफ़िर को सलामत वापस पहुँचा दे।

اَللَّهُمَّ فُكَّ كُلَّ أَسِيرٍ
अल्लाहुम्मा फुक्क कुल्ल असीर
ऐ अल्लाह, हर क़ैदी को रिहाई अता कर।

اَللَّهُمَّ أَصْلِحْ كُلَّ فَاسِدٍ مِنْ أُمُورِ ٱلْمُسْلِمِينَ
अल्लाहुम्मा अस्लिह कुल्ल फ़ासिदिन मिन उमूरिल मुस्लिमी़न
ऐ अल्लाह, मुसलमानों के बिगड़े हुए काम दुरुस्त कर दे।

اَللَّهُمَّ ٱشْفِ كُلَّ مَرِيضٍ
अल्लाहुम्मा इश्फि कुल्ल मरीज़
ऐ अल्लाह, हर बीमार को शिफ़ा अता कर।

اَللَّهُمَّ سُدَّ فَقْرَنَا بِغِنَاكَ
अल्लाहुम्मा सुद्द फ़क़्रना बि-ग़िनाक
ऐ अल्लाह, हमारी ग़ुरबत को अपनी दौलत से पूरा कर दे।

اَللَّهُمَّ غَيِّرْ سُوءَ حَالِنَا بِحُسْنِ حَالِكَ
अल्लाहुम्मा ग़य्यिर सूअ हालिना बिहुस्नि हालिक
ऐ अल्लाह, हमारे बुरे हाल को अपने बेहतर हाल से बदल दे।

اَللَّهُمَّ ٱقْضِ عَنَّا ٱلدَّيْنَ وَأَغْنِنَا مِنَ ٱلْفَقْرِ
अल्लाहुम्मा इक़्ज़ि अन्नाद्दैन व अग़्निना मिनल फ़क़्र
ऐ अल्लाह, हमारा कर्ज़ अदा कर दे और हमें ग़ुरबत से बेनियाज़ कर दे।

إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
इन्नका अला कुल्लि शय्इन क़दीर
बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।


दुआ की तफ़सीर – दुआ 3 अदख़िल

मराजि़अ व हवाले
काफ़अमी की मिस्बाह, 617; बलद, 222; मुस्तद्रक, जिल्द 7, सफ़्हा 447; बिहारुल अनवार, जिल्द 95, सफ़्हा 120।


दुआ अल्लाहुम्मा अरज़ुक़्नी
اللّهُمَّ ارْزُقْنِي
अल्लाहुम्मा अरज़ुक़्नी
सय्यिद इब्ने ताऊस ने रिवायत की है कि इमाम सादिक (अ.स.) और इमाम काज़िम (अ.स.) ने फरमाया कि माहे रमज़ान में हर फर्ज़ नमाज़ के बाद ये दुआ पढ़ी जाए:



اَللَّهُمَّ ٱرْزُقْنِي حَجَّ بَيْتِكَ ٱلْحَرَامِ
अल्लाहुम्मा इरज़ुक़्नी हज्ज बैतिकल हराम
ऐ अल्लाह, मुझे अपने घर बैतुल हराम का हज्ज नसीब फरमा।

فِي عَامِي هٰذَا وَفِي كُلِّ عَامٍ
फ़ी आमि हाज़ा व फ़ी कुल्लि आम
इस साल और हर साल।

مَا أَبْقَيْتَنِي فِي يُسْرٍ مِنْكَ وَعَافِيَةٍ وَسَعَةِ رِزْقٍ
मा अबक़ैतनी फ़ी युस्रिन मिंक व आफ़ियतिन व सअति रिज़्क
जब तक तू मुझे ज़िंदा रखे, आसानी, आफ़ियत और वसीअ रोज़ी के साथ।

وَلاَ تُخْلِنِي مِنْ تِلْكَ ٱلْمَوَاقِفِ ٱلْكَرِيمَةِ
व ला तुख़्लिनी मिन तिल्कल मवाक़िफिल करीमह
मुझे उन मुबारक मुक़ामात से महरूम न रखना।

وَٱلْمَشَاهِدِ ٱلشَّرِيفَةِ
वल मशाहिदिश शरीफ़ह
और मुक़द्दस ज़ियारतगाहों से।

وَزِيَارَةِ قَبْرِ نَبِيِّكَ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَآلِهِ
व ज़ियारति क़ब्रि नबिय्यिका सलवातुका अलैहि व आलिहि
और तेरे नबी (स.अ.व.) की क़ब्र की ज़ियारत से।

وَفِي جَمِيعِ حَوَائِجِ ٱلدُّنْيَا وَٱلآخِرَةِ فَكُنْ لِي
व फ़ी जमीइ हवाइज़िद्दुन्या वल आख़िरह फ़कुन ली
दुनिया और आख़िरत की तमाम हाजतों में मेरा मददगार बन।

اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ
अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका फ़ी मा तक़्ज़ी व तुक़द्दिरु
ऐ अल्लाह, जो तू फैसला करता और मुक़र्रर करता है, उसमें मैं तुझसे सवाल करता हूँ।

مِنَ ٱلأَمْرِ ٱلْمَحْتُومِ فِي لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ
मिनल अम्रिल महतूम फ़ी लै़लतिल क़द्र
शब-ए-क़द्र के पक्के फ़ैसलों में से।

مِنَ ٱلْقَضَاءِ ٱلَّذِي لاَ يُرَدُّ وَلاَ يُبَدَّلُ
मिनल क़ज़ाइल्लज़ी ला युरद्दु व ला युबद्दलु
जो न टलता है न बदला जाता है।

أَنْ تَكْتُبَنِي مِنْ حُجَّاجِ بَيْتِكَ ٱلْحَرَامِ
अन तकतुबनी मिन हुज्जाजि बैतिकल हराम
मुझे अपने घर के हाजियों में लिख दे।

ٱلْمَبْرُورِ حَجُّهُمُ
अल मबरूरि हज्जुहुम
जिनका हज्ज कबूल हो।

ٱلْمَشْكُورِ سَعْيُهُمُ
अल मश्कूरि सअयुहुम
जिनकी कोशिश मक़बूल हो।

ٱلْمَغْفُورِ ذُنُوبُهُمُ
अल मग़फूरि ज़ुनूबुहुम
जिनके गुनाह बख्श दिए गए हों।

ٱلْمُكَفَّرِ عَنْهُمْ سَيِّئَاتُهُمْ
अल मुकफ़्फरि अन्हुम सय्यिआतिहुम
और जिनकी बुराइयाँ माफ़ कर दी गई हों।

وَٱجْعَلْ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ
वजअल फ़ी मा तक़्ज़ी व तुक़द्दिरु
और जो तू फैसला करता है उसमें।

أَنْ تُطِيلَ عُمْرَي
अन तुतीला उम्री
मेरी उम्र दराज़ कर दे।

وَتُوَسِّعَ عَلَيَّ رِزْقِي
व तुवस्सिअ अ़लय्या रिज़्की
और मेरा रिज़्क वसीअ कर दे।

وَتُؤَدِّيَ عَنِّي أَمَانَتِي وَدَيْنِي
व तुअद्दिया अन्नी अमानती व दैनी
और मेरी अमानतें और कर्ज़ अदा करवा दे।

آمِين رَبَّ ٱلْعَالَمِينَ
आमीन रब्बल आलमीन
ऐ जहानों के रब, मेरी दुआ क़बूल फरमा।

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