ज़्यारत जामिया कबीरा
यह ज़्यारत, ज़्यारतों की एक बहुत बड़ी और मुकम्मल शक्ल है
यह ज़्यारत अपने बयान और अंदाज़ में बिल्कुल अलग है और अल्लाह की नज़र में अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) के बहुत बुलंद मक़ाम को बयान करती है।
अल्लामा मजलिसी फ़रमाते हैं कि यह ज़ियारत अपने मत्न, सनद, फ़साहत और वज़ाहत के एतबार से सबसे आला और मुकम्मल ज़ियारतों में से है। अपनी किताब मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह की शरह में अल्लामा मजलिसी के वालिद ने भी ज़िक्र किया है कि यह ज़ियारत सबसे बेहतरीन और मुकम्मल है और वह जब भी किसी भी इमामे मासूम (अलैहिस्सलाम) के रोज़े में हाज़िर होते थे तो इसी ज़ियारत के अलावा कोई और ज़ियारत नहीं पढ़ते थे।
यह ज़ियारत शैख़ सदूक़ ने अपनी दो किताबों मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह और उयून अख़बार अर-रज़ा में रिवायत की है। मूसा बिन अब्दुल्लाह नख़ई बयान करते हैं कि उन्होंने इमाम अली नकी अल-हादी (अलैहिस्सलाम) से अर्ज़ किया: “ऐ औलादे रसूलुल्लाह! मुझे ऐसी जामे और बलीग़ ज़ियारत तालीम फ़रमाइए जिसे मैं आप सब की ज़ियारत के वक़्त पढ़ सकूँ।”
इमाम महदी (अलैहिस्सलाम) ने अपने तमाम चाहने वालों और पैरवी करने वालों के लिए इस ज़ियारत की तीन मर्तबा ताकीद फ़रमाई — जामिया! जामिया! जामिया! — जैसा कि हाजी नूरी ने नज्मुस्साक़िब, सफ़ा 243 में बयान किया है। .






اَلسَّلاَمُ عَلَيْكُمْ يَا أَهْلَ بَيْتِ ٱلنُّبُوَّةِ
अस्सलामु अलैकुम या अहला बैतिन्नुबूव्वत
तुम पर सलाम हो ऐ अहले बैते नबूवत

وَمَوْضِعَ ٱلرِّسَالَةِ
व मवज़िअर रिसालत
और रिसालत का मक़ाम हो

وَمُخْتَلَفَ ٱلْمَلاَئِكَةِ
व मुख़्तलफ़ल मलाइका
और फ़रिश्तों के आने जाने की जगह हो

وَمَهْبِطَ ٱلْوَحْيِ
व महबितल वाही
और वही के उतरने का मुक़ाम हो

وَمَعْدِنَ ٱلرَّحْمَةِ
व मादनर्रहमत
और रहमत का मअदन हो

وَخُزَّانَ ٱلْعِلْمِ
व खुज़्ज़ानल इल्म
और इल्म के ख़ज़ानेदार हो

وَمُنْتَهَىٰ ٱلْحِلْمِ
व मुन्तहल हिल्म
और हिल्म की इंतिहा हो

وَأُصُولَ ٱلْكَرَمِ
व उसूलल करम
और करम की अस्ल हो

وَقَادَةَ ٱلْأُمَمِ
व क़ादतल उमम
और तमाम उम्मतों के रहनुमा हो

وَأَوْلِيَاءَ ٱلنِّعَمِ
व औलियाअन्निअम
और नेमतों के वली हो

وَعَنَاصِرَ ٱلْأَبْرَارِ
व अनासिरल अबरार
और अबरार की बुनियाद हो

وَدَعَائِمَ ٱلْأَخْيَارِ
व दआइमल अख़यार
और अख़यार के सुतून हो

وَسَاسَةَ ٱلْعِبَادِ
व सासतल इबाद
और बंदों के मुदब्बिर हो

وَأَرْكَانَ ٱلْبِلاَدِ
व अर्कानल बिलाद
और मुल्कों के अरकान हो

وَأَبْوَابَ ٱلْإِيـمَانِ
व अबवाबल ईमान
और ईमान के दरवाज़े हो

وَأُمَنَاءَ ٱلرَّحْمٰنِ
व उमनाअर्रहमान
और रहमान के अमीन हो

وَسُلاَلَةَ ٱلنَّبِيِّينَ
व सुलालतन्नबीयीन
और नबियों की नस्ल से हो

وَصَفْوَةَ ٱلْمُرْسَلِينَ
व सफ़्वतल मुरसलीन
और रसूलों की चुनी हुई जमाअत हो

وَعِتْرَةَ خِيَرَةِ رَبِّ ٱلْعَالَمِينَ
व इत्रत ख़ियारति रब्बिल आलमीन
और रब्बुल आलमीन के बरगुज़ीदा लोगों की इत्रत हो

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ أَئِمَّةِ ٱلْهُدَىٰ
अस्सलामु अला अइम्मतिल हुदा
सलाम हो हिदायत के इमामों पर

وَمَصَابِيحِ ٱلدُّجَىٰ
व मसाबिहिद्दुजा
और तारीकियों में रौशन चराग़ हो

وَأَعْلاَمِ ٱلتُّقَىٰ
व अअलामित्तुक़ा
और तक़वा की निशानियाँ हो

وَذَوِي ٱلنُّهَىٰ
व जविन्नुहा
और अक़्ल वालों में से हो

وَأُوْلِي ٱلْحِجَىٰ
व ऊलिल हिजा
और समझ और बसीरत रखने वाले हो

وَكَهْفِ ٱلْوَرَىٰ
व कहफ़िल वरा
और मख़लूक़ के लिए पनाह हो

وَوَرَثَةِ ٱلْأَنْبِيَاءِ
व वरसतिल अंबिया
और अंबिया के वारिस हो

وَٱلْمَثَلِ ٱلْأَعْلَىٰ
वलमस़लिल अअला
और आला तरीन नमूना हो

وَٱلدَّعْوَةِ ٱلْحُسْنَىٰ
वद्दअवतिल हुस्ना
और बेहतरीन दावत हो

وَحُجَجِ ٱللَّهِ عَلَىٰ أَهْلِ ٱلدُّنْيَا
व हुजजिल्लाहि अला अहलिद्दुन्या
और दुनिया वालों पर अल्लाह की हुज्जत हो

وَٱلْآخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰ
वलआख़िरति वलऊला
और आख़िरत और पहली दुनिया में भी

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ مَحَالِّ مَعْرِفَةِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला महाल्लि मअरिफ़तिल्लाह
सलाम हो उन मक़ामात पर जहाँ अल्लाह की मअरिफ़त है

وَمَسَاكِنِ بَرَكَةِ ٱللَّهِ
व मसाकिनि बरकातिल्लाह
और अल्लाह की बरकतों के ठिकाने हो

وَمَعَادِنِ حِكْمَةِ ٱللَّهِ
व मआदिनि हिकमतिल्लाह
और अल्लाह की हिकमत के ख़ज़ाने हो

وَحَفَظَةِ سِرِّ ٱللَّهِ
व हफ़ज़तिसिर्रिल्लाह
और अल्लाह के राज़ों के निगहबान हो

وَحَمَلَةِ كِتَابِ ٱللَّهِ
व हमलतिल किताबिल्लाह
और अल्लाह की किताब उठाने वाले हो

وَأَوْصِيَاءِ نَبِيِّ ٱللَّهِ
व औसियाइ नबिय्यिल्लाह
और नबीए ख़ुदा के वसी हो

وَذُرِّيَّةِ رَسُولِ ٱللَّهِ
व ज़ुर्रिय्यति रसूलिल्लाह
और रसूलुल्लाह की औलाद हो

صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही
अल्लाह उन पर और उनके आल पर दुरूद भेजे

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और उन पर अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلدُّعَاةِ إِلَىٰ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला द्दुआति इलल्लाह
सलाम हो अल्लाह की तरफ़ बुलाने वालों पर

وَٱلْأَدِلاَّءِ عَلَىٰ مَرْضَاتِ ٱللَّهِ
वलअदिल्लाइ अला मर्दातिल्लाह
और अल्लाह की रज़ा की रहनुमाई करने वालों पर

وَٱلْمُسْتَقِرِّينَ فِي أَمْرِ ٱللَّهِ
वलमुस्तक़िर्रीना फी अम्रिल्लाह
और अल्लाह के हुक्म पर क़ायम रहने वालों पर

وَٱلتَّامِّينَ فِي مَحَبَّةِ ٱللَّهِ
वलत्ताम्मीना फी महब्बतिल्लाह
और अल्लाह की मोहब्बत में कामिल होने वालों पर

وَٱلْمُخْلِصِينَ فِي تَوْحِيدِ ٱللَّهِ
वलमुख़लिसीना फी तौहीदिल्लाह
और अल्लाह की तौहीद में ख़ालिस रहने वालों पर

وَٱلْمُظْهِرِينَ لِأَمْرِ ٱللَّهِ وَنَهْيِهِ
वलमुज़्हिरीना लिएम्रिल्लाहि व नह्यिही
और अल्लाह के हुक्म और मनाही को ज़ाहिर करने वालों पर

وَعِبَادِهِ ٱلْمُكْرَمِينَ
व इबादिहिल मुकरामीन
और अल्लाह के इज़्ज़त दिए हुए बंदों पर

ٱلَّذِينَ لَا يَسْبِقُونَهُ بِٱلْقَوْلِ
अल्लज़ीना ला यस्बिक़ूनहू बिलक़ौलि
जो उससे पहले बात नहीं करते

وَهُمْ بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ
व हुम बि-अम्रिही यअमलूना
और उसके हुक्म के मुताबिक़ अमल करते हैं

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें उन पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْأَئِمَّةِ ٱلدُّعَاةِ
अस्सलामु अला अल-अइम्मतिद्दुआत
सलाम हो दावत देने वाले इमामों पर

وَٱلْقَادَةِ ٱلْهُدَاةِ
वल-क़ादतिल-हुदात
और हिदायत देने वाले रहनुमाओं पर

وَٱلسَّادَةِ ٱلْوُلاَةِ
वस्सादतिल-वुलात
और सरदारों और हाकिमों पर

وَٱلذَّادَةِ ٱلْحُمَاةِ
वज़्ज़ादतिल-हुमात
और हिफ़ाज़त करने वाले मुहाफ़िज़ों पर

وَأَهْلِ ٱلذِّكْرِ
व अह्लिज़-ज़िक्र
और ज़िक्र वालों पर

وَأُوْلِي ٱلْأَمْرِ
व ऊलिल-अम्र
और उलुल-अम्र पर

وَبَقِيَّةِ ٱللَّهِ وَخِيَرَتِهِ
व बक़िय्यतिल्लाहि व ख़ियरतिही
और अल्लाह की बाक़ी रखी हुई हुकूमत और उसके चुने हुओं पर

وَحِزْبِهِ وَعَيْبَةِ عِلْمِهِ
व हिज़्बिही व अयबत-ए-इल्मिही
और उसके गिरोह और उसके इल्म की अमानत पर

وَحُجَّتِهِ وَصِرَاطِهِ
व हुज्जतिही व सिरातिही
और उसकी हुज्जत और उसके रास्ते पर

وَنُورِهِ وَبُرْهَانِهِ
व नूरिही व बुर्हानिही
और उसके नूर और उसकी दलील पर

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें उन पर हों

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلاَّ ٱللَّهُ
अश्हदु अन् ला इलाहा इल्लल्लाह
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
वह्दहू ला शरीका लहू
वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं

كَمَا شَهِدَ ٱللَّهُ لِنَفْسِهِ
कमा शहिदल्लाहु लि-नफ़्सिही
जैसा कि अल्लाह ने खुद अपने लिए गवाही दी

وَشَهِدَتْ لَهُ مَلاَئِكَتُهُ
व शहिदत लहू मलाइकतुहू
और उसके फ़रिश्तों ने भी गवाही दी

وَأُوْلُو ٱلْعِلْمِ مِنْ خَلْقِهِ
व ऊलुल-इल्मि मिन ख़लक़िही
और उसकी मख़लूक़ में से इल्म वालों ने

لَا إِلٰهَ إِلاَّ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
ला इलाहा इल्ला हुवा अल-अज़ीज़ुल-हकीम
उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वही ग़ालिब और हिकमत वाला है

وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ ٱلْمُنْتَجَبُ
व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहुल-मुन्तजब
और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके चुने हुए बंदे हैं

وَرَسُولُهُ ٱلْمُرْتَضَىٰ
व रसूलुहुल मुर्तज़ा
और उसके पसंदीदा रसूल हैं

أَرْسَلَهُ بِٱلْهُدَىٰ وَدِينِ ٱلْحَقِّ
अरस्लहू बिलहुदा व दीनिल हक़्क़
उसे हिदायत और दीन-ए-हक़ के साथ भेजा

لِيُظْهِرَهُ عَلَىٰ ٱلدِّينِ كُلِّهِ
लियुज़्हिरहू अलद्दीनी कुल्लिही
ताकि वह उसे तमाम दीनों पर ग़ालिब कर दे

وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُشْرِكُونَ
व लौ करिहल मुश्रिकून
अगरचे मुश्रिकों को नागवार गुज़रे

وَأَشْهَدُ أَنَّكُمُ ٱلْأَئِمَّةُ ٱلرَّاشِدُونَ
व अश्हदु अन्नकुमुल अइम्मतुर राशिदून
और मैं गवाही देता हूँ कि तुम ही राहे-रास्त दिखाने वाले इमाम हो

ٱلْمَهْدِيُّونَ ٱلْمَعْصُومُونَ
अलमहदिय्यूना अलमअसूूमून
हिदायत पाए हुए और मासूम हो

ٱلْمُكَرَّمُونَ ٱلْمُقَرَّبُونَ
अलमुकर्रमूना अलमुक़र्रबून
इज़्ज़त दिए हुए और क़रीब किए हुए हो

ٱلْمُتَّقُونَ ٱلصَّادِقُونَ
अलमुत्तक़ूना अस्सादिक़ून
परहेज़गार और सच्चे हो

ٱلْمُصْطَفَوْنَ ٱلْمُطيعُونَ لِلَّهِ
अलमुस्तफ़ौना अलमुतिऊना लिल्लाह
चुने हुए और अल्लाह के फ़रमाबरदार हो

ٱلْقَوَّامُونَ بِأَمْرِهِ
अलक़व्वामूना बि-अम्रिही
उसके हुक्म को क़ायम करने वाले हो

ٱلْعَامِلُونَ بِإِرَادَتِهِ
अलआमिलूना बि-इरादतिही
उसकी मर्ज़ी के मुताबिक़ अमल करने वाले हो

ٱلْفَائِزُونَ بِكَرَامَتِهِ
अलफ़ाइज़ूना बि-करामतिही
और उसकी करामत से कामयाब होने वाले हो

إِصْطَفَاكُمْ بِعِلْمِهِ
इस्तफ़ाकुम बि-इल्मिही
उसने तुम्हें अपने इल्म की बुनियाद पर चुना

وَٱرْتَضَاكُمْ لِغَيْبِهِ
वर्तज़ाकुम लिग़ैबिही
और तुम्हें अपने ग़ैब के लिए पसंद किया

وَٱخْتَارَكُمْ لِسِرِّهِ
वख़्तारकुम लिसिर्रिही
और तुम्हें अपने राज़ के लिए चुना

وَٱجْتَبَاكُمْ بِقُدْرَتِهِ
वज्तबाकुम बि-क़ुदरतिही
और अपनी क़ुदरत से तुम्हें बरगुज़ीदा किया

وَأَعَزَّكُمْ بِهُدَاهُ
व अअज़्ज़कुम बि-हुदाहू
और अपनी हिदायत से तुम्हें सरफ़राज़ किया

وَخَصَّكُمْ بِبُرْهَانِهِ
व ख़स्सकुम बि-बुर्हानिही
और अपने बुर्हान से तुम्हें ख़ास किया

وَٱنْتَجَبَكُمْ لِنُورِهِ
वंतजबकुम लि-नूरिही
और तुम्हें अपने नूर के लिए चुना

وَأَيَّدَكُمْ بِرُوحِهِ
व अय्यदकुम बि-रूहिही
और अपनी रूह से तुम्हारी ताईद की

وَرَضِيَكُمْ خُلَفَاءَ فِي أَرْضِهِ
व रज़ियकुम ख़ुलफ़ा-अ फ़ी अरज़िही
और तुम्हें अपनी ज़मीन में ख़लीफ़ा क़बूल किया

وَحُجَجاً عَلَىٰ بَرِيَّتِهِ
व हुजजन् अला बरिय्यतिही
और उसकी मख़लूक़ पर उसकी हुज्जत हो

وَأَنْصَاراً لِدِينِهِ
व अन्सारन् लिदीनिही
और उसके दीन के मददगार हो

وَحَفَظَةً لِسِرِّهِ
व हफ़ज़तन लिसिर्रिही
और उसके राज़ के निगहबान हो

وَخَزَنَةً لِعِلْمِهِ
व ख़ज़नतन लि-इल्मिही
और उसके इल्म के ख़ज़ानेदार हो

وَمُسْتَوْدَعاً لِحِكْمَتِهِ
व मुस्तव्दअन् लि-हिकमतिही
और उसकी हिकमत का अमानतख़ाना हो

وَتَرَاجِمَةً لِوَحْيِهِ
व तराजिमतन लि-वह्यिही
और उसकी वही के तर्जुमान हो

وَأَرْكَاناً لِتَوْحِيدِهِ
व अर्कानन् लि-तौहीदिही
और उसकी तौहीद के सुतून हो

وَشُهَدَاءَ عَلَىٰ خَلْقِهِ
व शुहदा-अ अला ख़लक़िही
और उसकी मख़लूक़ पर गवाह हो

وَأَعْلاَماً لِعِبَادِهِ
व अअलामन् लि-इबादिही
और उसके बंदों के लिए निशानियाँ हो

وَمَنَاراً فِي بِلاَدِهِ
व मनारन् फी बिलादिही
और उसके मुल्कों में रोशनी के मीनार हो

وَأَدِلاَّءَ عَلَىٰ صِرَاطِهِ
व अदिल्ला-अ अला सिरातिही
और उसके रास्ते की तरफ़ रहनुमाई करने वाले हो

عَصَمَكُمُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلزَّلَلِ
असमकुमुल्लाहु मिनज़्ज़ललि
अल्लाह ने तुम्हें لغزش से महफूज़ रखा

وَآمَنَكُمْ مِنَ ٱلْفِتَنِ
व आमनकुम मिनल-फ़ितन
और तुम्हें फ़ितनों से अमान दी

وَطَهَّرَكُمْ مِنَ ٱلدَّنَسِ
व त़ह्हरकुम मिनद्दनसि
और तुम्हें नापाकी से पाक किया

وَأَذْهَبَ عَنْكُمُ ٱلرِّجْسَ
व अज़्हब अन्कुमुर्रिज्स
और तुम से हर नापाकी दूर कर दी

وَطَهَّرَكُمْ تَطْهِيراً
व त़ह्हरकुम तत्हीरन्
और तुम्हें पूरी तरह पाक कर दिया

فَعَظَّمْتُمْ جَلاَلَهُ
फ़अज़्ज़म्तुम जलालहू
तो तुमने उसके जलाल को अज़ीम ठहराया

وَأَكْبَرْتُمْ شَأْنَهُ
व अकबरतुम शानहू
और उसकी शान को बहुत बड़ा माना

وَمَجَّدْتُمْ كَرَمَهُ
व मज्जद्तुम करमहू
और उसके करम को बुलंद किया

وَأَدَمْتُمْ ذِكْرَهُ
व अदम्तुम ज़िक्रहू
और उसके ज़िक्र को जारी रखा

وَوَكَّدْتُمْ مِيثَاقَهُ
व वक्कद्तुम मीसाक़हू
और उसके अहद को मज़बूत किया

وَأَحْكَمْتُمْ عَقْدَ طَاعَتِهِ
व अह्कम्तुम अक़्द ताअतिही
और उसकी इताअत के अहद को पुख़्ता किया

وَنَصَحْتُمْ لَهُ فِي ٱلسِّرِّ وَٱلْعَلاَنِيَةِ
व नसह्तुम लहू फ़िस्सिर्रि वलअलानियह
और ख़ुफ़िया और ज़ाहिर दोनों हालात में उसके लिए ख़ैरख़्वाही की

وَدَعَوْتُمْ إِلَىٰ سَبِيلِهِ
व दअवतुम इला सबीलिही
और उसके रास्ते की तरफ़ बुलाया

بِٱلْحِكْمَةِ وَٱلْمَوْعِظَةِ ٱلْحَسَنَةِ
बिलहिकमतिवल मौइज़तिल हसनह
हिकमत और अच्छी नसीहत के साथ

وَبَذَلْتُمْ أَنْفُسَكُمْ فِي مَرْضَاتِهِ
व बज़ल्तुम अन्फ़ुसकुम फी मर्दातिही
और उसकी रज़ा के लिए अपनी जानें क़ुर्बान कीं

وَصَبَرْتُمْ عَلَىٰ مَا أَصَابَكُمْ فِي جَنْبِهِ
व सबर्तुम अला मा असाबकुम फी जानबिही
और उसकी राह में जो तुम पर आया उस पर सब्र किया

وَأَقَمْتُمُ ٱلصَّلاَةَ
व अक़म्तुमुस्सलात
और नमाज़ क़ायम की

وَآتَيْتُمُ ٱلزَّكَاةَ
व आतैतुमुज़्ज़कात
और ज़कात अदा की

وَأَمَرْتُمْ بِٱلْمَعْرُوفِ
व अमर्तुम बिल-मअरूफ़
और भलाई का हुक्म दिया

وَنَهَيْتُمْ عَنِ ٱلْمُنْكَرِ
व नहैतुम अनिल-मुन्कर
और बुराई से रोका

وَجَاهَدْتُمْ فِي ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِ
व जाहद्तुम फ़िल्लाहि हक्क़ जिहादिही
और अल्लाह की राह में हक़ के साथ जिहाद किया

حَتَّىٰ أَعْلَنْتُمْ دَعْوَتَهُ
हत्ता अअलन्तुम दअवतहू
यहाँ तक कि तुमने उसकी दावत को ज़ाहिर किया

وَبَيَّنْتُمْ فَرَائِضَهُ
व बय्यन्तुम फ़राइज़हू
और उसके फ़राइज़ को वाज़ेह किया

وَأَقَمْتُمْ حُدُودَهُ
व अक़म्तुम हुदूदहू
और उसकी हुदूद को क़ायम किया

وَنَشَرْتُمْ شَرَائِعَ أَحْكَامِهِ
व नशर्तुम शराइअ अहकामिही
और उसके अहकाम की शराइअ को फैलाया

وَسَنَنْتُمْ سُنَّتَهُ
व सनन्तुम सुन्नतहू
और उसकी सुन्नत को जारी किया

وَصِرْتُمْ فِي ذٰلِكَ مِنْهُ إِلَىٰ ٱلرِّضَا
व सिर्तुम फी ज़ालिका मिन्हु इला र्रिज़ा
और इन सब के ज़रिये तुम उसकी रज़ा तक पहुँच गए

وَسَلَّمْتُمْ لَهُ ٱلْقَضَاءَ
व सल्लम्तुम लहुल क़ज़ा
और उसके फ़ैसले के आगे सर झुका दिया

وَصَدَّقْتُمْ مِنْ رُسُلِهِ مَنْ مَضَىٰ
व स़द्दक़्तुम मिन रुुसुलिही मन मज़ा
और उसके पिछले रसूलों की तस्दीक़ की

فَٱلرَّاغِبُ عَنْكُمْ مَارِقٌ
फ़र्राग़िबु अन्कुम मारिक़ुन
तो जो तुमसे मुँह मोड़े वह दीन से बाहर है

وَٱللاَّزِمُ لَكُمْ لاَحِقٌ
वल्लाज़िमु लकुम लाहिक़ुन
और जो तुमसे जुड़ा रहे वह मंज़िल पा लेगा

وَٱلْمُقَصِّرُ فِي حَقِّكُمْ زَاهِقٌ
वल्मुक़स्सिरु फी हक्क़िकुम ज़ाहिक़ुन
और जो तुम्हारे हक़ में कोताही करे वह हलाक़ है

وَٱلْحَقُّ مَعَكُمْ وَفيكُمْ
वल्हक्क़ु मअकुम व फ़ीकुम
और बेशक़ हक़ तुम्हारे साथ है और तुम्हारे अंदर है

وَمِنْكُمْ وَإِلَيْكُمْ
व मिन्कुम व इलैकुम
और तुम से है और तुम ही की तरफ़ लौटता है

وَأَنْتُمْ أَهْلُهُ وَمَعْدِنُهُ
व अन्तुम अहलुहू व मअदिनुहू
और तुम ही उसके अहल और उसका मअदन हो

وَمِيرَاثُ ٱلنُّبُوَّةِ عِنْدَكُمْ
व मीरासुन्नुबूव्वति इन्दकुम
और नबूवत की विरासत तुम्हारे पास है

وَإِيَابُ ٱلْخَلْقِ إِلَيْكُمْ
व इयाबुल ख़लक़ि इलैकुम
और मख़लूक़ की वापसी तुम्हारी तरफ़ है

وَحِسَابُهُمْ عَلَيْكُمْ
व हिसाबुहुम अलैकुम
और उनका हिसाब तुम पर है

وَفَصْلُ ٱلْخِطَابِ عِنْدَكُمْ
व फ़स्लुल ख़िताबि इन्दकुम
और फ़ैसला कुन बात तुम्हारे पास है

وَآيَاتُ ٱللَّهِ لَدَيْكُمْ
व आयातुल्लाहि लदैइकुम
और अल्लाह की आयात तुम्हारे पास हैं

وَعَزَائِمُهُ فِيكُمْ
व अज़ाइमुहू फ़ीकुम
और उसके अज़ाइम तुम में हैं

وَنُورُهُ وَبُرْهَانُهُ عِنْدَكُمْ
व नूरुहू व बुर्हानुहू इन्दकुम
और उसका नूर और उसका बुर्हान तुम्हारे पास है

وَأَمْرُهُ إِلَيْكُمْ
व अम्रुहू इलैकुम
और उसका अम्र तुम्हारी तरफ़ है

مَنْ وَالاَكُمْ فَقَدْ وَالَىٰ ٱللَّهَ
मन वालाकुम फ़क़द वालल्लाह
जिसने तुमसे वलायत की उसने अल्लाह से वलायत की

وَمَنْ عَادَاكُمْ فَقَدْ عَادَىٰ ٱللَّهَ
व मन आदाकुम फ़क़द आदल्लाह
और जिसने तुमसे दुश्मनी की उसने अल्लाह से दुश्मनी की

وَمَنْ أَحَبَّكُمْ فَقَدْ أَحَبَّ ٱللَّهَ
व मन अहब्बकुम फ़क़द अहब्बल्लाह
और जिसने तुमसे मोहब्बत की उसने अल्लाह से मोहब्बत की

وَمَنْ أَبْغَضَكُمْ فَقَدْ أَبْغَضَ ٱللَّهَ
व मन अबग़दकुम फ़क़द अबग़दल्लाह
और जिसने तुमसे अदावत रखी उसने अल्लाह से अदावत रखी

وَمَنِ ٱعْتَصَمَ بِكُمْ فَقَدِ ٱعْتَصَمَ بِٱللَّهِ
व मन इअतसम बिकुम फ़क़द इअतसम बिल्लाह
और जिसने तुम्हारा दामन थामा उसने अल्लाह का सहारा लिया

أَنْتُمُ ٱلصِّرَاطُ ٱلْأَقْوَمُ
अन्तुमुस्सिरातुल अक़्वम
तुम ही सबसे सीधा रास्ता हो

وَشُهَدَاءُ دَارِ ٱلْفَنَاءِ
व शुहदा-उ दारिल फ़ना
और फ़ना की दुनिया के गवाह हो

وَشُفَعَاءُ دَارِ ٱلْبَقَاءِ
व शुफ़आ-उ दारिल बक़ा
और बाक़ी रहने वाली दुनिया में शफ़ीअ हो

وَٱلرَّحْمَةُ ٱلْمَوْصُولَةُ
वर्रहमतुल मवसूलह
और जुड़ी हुई रहमत हो

وَٱلآيَةُ ٱلْمَخْزُونَةُ
वलआयतुल मख़ज़ूना
और जमा की हुई निशानी हो

وَٱلْأَمَانَةُ ٱلْمَحْفُوظَةُ
वलअमानतुल महफ़ूज़ह
और महफ़ूज़ अमानत हो

وَٱلْبَابُ ٱلْمُبْتَلَىٰ بِهِ ٱلنَّاسُ
वलबाबुल मुब्तला बिहिन्नास
और वह दरवाज़ा हो जिससे लोगों की आज़माइश होती है

مَنْ أَتَاكُمْ نَجَا
मन अताकुम नजा
जो तुम्हारे पास आया वह नजात पा गया

وَمَنْ لَمْ يَأْتِكُمْ هَلَكَ
व मन लम् यअतिकुम हलक
और जो तुम्हारे पास न आया वह हलाक हो गया

إِلَىٰ ٱللَّهِ تَدْعُونَ
इला अल्लाहि तदऊना
तुम अल्लाह की तरफ़ बुलाते हो

وَعَلَيْهِ تَدُلُّونَ
व अलैहि तदुल्लूना
और उसी की तरफ़ रहनुमाई करते हो

وَبِهِ تُؤْمِنُونَ
व बिही तूमिनूना
और उसी पर ईमान रखते हो

وَلَهُ تُسَلِّمُونَ
व लहू तुसल्लिमूना
और उसी के आगे सर झुकाते हो


وَبِأَمْرِهِ تَعْمَلُونَ
व-बि-अम्रिही तअमलूना
और तुम उसके हुक्म से अमल करते हो

وَإِلَىٰ سَبِيلِهِ تُرْشِدُونَ
व-इला सबीलिही तुरशिदूना
और उसकी राह की तरफ़ रहनुमाई करते हो

وَبِقَوْلِهِ تَحْكُمُونَ
व-बि-क़ौलिही तहकुमूना
और उसके क़ौल के मुताबिक़ फ़ैसला करते हो

سَعَدَ مَنْ وَالاَكُمْ
सअदा मन वालाकुम
कामयाब हुआ वह जिसने तुमसे वलायत रखी

وَهَلَكَ مَنْ عَادَاكُمْ
व-हलका मन आदाकुम
और हलाक हुआ वह जिसने तुमसे दुश्मनी की

وَخَابَ مَنْ جَحَدَكُمْ
व-ख़ाबा मन जहदकुम
और नामुराद रहा वह जिसने तुम्हारा इनकार किया

وَضَلَّ مَنْ فَارَقَكُمْ
व-ज़ल्ला मन फ़ारक़कुम
और गुमराह हुआ वह जिसने तुमसे जुदाई की

وَفَازَ مَنْ تَمَسَّكَ بِكُمْ
व-फ़ाज़ा मन तमस्सका बिकुम
और फ़लाह पाई उसने जिसने तुम्हें मज़बूती से थाम लिया

وَأَمِنَ مَنْ لَجَأَ إِلَيْكُمْ
व-अमिना मन लजअ इलैकुम
और महफ़ूज़ रहा वह जिसने तुम्हारी पनाह ली

وَسَلِمَ مَنْ صَدَّقَكُمْ
व-सलिमा मन सद्दक़कुम
और निजात पाई उसने जिसने तुम्हारी तस्दीक़ की

وَهُدِيَ مَنِ ٱعْتَصَمَ بِكُمْ
व-हुदिया मन इतअसमा बिकुम
और हिदायत पाया वह जिसने तुम्हारा सहारा लिया

مَنِ ٱتَّبَعَكُمْ فَٱلْجَنَّةُ مَأْوَاهُ
मनित्तबा-अकुम फ़ल-जन्नतु मअवाहु
जिसने तुम्हारी पैरवी की उसका ठिकाना जन्नत है

وَمَنْ خَالَفَكُمْ فَٱلنَّارُ مَثْوَاهُ
व-मन ख़ालफ़कुम फ़न्नारु मथ्वाहु
और जिसने तुम्हारी मुख़ालफ़त की उसका ठिकाना जहन्नम है

وَمَنْ جَحَدَكُمْ كَافِرٌ
व-मन जहदकुम काफ़िरुन
और जिसने तुम्हारा इनकार किया वह काफ़िर है

وَمَنْ حَارَبَكُمْ مُشْرِكٌ
व-मन हारबकुम मुश्रिकुन
और जिसने तुमसे जंग की वह मुश्रिक है

وَمَنْ رَدَّ عَلَيْكُمْ فِي أَسْفَلِ دَرْكٍ مِنَ ٱلْجَحِيمِ
व-मन रद्दा अलैकुम फ़ी असफ़लि दरकिन मिनल-जहीम
और जिसने तुम पर ऐतराज़ किया वह जहन्नम के सबसे निचले दर्जे में होगा

أَشْهَدُ أَنَّ هٰذَا سَابِقٌ لَكُمْ فِيمَا مَضَىٰ
अश्हदु अन्ना हाज़ा साबिक़ुन लकुम फ़ीमा मज़ा
मैं गवाही देता हूँ कि यह सब पहले से तुम्हारे लिए मुक़र्रर था

وَجَارٍ لَكُمْ فِيمَا بَقِيَ
व-जारिन लकुम फ़ीमा बक़िया
और जो बाक़ी है उसमें भी जारी रहेगा

وَأَنَّ أَرْوَاحَكُمْ وَنُورَكُمْ
व-अन्ना अरवाहकुम व नूरकुम
और यह कि तुम्हारी रूहें और तुम्हारा नूर

وَطينَتَكُمْ وَاحِدَةٌ
व-तीनतकुम वाहिदतुन
और तुम्हारी फ़ितरत एक ही है


طَابَتْ وَطَهُرَتْ
ताबत व तहुरत
पाक और मुतह्हर हैं

بَعْضُهَا مِنْ بَعْضٍ
बअ़दुहा मिन बअ़्दिन
एक दूसरे से हैं

خَلَقَكُمُ ٱللَّهُ أَنْوَاراً
ख़लक़कुमुल्लाहु अनवारन
अल्लाह ने तुम्हें नूरों के रूप में पैदा किया

فَجَعَلَكُمْ بِعَرْشِهِ مُحْدِقِينَ
फ़जअलकुम बिअर्शिही मुह्दिक़ीन
फिर तुम्हें अपने अर्श के चारों ओर क़ायम रखा

حَتَّىٰ مَنَّ عَلَيْنَا بِكُمْ
हत्ता मन्ना अलैना बिकुम
यहाँ तक कि उसने हम पर तुम्हारे ज़रिये एहसान किया

فَجَعَلَكُمْ فِي بُيُوتٍ
फ़जअलकुम फ़ी बयूतिन
फिर तुम्हें उन घरों में रखा

أَذِنَ ٱللَّهُ أَنْ تُرْفَعَ
अधिनल्लाहु अन तुरफ़अ़
जिन्हें अल्लाह ने बुलंद किए जाने की इजाज़त दी

وَيُذْكَرَ فِيهَا ٱسْمُهُ
व युज़्करा फ़ीहा इस्मुहू
और जिनमें उसका नाम लिया जाता है

وَجَعَلَ صَلَوَاتِنَا عَلَيْكُمْ
व जअ़ला सलवातिना अलैकुम
और हमारी तुम पर दरूद को क़रार दिया

وَمَا خَصَّنَا بِهِ مِنْ وِلاَيَتِكُمْ
व मा ख़स्सना बिही मिन विलायतकुम
और जो उसने हमें तुम्हारी विलायत से नवाज़ा

طِيباً لِخَلْقِنَا
तीबन लि-ख़ल्क़िना
हमारी फ़ितरत की पाकीज़गी के लिए

وَطَهَارَةً لأَنْفُسِنَا
व तह़ारतन लि-अनफ़ुसिना
और हमारी जानों की तहारत के लिए

وَتَزْكِيَةً لَنَا
व तज़्क़ियतन लना
और हमारे लिए तज़्किया के तौर पर

وَكَفَّارَةً لِذُنُوبِنَا
व कफ़्फ़ारतन लि-ज़ुनूबिना
और हमारे गुनाहों की माफ़ी के लिए

فَكُنَّا عِنْدَهُ مُسَلِّمِينَ بِفَضْلِكُمْ
फ़कुन्ना इन्दहू मुसल्लिमीन बि-फ़ज़्लिकुम
तो हम उसके यहाँ तुम्हारे फ़ज़्ल के तस्लीम करने वाले ठहरे

وَمَعْرُوفِينَ بِتَصْدِيقِنَا إِيَّاكُمْ
व मअरूफ़ीना बितस्दीक़िना इय्याकुम
और तुम्हारी तस्दीक़ के कारण पहचाने गए

فَبَلَغَ ٱللَّهُ بِكُمْ أَشْرَفَ مَحَلِّ ٱلْمُكَرَّمِينَ
फ़बलग़ल्लाहु बिकुम अशरफ़ा महल्लिल मुक़र्रमीन
तो अल्लाह ने तुम्हारे ज़रिये तुम्हें इज़्ज़त वालों के सबसे ऊँचे मक़ाम तक पहुँचा दिया

وَأَعْلَىٰ مَنَازِلِ ٱلْمُقَرَّبِينَ
व अअ़ला मनाज़िलिल मुक़र्रबीन
और क़रीब किए गए लोगों के सबसे बुलंद दर्जे पर

وَأَرْفَعَ دَرَجَاتِ ٱلْمُرْسَلِينَ
व अरफ़अ़ दरजातिल मुर्सलीन
और रसूलों के सबसे ऊँचे मरातिब पर

حَيْثُ لَا يَلْحَقُهُ لاَحِقٌ
हैथु ला यल्हक़ुहू लाहिक़ुन
जहाँ कोई भी तुम्हें पा नहीं सकता

وَلاَ يَفُوقُهُ فَائِقٌ
व ला यफ़ूक़ुहू फ़ाइक़ुन
और न कोई तुमसे आगे बढ़ सकता है

وَلاَ يَسْبِقُهُ سَابِقٌ
व ला यस्बिक़ुहू साबिक़ुन
और न कोई तुमसे सबक़त ले सकता है

وَلاَ يَطْمَعُ فِي إِدْرَاكِهِ طَامِعٌ
व ला यत्मअ़ु फ़ी इद्राकिही तामिअ़ुन
और न कोई तुम्हारे मक़ाम तक पहुँचने की तमन्ना कर सकता है

حَتَّىٰ لَا يَبْقَىٰ مَلَكٌ مُقَرَّبٌ
हत्ता ला यब्क़ा मलिकुन मुक़र्रबुन
यहाँ तक कि कोई मुक़र्रब फ़रिश्ता भी बाक़ी नहीं रहता

وَلاَ نَبِيٌّ مُرْسَلٌ
व ला नबीय्युन मुरसलुन
और न कोई भेजा हुआ नबी

وَلاَ صِدِّيقٌ وَلاَ شَهِيدٌ
व ला सिद्दीक़ुन व ला शहीदुन
न कोई सिद्दीक़ और न कोई शहीद

وَلاَ عَالِمٌ وَلاَ جَاهِلٌ
व ला आलिमुन व ला जाहिलुन
न कोई आलिम और न कोई जाहिल

وَلاَ دَنِيٌّ وَلاَ فَاضِلٌ
व ला दनिय्युन व ला फ़ाज़िलुन
न कोई नीचा और न कोई अफ़ज़ल

وَلاَ مُؤْمِنٌ صَالِحٌ
व ला मोमिनुन सालिहुन
न कोई नेक मोमिन

وَلاَ فَاجِرٌ طَالِحٌ
व ला फ़ाजिरुन तालिहुन
न कोई बदकार और न बदचलन

وَلاَ جَبَّارٌ عَنِيدٌ
व ला जब्बारुन अनीदुन
न कोई ज़ालिम सरकश

وَلاَ شَيْطَانٌ مَرِيدٌ
व ला शैतानुन मरीदुन
न कोई सरकश शैतान

وَلاَ خَلْقٌ فِيمَا بَيْنَ ذٰلِكَ شَهِيدٌ
व ला ख़ल्क़ुन फ़ीमा बैन ज़ालिका शहीदुन
और न ही इनके दरमियान कोई भी मख़लूक़ गवाह रही

إِلاَّ عَرَّفَهُمْ جَلاَلَةَ أَمْرِكُمْ
इल्ला अर्रफ़हुम जलालत अम्रिकुम
मगर यह कि अल्लाह ने सबको तुम्हारे अम्र की अज़मत बता दी

وَعِظَمَ خَطَرِكُمْ
व अ़ज़मा ख़तरिकुम
और तुम्हारे मक़ाम की अहमियत

وَكِبَرَ شَأْنِكُمْ
व किबर शानिकुम
और तुम्हारी शान की बुज़ुर्गी

وَتَمَامَ نُورِكُمْ
व तमाम नूरिकुम
और तुम्हारे नूर की कामिलियत

وَصِدْقَ مَقَاعِدِكُمْ
व सिद्क़ मक़ाअ़िदिकुम
और तुम्हारे मक़ाम की सच्चाई

وَثَبَاتَ مَقَامِكُمْ
व सबात मक़ामिकुम
और तुम्हारे मक़ाम की पुख़्तगी

وَشَرَفَ مَحَلِّكُمْ وَمَنْزِلَتِكُمْ عِنْدَهُ
व शरफ़ महल्लिकुम व मंज़िलतिकुम इन्दहू
और अल्लाह के यहाँ तुम्हारे मक़ाम और मंज़िलत की इज़्ज़त

وَكَرَامَتَكُمْ عَلَيْهِ
व करामतकुम अलैह
और अल्लाह के नज़दीक तुम्हारी करामत

وَخَاصَّتَكُمْ لَدَيْهِ
व ख़ास्सतकुम लदैह
और उसके पास तुम्हारी ख़ुसूसी क़ुरबत

وَقُرْبَ مَنْزِلَتِكُمْ مِنْهُ
व क़ुरबा मंज़िलतिकुम मिनहू
और उसकी तरफ़ तुम्हारी क़रीबी मंज़िलत

بِأَبِي أَنْتُمْ وَأُمِّي
बि-अबी अन्तुम व उम्मी
मेरे माँ बाप तुम पर क़ुर्बान हों

وَأَهْلِي وَمَالِي وَأُسْرَتِي
व अहली व माली व उस्रती
और मेरा घराना, माल और औलाद भी

أُشْهِدُ ٱللَّهَ وَأُشْهِدُكُمْ
उश्हिदुल्लाह व उश्हिदुकुम
मैं अल्लाह को और तुम्हें गवाह बनाता हूँ

أَنِّي مُؤْمِنٌ بِكُمْ وَبِمَا آمَنْتُمْ بِهِ
अन्नी मोमिनुन बिकुम व बिमा आमन्तुम बिही
कि मैं तुम पर ईमान रखता हूँ और उस पर भी जिस पर तुम ईमान रखते हो

كَافِرٌ بَعَدُوِّكُمْ وَبِمَا كَفَرْتُمْ بِهِ
काफ़िरुन बि-अ़दुव्विकुम व बिमा कफ़रतुम बिही
और तुम्हारे दुश्मनों से और उस से बेज़ार हूँ जिससे तुम बेज़ार हो

مُسْتَبْصِرٌ بِشَأْنِكُمْ
मुस्तबसिरुन बिशानिकुम
मैं तुम्हारे अम्र को अच्छी तरह पहचानता हूँ

وَبِضَلاَلَةِ مَنْ خَالَفَكُمْ
व बि-दलालत मन ख़ालफ़कुम
और उनके गुमराह होने को भी जो तुम्हारी मुख़ालफ़त करते हैं

مُوَالٍ لَكُمْ وَلأَوْلِيَائِكُمْ
मुवालिन लकुम व लि-औलियाइकुम
मैं तुम्हारा और तुम्हारे दोस्तों का दोस्त हूँ

مُبْغِضٌ لأَعْدَائِكُمْ وَمُعَادٍ لَهُمْ
मुब्ग़िज़ुन लि-अ़अ़दाइकुम व मुआदिन लहुम
और तुम्हारे दुश्मनों से दुश्मनी रखता हूँ

سِلْمٌ لِمَنْ سَالَمَكُمْ
सिल्मुन लिमन सालमकुम
मैं उनसे अमन में हूँ जो तुमसे अमन में हैं

وَحَرْبٌ لِمَنْ حَارَبَكُمْ
व हरबुन लिमन हारबकुम
और उनसे जंग में हूँ जो तुमसे जंग करते हैं

مُحَقِّقٌ لِمَا حَقَّقْتُمْ
मुहक़्क़िक़ुन लिमा हक़्क़क्तुम
मैं उसे हक़ मानता हूँ जिसे तुमने हक़ ठहराया

مُبْطِلٌ لِمَا أَبْطَلْتُمْ
मुब्तिलुन लिमा अब्तल्तुम
और उसे बातिल मानता हूँ जिसे तुमने बातिल ठहराया

مُطِيعٌ لَكُمْ
मुत़ीअ़ुन लकुम
मैं तुम्हारा फ़रमाँबरदार हूँ

عَارِفٌ بِحَقِّكُمْ
आरिफ़ुन बिहक़्क़िकुम
मैं तुम्हारे हक़ को पहचानने वाला हूँ

مُقِرٌّ بِفَضْلِكُمْ
मुक़िर्रुन बि-फ़ज़्लिकुम
मैं तुम्हारी फ़ज़ीलत को मानने वाला हूँ

مُحْتَمِلٌ لِعِلْمِكُمْ
मुहतमिलुन लि-इल्मिकुम
मैं तुम्हारे इल्म को सँभालने वाला हूँ

مُحْتَجِبٌ بِذِمَّتِكُمْ
मुहतजिबुन बिज़िम्मतिकुम
मैं तुम्हारी ज़िम्मेदारी की पनाह में हूँ

مُعْتَرِفٌ بِكُمْ
मुअ़तरिफ़ुन बिकुम
मैं तुम्हें दिल से मानने वाला हूँ

مُؤْمِنٌ بِإِيَابِكُمْ
मोमिनुन बि-इयाबिकुम
मैं तुम्हारी वापसी पर ईमान रखता हूँ

مُصَدِّقٌ بِرَجْعَتِكُمْ
मुसद्दिक़ुन बिरज्अ़तिकुम
मैं तुम्हारी रजअत को सच मानता हूँ

مُنْتَظِرٌ لأَمْرِكُمْ
मुन्तज़िरुन लि-अमरिकुम
मैं तुम्हारे हुक्म का इंतज़ार कर रहा हूँ

مُرْتَقِبٌ لِدَوْلَتِكُمْ
मुर्तक़िबुन लिदौलतिकुम
मैं तुम्हारी हुकूमत का मुंतज़िर हूँ

آخِذٌ بِقَوْلِكُمْ
आख़िज़ुन बिक़ौलिकुम
मैं तुम्हारी बातों को थामे हुए हूँ

عَامِلٌ بِأَمْرِكُمْ
आमिलुन बि-अमरिकुम
मैं तुम्हारे हुक्म पर अमल करता हूँ

مُسْتَجِيرٌ بِكُمْ
मुस्तजीरुन बिकुम
मैं तुम्हारी पनाह चाहता हूँ

زَائِرٌ لَكُمْ
ज़ाइरुन लकुम
मैं तुम्हारी ज़ियारत करने वाला हूँ

لاَئِذٌ عَائِذٌ بِقُبُورِكُمْ
लाइज़ुन आइज़ुन बिक़ुबूरिकुम
मैं तुम्हारी क़ब्रों में पनाह लेने वाला हूँ

مُسْتَشْفِعٌ إِلَىٰ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ بِكُمْ
मुस्तशफ़ेअ़ुन इलल्लाहि अ़ज़्ज़ा व जल्ला बिकुम
मैं अल्लाह के पास तुम्हारे ज़रिये शफ़ाअत चाहता हूँ

وَمُتَقَرِّبٌ بِكُمْ إِلَيْهِ
व मुतक़र्रिबुन बिकुम इलैहि
और तुम्हारे ज़रिये उससे क़रीब होता हूँ

وَمُقَدِّمُكُمْ أَمَامَ طَلِبَتِي
व मुक़द्दिमुकुम अमामा त़लिबती
मैं अपनी हर ख़्वाहिश में तुम्हें आगे रखता हूँ

وَحَوَائِجِي وَإِرَادَتِي
व हवाइजी व इरादती
अपनी तमाम ज़रूरतों और इरादों में

فِي كُلِّ أَحْوَالِي وَأُمُورِي
फ़ी कुल्लि अहवाली व उमूरी
मेरी हर हालत और हर मामले में

مُؤْمِنٌ بِسِرِّكُمْ وَعَلاَنِيَتِكُمْ
मोमिनुन बि-सिर्रिकुम व अ़लानियतिकुम
मैं तुम्हारे छुपे और ज़ाहिर हर हाल पर ईमान रखता हूँ

وَشَاهِدِكُمْ وَغَائِبِكُمْ
व शाहिदिकुम व ग़ाइबिकुम
तुम्हारी मौजूदगी और ग़ैरमौजूदगी पर

وَأَوَّلِكُمْ وَآخِرِكُمْ
व अव्वलिकुम व आख़िरिकुम
और तुम्हारे पहले और आख़िरी पर

وَمُفَوِّضٌ فِي ذٰلِكَ كُلِّهِ إِلَيْكُمْ
व मुफ़व्विज़ुन फ़ी ज़ालिका कुल्लिही इलैकुम
मैं यह सब कुछ तुम्हारे हवाले करता हूँ

وَمُسَلِّمٌ فِيهِ مَعَكُمْ
व मुसल्लिमुन फ़ीहि मअ़कुम
और उसमें तुम्हारे साथ पूरी तरह राज़ी हूँ

وَقَلْبِي لَكُمْ مُسَلِّمٌ
व क़ल्बी लकुम मुसल्लिमुन
और मेरा दिल तुम्हारे लिए पूरी तरह झुका हुआ है

وَرَأْيِي لَكُمْ تَبَعٌ
व रायी लकुम तबअ़ुन
और मेरी राय तुम्हारी पैरवी करती है

وَنُصْرَتِي لَكُمْ مُعَدَّةٌ
व नुसरती लकुम मुअ़द्दतुन
और मेरी मदद तुम्हारे लिए तैयार है

حَتَّىٰ يُحْيِيَ ٱللَّهُ تَعَالَىٰ دِينَهُ بِكُمْ
हत्त़ा युहयियल्लाहु तआला दीनहू बिकुम
यहाँ तक कि अल्लाह तुम्हारे ज़रिये अपने दीन को ज़िंदा करे

وَيَرُدَّكُمْ فِي أَيَّامِهِ
व यरुद्दकुम फ़ी अय्यामिही
और तुम्हें उसके दिनों में वापस लाए

وَيُظْهِرَكُمْ لِعَدْلِهِ
व युज़हिरकुम लि-अ़द्लिही
और तुम्हें उसके इंसाफ़ के लिए ज़ाहिर करे

وَيُمَكِّنَكُمْ فِي أَرْضِهِ
व युमक्किनकुम फ़ी अरज़़िही
और तुम्हें उसकी ज़मीन में क़ुदरत दे

فَمَعَكُمْ مَعَكُمْ
फ़मअ़कुम मअ़कुम
तो मैं तुम्हारे साथ हूँ, हमेशा तुम्हारे साथ

لَا مَعَ غَيْرِكُمْ
ला मअ़ ग़ैरिकुम
मैं तुम्हारे सिवा किसी और के साथ नहीं हूँ

آمَنْتُ بِكُمْ
आमन्तु बिकुम
मैं तुम पर पूरा ईमान रखता हूँ

وَتَوَلَّيْتُ آخِرَكُمْ بِمَا تَوَلَّيْتُ بِهِ أَوَّلَكُمْ
व तव्वल्लैतु आख़िरकुम बिमा तव्वल्लैतु बिही अव्वलकुम
और मैं तुम्हारे आख़िरी से भी वही वफ़ादारी रखता हूँ जो पहले से रखी

وَبَرِئْتُ إِلَىٰ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ
व बरिअतु इलल्लाहि अ़ज़्ज़ व जल्ल
और मैं अल्लाह के सामने बरी होता हूँ

مِنْ أَعْدَائِكُمْ
मिन अ़अ़दाइकुम
तुम्हारे दुश्मनों से

وَمِنَ ٱلْجِبْتِ وَٱلطَّاغُوتِ
व मिनल जिब्ति वत्ताग़ूत
और हर झूठे माबूद और सरकश ताक़त से

وَٱلشَّيَاطِينِ وَحِزْبِهِمُ ٱلظَّالِمِينَ لَكُمْ
वश्शयातीनि व हिज़्बिहिमुज़्ज़ालिमीना लकुम
और शैतानों और उनके ज़ालिम गिरोह से जिन्होंने तुम पर ज़ुल्म किया

ٱلْجَاحِدِينَ لِحَقِّكُمْ
अल-जाहिदीना लिहक़्क़िकुम
जो तुम्हारे हक़ का इनकार करने वाले हैं

وَٱلْمَارِقِينَ مِنْ وِلاَيَتِكُمْ
वल-मारिक़ीना मिन विलायतकुम
और जो तुम्हारी विलायत से बाहर निकल गए

وَٱلْغَاصِبِينَ لإِرْثِكُمْ
वल-ग़ासिबीना लि-इरसिकुम
और जो तुम्हारी विरासत छीनने वाले हैं

ٱلشَّاكِّينَ فِيكُمْ
अश्शाक्कीना फीकुम
और जो तुम्हारे बारे में शक करते हैं

ٱلْمُنْحَرِفِينَ عَنْكُمْ
अल-मुनहरिफ़ीना अ़नकुम
और जो तुमसे भटक गए हैं

وَمِنْ كُلِّ وَلِيجَةٍ دُونَكُمْ
व मिन कुल्लि वलीजातिन दूनकुम
और तुमसे हटकर हर छुपे सहारे से

وَكُلِّ مُطَاعٍ سِوَاكُمْ
व कुल्लि मुताअ़िन सिवाकुम
और हर उस की इताअत से जो तुम्हारे सिवा हो

وَمِنَ ٱلْأَئِمَّةِ ٱلَّذِينَ يَدْعُونَ إِلَىٰ ٱلنَّارِ
व मिनल अइम्मतिल्लज़ीना यद्अ़ूना इलन्नार
और उन सरदारों से जो आग की तरफ़ बुलाते हैं

فَثَبَّتَنِيَ ٱللَّهُ أَبَداً مَا حَيِيتُ
फ़-सब्बतनीयल्लाहु अबदन मा ह़यीतु
तो अल्लाह मुझे ज़िंदगी भर मज़बूत रखे

عَلَىٰ مُوَالاَتِكُمْ
अ़ला मुवालातिकुम
तुम्हारी विलायत पर

وَمَحَبَّتِكُمْ وَدِينِكُمْ
व महब्बतिकुम व दीनिकुम
और तुम्हारी मुहब्बत और तुम्हारे दीन पर

وَوَفَّقَنِي لِطَاعَتِكُمْ
व वफ़्फ़क़नी लि-ताअ़तिकुम
और मुझे तुम्हारी इताअत की तौफ़ीक़ दे

وَرَزَقَنِي شَفَاعَتَكُمْ
व रज़क़नी शफ़ाअ़तिकुम
और मुझे तुम्हारी शफ़ाअत नसीब करे

وَجَعَلَنِي مِنْ خِيَارِ مَوَالِيكُمْ
व जअ़लनी मिन खियारि मवालिकुम
और मुझे तुम्हारे बेहतरीन वलीयों में शामिल करे

ٱلتَّابِعِينَ لِمَا دَعَوْتُمْ إِلَيْهِ
अत्ताबिईना लिमा दअ़व्तुम इलैहि
जो हर उस चीज़ पर अमल करते हैं जिसकी तुमने दावत दी

وَجَعَلَنِي مِمَّنْ يَقْتَصُّ آثَارَكُمْ
व जअ़लनी मिम्मन यक़्तस्सु आसारकुम
और मुझे तुम्हारे नक़्शे-क़दम पर चलने वालों में बनाए

وَيَسْلُكُ سَبِيلَكُمْ
व यस्लुकु सबीलकुम
और तुम्हारे रास्ते पर चलता रहे

وَيَهْتَدِي بِهُدَاكُمْ
व यहतदी बिहुदाकुम
और तुम्हारी हिदायत से राह पाए

وَيُحْشَرُ فِي زُمْرَتِكُمْ
व युहशरु फ़ी ज़ुमरतकुम
और क़यामत में तुम्हारे गिरोह में उठाया जाए

وَيَكِرُّ فِي رَجْعَتِكُمْ
व यकिर्रु फ़ी रज्अ़तिकुम
और तुम्हारी रजअत में लौटकर आए

وَيُمَلَّكُ فِي دَوْلَتِكُمْ
व युमल्लकु फ़ी दौलतिकुम
और तुम्हारी हुकूमत में इख़्तियार पाए

وَيُشَرَّفُ فِي عَافِيَتِكُمْ
व युशर्रफ़ु फ़ी आफ़ियतकुम
और तुम्हारी सलामती में इज़्ज़त पाए

وَيُمَكَّنُ فِي أَيَّامِكُمْ
व युमक्कनु फ़ी अय्यामिकुम
और तुम्हारे ज़माने में ताक़त पाए

وَتَقِرُّ عَيْنُهُ غَداً بِرُؤْيَتِكُمْ
व तक़िर्रु अ़यनुहू ग़दन बिरुयतिकुम
और कल तुम्हें देखकर उसकी आँखें ठंडी हों

بِأَبِي أَنْتُمْ وَأُمِّي
बि-अबी अन्तुम व उम्मी
मेरे माँ-बाप तुम पर क़ुर्बान हों

وَنَفْسِي وَأَهْلِي وَمَالِي
व नफ़्सी व अहली व माली
और मेरी जान, मेरा घरवाला और मेरा माल भी

مَنْ أَرَادَ ٱللَّهَ بَدَأَ بِكُمْ
मन अराद अल्लाह बदअ बि-कुम
जो अल्लाह को चाहता है वह तुमसे शुरुआत करता है

وَمَنْ وَحَّدَهُ قَبِلَ عَنْكُمْ
व मन वह्हदहू क़बिल अ़न-कुम
और जो उसकी वहदानियत माने वह तुम्हें स्वीकार करता है

وَمَنْ قَصَدَهُ تَوَجَّهَ بِكُمْ
व मन क़सदहू तवज्जह बि-कुम
और जो उसकी तरफ़ जाता है वह तुम्हें वसीला बनाता है

مَوَالِيَّ لَا أُحْصِي ثَنَائَكُمْ
मवालिय्या ला उह्सी सना-अकुम
ऐ मेरे मौला, मैं तुम्हारी खूबियाँ गिन नहीं सकता

وَلاَ أَبْلُغُ مِنَ ٱلْمَدْحِ كُنْهَكُمْ
व ला अब्लुग़ मिनल-मद्ह कुनहकुम
और न ही तुम्हारी पूरी तारीफ़ कर सकता हूँ

وَمِنَ ٱلْوَصْفِ قَدْرَكُمْ
व मिनल-वस्फ़ क़द्रकुम
और न तुम्हारे दर्जे का सही बयान कर सकता हूँ

وَأَنْتُمْ نُورُ ٱلْأَخْيَارِ
व अन्तुम नूरुल-अख़यार
और तुम नेक लोगों का नूर हो

وَهُدَاةُ ٱلْأَبْرَارِ
व हुदातुल-अबरार
और परहेज़गारों के रहनुमा हो

وَحُجَجُ ٱلْجَبَّارِ
व हुजजुल-जब्बार
और अल्लाह की ज़बरदस्त हुज्जत हो

بِكُمْ فَتَحَ ٱللَّهُ
बि-कुम फ़तह अल्लाह
अल्लाह ने तुम्हारे ज़रिये शुरुआत की

وَبِكُمْ يَخْتِمُ
व बि-कुम यख़्तिमु
और तुम्हारे ज़रिये ही ख़त्म करेगा

وَبِكُمْ يُنَزِّلُ ٱلْغَيْثَ
व बि-कुम युनज़्ज़िलुल-ग़ैस
और तुम्हारे सबब बारिश उतारता है

وَبِكُمْ يُمْسِكُ ٱلسَّمَاءَ أَنْ تَقَعَ عَلَىٰ ٱلْأَرْضِ إِلاَّ بِإِذْنِهِ
व बि-कुम युम्सिकुस्समा अन तक़अ़ अ़लल-अर्ज़ इल्ला बि-इज़्निही
और तुम्हारे ज़रिये आसमान को ज़मीन पर गिरने से रोके रखता है सिवा उसकी इजाज़त से

وَبِكُمْ يُنَفِّسُ ٱلْهَمَّ
व बि-कुम युनफ़्फ़िसुल-हम्म
और तुम्हारे ज़रिये ग़म दूर करता है

وَيَكْشِفُ ٱلضُّرَّ
व यकशिफ़ुद्दुर्र
और तकलीफ़ें हटाता है

وَعِنْدَكُمْ مَا نَزَلَتْ بِهِ رُسُلُهُ
व अ़िन्दकुम मा नज़लत बिही रुसुलुहू
और तुम्हारे पास वह सब है जो रसूल लाए

وَهَبَطَتْ بِهِ مَلاَئِكَتُهُ
व हबतत बिही मलाइकतुहू
और जिसके साथ फ़रिश्ते उतरे

وَإِلَىٰ جَدِّكُمْ بُعِثَ ٱلرُّوحُ الأَمِينُ
व इला जद्दिकुम बुइसा रूहुल-अमीन
और तुम्हारे जद्द की तरफ़ रूहुल-अमीन भेजा गया

آتَاكُمُ ٱللَّهُ مَا لَمْ يُؤْتِ أَحَداً مِنَ ٱلْعَالَمِينَ
आताकुमुल्लाह मा लम युति अहदन मिनल-आलमीन
अल्लाह ने तुम्हें वह दिया जो किसी को नहीं दिया

طَأْطَأَ كُلُّ شَرِيفٍ لِشَرَفِكُمْ
तअ़तअ़ कुल्लु शरीफ़िन लि-शरफ़िकुम
हर शरीफ़ तुम्हारे शरफ़ के आगे झुक गया

وَبَخَعَ كُلُّ مُتَكَبِّرٍ لِطَاعَتِكُمْ
व बख़अ़ कुल्लु मुतकब्बिरिन लि-ताअ़तिकुम
हर घमंडी तुम्हारी इताअत में झुक गया

وَخَضَعَ كُلُّ جَبَّارٍ لِفَضْلِكُمْ
व ख़ज़अ़ कुल्लु जब्बारिन लि-फ़ज़्लिकुम
हर ज़ालिम तुम्हारी फ़ज़ीलत के आगे दब गया

وَذَلَّ كُلُّ شَيْءٍ لَكُمْ
व ज़ल्ला कुल्लु शैइन लकुम
हर चीज़ तुम्हारे आगे आज़िज़ हो गई

وَأَشْرَقَتِ ٱلْأَرْضُ بِنُورِكُمْ
व अश्रक़तिल-अर्ज़ बि-नूरिकुम
और ज़मीन तुम्हारे नूर से रौशन हो गई

وَفَازَ ٱلْفَائِزُونَ بِوِلاَيَتِكُمْ
व फ़ाज़ल-फ़ाइज़ूना बि-विलायतिकुम
और कामयाब वही हुए जो तुम्हारी विलायत में आए

بِكُمْ يُسْلَكُ إِلَىٰ ٱلرِّضْوَانِ
बि-कुम युस्लकु इलर्रिज़वान
और तुम्हारे ज़रिये जन्नत का रास्ता मिलता है

وَعَلَىٰ مَنْ جَحَدَ وِلاَيَتِكُمْ غَضَبُ ٱلرَّحْمٰنِ
व अ़ला मन जहद विलायतकुम ग़ज़बुर्रहमान
और जो तुम्हारी विलायत का इनकार करे उस पर रहमान का ग़ज़ब है

بِأَبِي أَنْتُمْ وَأُمِّي
बि-अबी अन्तुम व उम्मी
मेरे माँ-बाप तुम पर क़ुर्बान हों

وَنَفْسِي وَأَهْلِي وَمَالِي
व नफ़्सी व अहली व माली
और मेरी जान, मेरे घरवाले और मेरा माल भी

ذِكْرُكُمْ فِي ٱلذَّاكِرِينَ
ज़िक्रुकुम फ़िज़्ज़ाकिरीन
तुम्हारा ज़िक्र ज़िक्र करने वालों में है

وَأَسْمَاؤُكُمْ فِي ٱلْأَسْمَاءِ
व अस्माउकुम फ़िल-अस्मा
और तुम्हारे नाम नामों में हैं

وَأَجْسَادُكُمْ فِي ٱلْأَجْسَادِ
व अजसादुकुम फ़िल-अजसाद
और तुम्हारे जिस्म जिस्मों में हैं

وَأَرْوَاحُكُمْ فِي ٱلْأَرْوَاحِ
व अरवाहुकुम फ़िल-अरवाह
और तुम्हारी रूहें रूहों में हैं

وَأَنْفُسُكُمْ فِي ٱلنُّفُوسِ
व अन्फ़ुसुकुम फ़िन्नुफ़ूस
और तुम्हारी हस्तियाँ हस्तियों में हैं

وَآثَارُكُمْ فِي ٱلآثَارِ
व आसारुकुम फ़िल-आसार
और तुम्हारे असर असरात में हैं

وَقُبُورُكُمْ فِي ٱلْقُبُورِ
व क़ुबूरुकुम फ़िल-क़ुबूर
और तुम्हारी क़ब्रें क़ब्रों में हैं

فَمَا أَحْلىٰ أَسْمَاءَكُمْ
फ़मा अह्ला अस्मा-अकुम
तो कितने प्यारे हैं तुम्हारे नाम

وَأَكْرَمَ أَنْفُسَكُمْ
व अकरमा अन्फ़ुसकुम
और कितनी पाक हैं तुम्हारी रूहें

وَأَعْظَمَ شَأْنَكُمْ
व अअ़ज़मा शानकुम
और कितना बुलंद है तुम्हारा दर्जा

وَأَجَلَّ خَطَرَكُمْ
व अजल्ला ख़तरकुम
और कितनी अज़ीम है तुम्हारी शान

وَأَوْفَىٰ عَهْدَكُمْ
व औफ़ा अह्दकुम
और कितना मज़बूत है तुम्हारा अहद

وَأَصْدَقَ وَعْدَكُمْ
व अस्दक़ा वअ़दकुम
और कितना सच्चा है तुम्हारा वादा

كَلاَمُكُمْ نُورٌ
कलामुकुम नूरुन
तुम्हारा कलाम नूर है

وَأَمْرُكُمْ رُشْدٌ
व अम्रुकुम रुश्दुन
और तुम्हारा हुक्म हिदायत है

وَوَصِيَّتُكُمُ التَّقْوَىٰ
व वसिय्यतुकुमुत-तक़वा
और तुम्हारी वसीयत तक़वा है

وَفِعْلُكُمُ ٱلْخَيْرُ
व फ़िअ़लुकुमुल-ख़ैर
और तुम्हारे अमल भलाई हैं

وَعَادَتُكُمُ ٱلإِحْسَانُ
व आदतुकुमुल-इहसान
और तुम्हारी आदत एहसान है

وَسَجِيَّتُكُمُ ٱلْكَرَمُ
व सजीय्यतुकुमुल-करम
और तुम्हारा मिज़ाज करम है

وَشَأْنُكُمُ ٱلْحَقُّ
व शानुकुमुल-हक़्क़
और तुम्हारा मामला हक़ है

وَٱلصِّدْقُ وَٱلرِّفْقُ
वस्सिद्क़ु वर्रिफ़्क़
सच और नरमी

وَقَوْلُكُمْ حُكْمٌ وَحَتْمٌ
व क़ौलुकुम हुक्मुन व हत्मुन
और तुम्हारा क़ौल फ़ैसला है

وَرَأْيُكُمْ عِلْمٌ وَحِلْمٌ وَحَزْمٌ
व रायुकुम इल्मुन व हिल्मुन व हज़्मुन
और तुम्हारी राय इल्म, सब्र और दूर-अंदेशी है

إِنْ ذُكِرَ ٱلْخَيْرُ كُنْتُمْ أَوَّلَهُ
इन ज़ुकिरल-ख़ैरु कुन्तुम अव्वलहू
जब भलाई का ज़िक्र होता है तो तुम उसकी शुरुआत हो

وَأَصْلَهُ وَفَرْعَهُ
व अस्लहू व फ़रअ़हू
और उसकी जड़ और उसकी शाख

وَمَعْدِنَهُ وَمَأْوَاهُ وَمُنْتَهَاهُ
व मअ़दिनहू व मअ़वाहू व मुन्तहाहू
और उसका ख़ज़ाना, ठिकाना और आख़िरी मक़ाम

بِأَبِي أَنْتُمْ وَأُمِّي وَنَفْسِي
बि-अबी अन्तुम व उम्मी व नफ़्सी
मेरे माँ-बाप और मेरी जान तुम पर क़ुर्बान हो

كَيْفَ أَصِفُ حُسْنَ ثَنَائِكُمْ
कैफ़ा असिफ़ु हुस्ना सना-अकुम
मैं तुम्हारी तारीफ़ की खूबसूरती कैसे बयान करूँ

وَأُحْصِي جَمِيلَ بَلاَئِكُمْ
व उह्सी जमीला बलाअ़िकुम
और तुम्हारे एहसानों को कैसे गिनूँ

وَبِكُمْ أَخْرَجَنَا ٱللَّهُ مِنَ ٱلذُّلِّ
व बि-कुम अख़राजना अल्लाह मिनज़्ज़ुल्ल
और तुम्हारे ज़रिये अल्लाह ने हमें ज़िल्लत से निकाला

وَفَرَّجَ عَنَّا غَمَرَاتِ ٱلْكُرُوبِ
व फ़र्रजा अ़न्ना ग़मरातिल-कुरूब
और हम से मुश्किलों की गिरहें खोलीं

وَأَنْقَذَنَا مِنْ شَفَا جُرُفِ ٱلْهَلَكَاتِ
व अन्क़ज़ना मिन शफ़ा जुरुफ़िल-हलाकात
और हमें हलाकत के किनारे से बचाया

وَمِنَ ٱلنَّارِ
व मिनन्नार
और आग से निजात दी

بِأَبِي أَنْتُمْ وَأُمِّي وَنَفْسِي
बि-अबी अन्तुम व उम्मी व नफ़्सी
मेरे माँ-बाप और मेरी जान तुम पर क़ुर्बान हो

بِمُوَالاَتِكُمْ عَلَّمَنَا ٱللَّهُ مَعَالِمَ دِينِنَا
बि-मुवालातिकुम अ़ल्लमना अल्लाह मअ़ालिमा दीनिना
तुम्हारी विलायत के ज़रिये अल्लाह ने हमें हमारे दीन की राहें सिखाईं

وَأَصْلَحَ مَاكَانَ فَسَدَ مِنْ دُنْيَانَا
व अस्लहा मा काना फ़सदा मिन दुनयाना
और हमारी दुनिया की बिगड़ी हुई हालत सुधार दी

وَبِمُوَالاَتِكُمْ تَمَّتِ ٱلْكَلِمَةُ
व बि-मुवालातिकुम तम्मतिल-कलीमा
और तुम्हारी विलायत से कलिमा पूरा हुआ

وَعَظُمَتِ ٱلنِّعْمَةُ
wa `azumat alnni`matu
the grace has become great,

وَائْتَلَفَتِ ٱلْفُرْقَةُ
wa'talafat alfurqatu
and the discord has turned into alliance.

وَبِمُوَالاَتِكُمْ تُقْبَلُ ٱلطَّاعَةُ ٱلْمُفْتَرَضَةُ
wa bimuwalatikum tuqbalu altta`atu almuftaradatu
Through our loyalty to your leadership, the obligatory obedience (to Allah) is accepted.

وَلَكُمُ ٱلْمَوَدَّةُ ٱلْوَاجِبَةُ
wa lakum almawaddatu alwajibatu
To you alone are the obligatory affection,

وَٱلدَّرَجَاتُ ٱلرَّفِيعَةُ
walddarajatu alrrafi`atu
the elevated ranks,

وَٱلْمَقَامُ ٱلْمَحْمُودُ
walmaqamu almahmudu
the praiseworthy standing,

وَٱلْمَكَانُ ٱلْمَعْلُومُ عِنْدَ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ
walmakanu alma`lumu `inda allahi `azza wa jalla
the renowned station with Allah the Almighty and All-majestic,

وَٱلْجَاهُ ٱلْعَظِيمُ
waljahu al`azimu
the topmost prestige,

وَٱلشَّأْنُ ٱلْكَبِيرُ
walshsha'nu alkabiru
the supreme station,

وَٱلشَّفَاعَةُ ٱلْمَقْبُولَةُ
walshshafa`atu almaqbulatu
and the admitted intercession.

رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنْزَلْتَ
rabbana amanna bima anzalta
O our Lord, we believe in that which You have sent down

وَٱتَّبَعْنَا ٱلرَّسُولَ
wattaba`na alrrasula
and we follow the Messenger;

فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّاهِدِينَ
faktubna ma`a alshshahidina
so, write our names among those who bear witness.

رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا
rabbana la tuzigh qulubana ba`da idh hadaytana
Our Lord, cause not our hearts to stray after You have guided us,

وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً
wa hab lana min ladunka rahmatan
and bestow upon us mercy from Your Presence.

إِنَّكَ أَنْتَ ٱلْوَهَّابُ
innaka anta alwahhabu
Lo! You, only You, are the Bestower.

سُبْحَانَ رَبِّنَا
subhana rabbina
Glory be to our Lord

إِنْ كَانَ وَعْدُ رَبِّنَا لَمَفْعُولاًَ
in kana wa`du rabbina lamaf`ulan
for in fact the promise of our Lord immediately takes effect.

يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ
ya waliyya allahi
O vicegerent of Allah!( )

إِنَّ بَيْنِي وَبيْنَ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ذُنُوباً
inna bayni wa bayna allahi `azza wa jalla dhunuban
There stand between me and Allah the Almighty and All-majestic, sins

لَا يَأْتِي عَلَيْهَا إِلَّا رِضَاكُمْ
la ya'ti `alayha illa ridakum
that cannot be demolished except by attaining your satisfaction.

فَبِحَقِّ مَنِ ٱئْتَمَنَكُمْ عَلَىٰ سِرِّهِ
fabihaqqi man i'tamanakum `ala sirrihi
Therefore, [I beseech you] in the name of the One Who has entrusted you with His secret,

وَٱسْتَرْعَاكُمْ أَمْرَ خَلْقِهِ
wastar`akum amra khalqihi
assigned you to supervise the affairs of His creatures,

وَقَرَنَ طَاعَتَكُمْ بِطَاعَتِهِ
wa qarana ta`atakum bita`atihi
and attached the obedience to Him with the obedience to you,

لَمَّا ٱسْتَوْهَبْتُمْ ذُنُوبِي
lamma istawhabtum dhunubi
to (please) endue me with the favor of absolving my sins

وَكُنْتُمْ شُفَعَائِي
wa kuntum shufa`a'i
and to be my intercessors,

فَإِنِّي لَكُمْ مُطِيعٌ
fa'inni lakum muti`un
for I am obedient to you.

مَنْ أَطَاعَكُمْ فَقَدْ أَطَاعَ ٱللَّهَ
man ata`akum faqd ata`a allaha
He who obeys you has in fact obeyed Allah,

وَمَنْ عَصَاكُمْ فَقَدْ عَصَىٰ ٱللَّهَ
wa man `asakum faqad `asa allaha
he who disobeys you has in fact disobeyed Allah,

وَمَنْ أَحَبَّكُمْ فَقَدْ أَحَبَّ ٱللَّهَ
wa man ahabbakum faqad ahabba allaha
he who loves you has in fact loved Allah,

وَمَنْ أَبْغَضَكُمْ فَقَدْ أَبْغَضَ ٱللَّهَ
wa man abghadakum faqad abghada allaha
and he who hates you has in fact hated Allah.

اَللَّهُمَّ إِنِّي لَوْ وَجَدْتُ شُفَعَاءَ
allahumma inni law wajadtu shufa`a'a
O Allah, had I known interceders

أَقْرَبَ إِلَيْكَ مِنْ مُحَمِّد وَأَهْلِ بَيْتِهِ
aqraba ilayka min muhammadin wa ahli baytihi
that are closer to You than Muhammad and his Household

ٱلْأَخْيَارِ ٱلْأَئِمَّةِ ٱلْأَبْرَارِ
al-akhyari al-a'immati al-abrari
the virtuous and pious Imams,

لَجَعَلْتُهُمْ شُفَعَائِي
laja`altuhum shufa`a'i
I would have chosen them as my intercessors.

فَبِحَقِّهِمُ ٱلَّذِي أَوْجَبْتَ لَهُمْ عَلَيْكَ
fabihaqqihim alladhi awjabta lahum `alayka
So, [I beseech You] in the name of their Right that You have made obligatory upon You,

أَسْأَلُكَ أَنْ تُدْخِلَنِي فِي جُمْلَةِ ٱلْعَارِفِينَ بِهِمْ وَبِحَقِّهِمْ
as'aluka an tudkhilani fi jumlati al`arifina bihim wa bihaqqihim
(please) include me with the group of those who recognize their Right and them

وَفِي زُمْرَةِ ٱلْمَرْحُومِينَ بِشَفَاعَتِهِمْ
wa fi zumrati almarhumina bishafa`atihim
and with the assembly of those who are shown mercy owing to their (i.e. Muhammad and his Household) intercession.

إِنَّكَ أَرْحَمُ ٱلرَّاحِمِينَ
innaka arhamu alrrahimina
Verily, You are the most merciful of all those who show mercy.

وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ ٱلطَّاهِرينَ
wa salla allahu `ala muhammadin wa alihi alttahirina
May Allah send blessings upon Muhammad and his immaculate Household

وَسَلَّمَ تَسْلِيماً كَثِيراً
wa sallama tasliman kathiran
and send His thorough peace upon them.

وَحَسْبُنَا ٱللَّهُ وَنِعْمَ ٱلْوَكِيلُ
wa hasbuna allahu wa ni`ma alwakilu
Allah is Sufficient for us! Most Excellent is He in Whom we trust.
After completion of ziarat, say two rakat prayers and present it as your gift to Imam(ajtfs) and seek intercession of Imam to supplicate to God to grant your wishes. & recite this dua
Dua Aliya Mazameen
. Refrences
1.Shaykh Abbas al-Qommi, Mafatih al-Jinan, p. 657.
2. Shaykh al-Sadouq, Ayun Akhbar al-Rida, vol. 1, p. 305.
3. Shaykh al-Kulayni, al-Kafi, vol. 8, p. 146