ज़्यारत ईमाम अली (अ०स०) – 17वीं रबीउल अव्वल
हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की विलादत के दिन पढ़ी जाती है
अहमियत

रसूलुल्लाह ﷺ से मुताल्लिक़ मौक़ों जैसे उनकी विलादत और बिअसत के दिन इमाम अली (अ०स०) के रौज़ा-ए-मुबारक़ की ज़ियारत की बहुत ज़्यादा तकीद की गई है। इसकी वजह इन दोनों अज़ीम शख़्सियतों के दरमियान मज़बूत ताल्लुक़ और मुकम्मल वहदत है।
अश-शहीद, शैख़ मुफ़ीद और सैयद इब्ने ताऊस—इन तमाम बुज़ुर्गों ने नक़्ल किया है कि इमाम जाफ़र सादिक़ (अ०स०) ने सत्रह रबीउल अव्वल, जो रसूलुल्लाह ﷺ की विलादत का दिन है, इमाम अली अमीरुल मोमिनीन (अ०स०) के रौज़ा-ए-मुबारक़ की ज़ियारत इस ज़ियारत के साथ की:
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ०स०) ने आला दर्जे के भरोसेमंद आलिम मुहम्मद इब्ने मुस्लिम सक़फ़ी को तालीम देते हुए फ़रमाया:
जब तुम अमीरुल मोमिनीन (अ०स०) के हरम के क़रीब पहुँचो तो ज़ियारत से पहले ग़ुस्ल करो, सबसे पाक साफ़ कपड़े पहनो, ख़ुशबू लगाओ और इत्मीनान व सुकून के साथ हरम की तरफ़ बढ़ो।
जब तुम बाबुस्सलाम (दरवाज़ा-ए-सलाम) पर ठहरो, जो हरम का दरवाज़ा है, तो क़िब्ला रुख़ होकर तीन मर्तबा कहो:
اَللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाहु अकबर
अल्लाह सबसे बड़ा है।


फिर यह कहो:
اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ رَسُولِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला रसूलिल्लाह
अल्लाह के रसूल पर सलाम हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ خِيَرَةِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला ख़ियारतिल्लाह
अल्लाह के चुने हुए पर सलाम हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْبَشِيرِ ٱلنَّذِيرِ
अस्सलामु अला अल-बशीरिन नज़ीर
ख़ुशख़बरी देने वाले और डराने वाले पर सलाम हो,

ٱلسِّرَاجِ ٱلْمُنِيرِ
अस्सिराजिल मुनीर
और रौशन चिराग़ पर।

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें उन पर हों।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلطُّهْرِ ٱلطَّاهِرِ
अस्सलामु अला अत-तुहरित ताहिर
पाक और पाकीज़ा पर सलाम हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْعَلَمِ ٱلزَّاهِرِ
अस्सलामु अला अल-अलमिज़ ज़ाहिर
नुमायाँ और रौशन निशानी पर सलाम हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْمَنْصُورِ ٱلْمُؤَيَّدِ
अस्सलामु अला अल-मंसूरिल मुअय्यद
अल्लाह की मदद और नुसरत पाए हुए पर सलाम हो।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ أَبِي ٱلْقَاسِمِ مُحَمَّدٍ
अस्सलामु अला अबिल क़ासिम मुहम्मद
अबुल क़ासिम मुहम्मद पर सलाम हो।

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ أَنْبِيَاءِ ٱللَّهِ ٱلْمُرْسَلِينَ
अस्सलामु अला अंबियाइल्लाहिल मुरसलीन
अल्लाह के भेजे हुए तमाम नबियों पर सलाम हो

وَعِبَادِ ٱللَّهِ ٱلصَّالِحِينَ
व इबादिल्लाहिस सालेहीन
और अल्लाह के नेक बंदों पर।

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ مَلاَئِكَةِ ٱللَّهِ
अस्सलामु अला मलाइकतिल्लाह
अल्लाह के फ़रिश्तों पर सलाम हो

ٱلْحَافِّينَ بِهٰذَا ٱلْحَرَمِ
अल-हाफ़्फ़ीना बिहाज़ल हरम
जो इस हरम का एहतात किए हुए हैं

وَبِهٰذَا ٱلضَّرِيحِ ٱللاَّئِذِينَ بِهِ
व बिहाज़द-दरीहिल्लाज़ीना बिही
और इस मज़ार से पनाह लेने वालों पर।

फिर मज़ार के क़रीब जाकर यह कहो:
اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَصِيِّ ٱلأَوْصِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या वसिय्यिल अवसिया
तुम पर सलाम हो, ऐ औलिया के जानशीन

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عِمَادَ ٱلأَتْقِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या इमादल अतक़िया
तुम पर सलाम हो, ऐ परहेज़गारों के सहारा

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَلِيَّ ٱلأَوْلِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या वलिय्यल अवलिया
तुम पर सलाम हो, ऐ औलिया के वली

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ ٱلشُّهَدَاءِ
अस्सलामु अलैक या सैय्यिदश्शुहदा
तुम पर सलाम हो, ऐ शहीदों के सरदार

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا آيَةَ ٱللَّهِ ٱلْعُظْمَىٰ
अस्सलामु अलैक या आयतल्लाहिल उज़्मा
तुम पर सलाम हो, ऐ अल्लाह की सबसे बड़ी निशानी

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا خَامِسَ أَهْلِ ٱلْعَبَاءِ
अस्सलामु अलैक या खामिसा अहलिल अबा
तुम पर सलाम हो, ऐ अहले क़िसा के पाँचवें

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا قَائِدَ ٱلْغُرِّ ٱلْمُحَجَّلِينَ ٱلأَتْقِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या क़ाइदल गुर्रिल मुहज्जलीनल अतक़िया
तुम पर सलाम हो, ऐ पाक चेहरों वाले परहेज़गारों के रहनुमा

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عِصْمَةَ ٱلأَوْلِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या इस्मतल अवलिया
तुम पर सलाम हो, ऐ औलिया की हिफ़ाज़त

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا زَيْنَ ٱلْمُوَحِّدِينَ ٱلنُّجَبَاءِ
अस्सलामु अलैक या ज़ैनल मुवह्हिदीनन्नुजबा
तुम पर सलाम हो, ऐ बुज़ुर्ग तौहीद वालों की ज़ीनत

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا خَالِصَ ٱلأَخِلاَّءِ
अस्सलामु अलैक या खालिसल अख़िल्ला
तुम पर सलाम हो, ऐ सच्चे दोस्तों में चुने हुए

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَالِدَ ٱلأَئِمَّةِ ٱلأُمَنَاءِ
अस्सलामु अलैक या वालिदल अइम्मतिल उमना
तुम पर सलाम हो, ऐ अमानतदार इमामों के वालिद

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا صَاحِبَ ٱلْحَوْضِ وَحَامِلَ ٱللِّوَاءِ
अस्सलामु अलैक या साहिबल हौज़ि वा हामिलल लिवा
तुम पर सलाम हो, ऐ हौज़ के मालिक और परचम उठाने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا قَسِيمَ ٱلْجَنَّةِ وَلَظَىٰ
अस्सलामु अलैक या क़सीमल जन्नति वा लज़ा
तुम पर सलाम हो, ऐ जन्नत और जहन्नम का फ़ैसला करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ شُرِّفَتْ بِهِ مَكَّةُ وَمِنَىٰ
अस्सलामु अलैक या मन शर्रिफ़त बिही मक्का वा मिना
तुम पर सलाम हो, जिनसे मक्का और मिना को इज़्ज़त मिली

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا بَحْرَ ٱلْعُلُومِ وَكَنَفَ ٱلْفُقَرَاءِ
अस्सलामु अलैक या बहरल उलूमि वा कनफ़ल फ़ुक़रा
तुम पर सलाम हो, ऐ इल्म का समंदर और गरीबों का सहारा

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ وُلِدَ فِي ٱلْكَعْبَةِ
अस्सलामु अलैक या मन वुलिदा फ़िल काबा
तुम पर सलाम हो, जो काबा में पैदा हुए

وَزُوِّجَ فِي ٱلسَّمَاءِ بِسَيِّدَةِ ٱلنِّسَاءِ
वा ज़ुव्विजा फ़िस्समाई बिसैय्यिदतिन्निसा
और आसमान में औरतों की सरदार से निकाह हुआ

وَكَانَ شُهُودَهَا ٱلْمَلائِكَةُ ٱلأَصْفِيَاءُ
वा काना शुहूदुहल मलाइकतुल असफ़िया
और इस निकाह के गवाह पाक फरिश्ते थे

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مِصْبَاحَ ٱلضِّيَاءِ
अस्सलामु अलैक या मिस्बाहज़्ज़िया
तुम पर सलाम हो, ऐ रोशनी का चिराग़

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ خَصَّهُ ٱلنَّبِيُّ بِجَزِيلِ ٱلْحِبَاءِ
अस्सलामु अलैक या मन खस्सहुन नबीय्यु बिज़ज़लीलिल हिबा
तुम पर सलाम हो, जिन्हें नबी ने खास इनाम दिए

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ بَاتَ عَلَىٰ فِرَاشِ خَاتَمِ ٱلأَنْبِيَاءِ
अस्सलामु अलैक या मन बाता अला फ़िराशि खातमिल अंबिया
तुम पर सलाम हो, जो नबी के बिस्तर पर सोए

وَوَقَاهُ بِنَفْسِهِ شَرَّ ٱلأَعْدَاءِ
वा वक़ाहु बिनफ़्सिही शर्रल अअदा
और अपनी जान से दुश्मनों से हिफ़ाज़त की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ رُدَّتْ لَهُ ٱلشَّمْسُ
अस्सलामु अलैक या मन रुद्दत लहुश्शम्स
तुम पर सलाम हो, जिनके लिए सूरज लौटाया गया

فَسَامَىٰ شَمْعُونَ ٱلصَّفَا
फ़सामा शमऊनस्सफ़ा
और तुम शमऊन सफ़ा के बराबर ठहरे

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ أَنْجَىٰ ٱللَّهُ سَفِينَةَ نُوحٍ بِٱسْمِهِ وَٱسْمِ أَخِيهِ
अस्सलामु अलैक या मन अंजल्लाहु सफ़ीनतन नूह बिस्मिही वा इस्मि अख़ीही
तुम पर सलाम हो, जिनके नाम से अल्लाह ने नूह की कश्ती बचाई

حَيْثُ ٱلْتَطَمَ ٱلْمَاءُ حَوْلَهَا وَطَمَىٰ
हैसुल इल्ततामल माऊ हौलहा वा तमा
जब चारों ओर पानी की लहरें टकरा रही थीं

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ تَابَ ٱللَّهُ بِهِ وَبِأَخِيهِ عَلَىٰ آدَمَ إِذْ غَوَىٰ
अस्सलामु अलैक या मन ताबल्लाहु बिही वा बि अख़ीही अला आदम इज़ ग़वा
तुम पर सलाम हो, जिनके ज़रिये अल्लाह ने आदम की तौबा क़बूल की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا فُلْكَ ٱلنَّجَاةِ
अस्सलामु अलैक या फ़ुल्कन्नजाह
तुम पर सलाम हो, ऐ निजात की कश्ती

ٱلَّذِي مَنْ رَكِبَهُ نَجَا
अल्लज़ी मन रकिबहु नजा
जो इस पर सवार हुआ, वह बच गया

وَمَنْ تَأَخَّرَ عَنْهُ هَوَىٰ
वा मन तअख़्ख़रा अन्हु हवा
और जो पीछे रह गया, वह हलाक हुआ

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ خَاطَبَ ٱلثُّعْبَانَ وَذِئْبَ ٱلْفَلاَ
अस्सलामु अलैक या मन ख़ातबथ्स्सुबान वा ज़ीबअल फ़ला
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने साँप और रेगिस्तान के भेड़िए से बात की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अलैक या अमीरल मोमिनीन
तुम पर सलाम हो, ऐ मोमिनों के सरदार

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حُجَّةَ ٱللَّهِ عَلَىٰ مَنْ كَفَرَ وَأَنَابَ
अस्सलामु अलैक या हुज्जतल्लाहि अला मन कफरा वा अनाबा
तुम पर सलाम हो, ऐ अल्लाह की दलील, काफ़िरों और तौबा करने वालों पर

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا إِمَامَ ذَوِي ٱلأَلْبَابِ
अस्सलामु अलैक या इमाम ज़विल अलबाब
तुम पर सलाम हो, ऐ अक़्ल वालों के इमाम

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَعْدِنَ الْحِكْمَةِ وَفَصْلَ ٱلْخِطَابِ
अस्सलामु अलैक या मादनल हिकमत व फ़स्लल ख़िताब
तुम पर सलाम हो, ऐ हिकमत का ख़ज़ाना और साफ़ फ़ैसला करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ عِنْدَهُ عِلْمُ ٱلْكِتَابِ
अस्सलामु अलैक या मन इन्दहू इल्मुल किताब
तुम पर सलाम हो, जिनके पास किताब का इल्म है

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مِيزَانَ يَوْمِ ٱلْحِسَابِ
अस्सलामु अलैक या मीज़ान यौमिल हिसाब
तुम पर सलाम हो, ऐ क़यामत के दिन का तराज़ू

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا فَاصِلَ ٱلْحُكْمِ ٱلنَّاطِقَ بِٱلصَّوَابِ
अस्सलामु अलैक या फ़ासिलल हुक्मिन्नातिक़ बिस्सवाब
तुम पर सलाम हो, ऐ सच बोलकर इंसाफ़ करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلْمُتَصَدِّقُ بِٱلْخَاتَمِ فِي ٱلْمِحْرَابِ
अस्सलामु अलैक अय्युहल मुतसद्दिक़ु बिल ख़ातम फ़िल मिहराब
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने नमाज़ में अपनी अंगूठी सदक़ा की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ كَفَىٰ ٱللَّهُ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अलैक या मन कफ़ल्लाहुल मोमिनीन
तुम पर सलाम हो, जिनके ज़रिये अल्लाह ने मोमिनों की मदद की

ٱلْقِتَالَ بِهِ يَوْمَ ٱلأَحْزَابِ
अल क़िताल बिही यौमल अहज़ाब
अहज़ाब की जंग में दुश्मनों से लड़ाई में

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ أَخْلَصَ لِلَّهِ ٱلْوَحْدَانِيَّةَ وَأَنَابَ
अस्सलामु अलैक या मन अख़लस लिल्लाहिल वहदानिय्यत वा अनाब
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने अल्लाह की इबादत सच्चे दिल से की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا قَاتِلَ خَيْبَرَ وَقَالِعَ ٱلْبَابِ
अस्सलामु अलैक या क़ातिल ख़ैबर वा क़ालिअल बाब
तुम पर सलाम हो, ऐ ख़ैबर को फ़तह करने वाले और दरवाज़ा उखाड़ने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ دَعَاهُ خَيْرُ ٱلأَنَامِ لِلْمَبِيتِ عَلَىٰ فِرَاشِهِ
अस्सलामु अलैक या मन दआहू ख़ैरुल अनाम लिल्मबीति अला फ़िराशिही
तुम पर सलाम हो, जिन्हें रसूल ने अपने बिस्तर पर सुलाया

فَأَسْلَمَ نَفْسَهُ لِلْمَنِيَّةِ وَأَجَابَ
फ़अस्लम नफ़्सहू लिल्मनिय्यति वा अजाब
और अपनी जान क़ुर्बान करने को तैयार हो गए

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ لَهُ طُوبَىٰ وَحُسْنُ مَآبٍ
अस्सलामु अलैक या मन लहू तूबा वा हुस्नु मआब
तुम पर सलाम हो, जिनके लिए खुशख़बरी और अच्छा ठिकाना है

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَلِيَّ عِصْمَةِ ٱلدِّينِ وَيَا سَيِّدَ ٱلسَّادَاتِ
अस्सलामु अलैक या वलिय्य इस्मतिद्दीन वा या सैय्यिदस्सादात
तुम पर सलाम हो, ऐ दीन की हिफ़ाज़त करने वाले और सरदारों के सरदार

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا صَاحِبَ ٱلْمُعْجِزَاتِ
अस्सलामु अलैक या साहिबल मुअजिज़ात
तुम पर सलाम हो, ऐ करामात और मोज़िज़ात वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ نَزَلَتْ فِي فَضْلِهِ سُورَةُ ٱلْعَادِيَاتِ
अस्सलामु अलैक या मन नज़लत फ़ी फ़ज़्लिही सूरह आदियात
तुम पर सलाम हो, जिनकी शान में सूरह आदियात उतरी

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ كُتِبَ ٱسْمُهُ فِي ٱلسَّمَاءِ عَلَىٰ ٱلسُّرَادِقَاتِ
अस्सलामु अलैक या मन कुतिबस्मुहू फ़िस्समाई अलस्सुरादिक़ात
तुम पर सलाम हो, जिनका नाम आसमानों में लिखा गया

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مُظْهِرَ ٱلْعَجَائِبِ وَٱلآيَاتِ
अस्सलामु अलैक या मुज़हिरल अजाइब वल आयात
तुम पर सलाम हो, ऐ अजूबे और निशानियाँ ज़ाहिर करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا أَمِيرَ ٱلْغَزَوَاتِ
अस्सलामु अलैक या अमीरल ग़ज़वात
तुम पर सलाम हो, ऐ जंगों के सरदार

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مُخْبِراً بِمَا غَبَرَ وَبِمَا هُوَ آتٍ
अस्सलामु अलैक या मुख़बिरन बिमा ग़बर वा बिमा हुआ आतिन
तुम पर सलाम हो, जो गुज़रे और आने वाले की ख़बर रखते थे

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مُخَاطِبَ ذِئْبِ ٱلْفَلَوَاتِ
अस्सलामु अलैक या मुख़ातिब ज़ीबिल फ़लवात
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने जंगल के भेड़िए से बात की

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا خَاتِمَ ٱلْحَصَىٰ وَمُبَيِّنَ ٱلْمُشْكِلاَتِ
अस्सलामु अलैक या खातिमल हसा वा मुबय्यिनल मुश्किलात
तुम पर सलाम हो, ऐ कंकर गिनने वाले और मुश्किलें हल करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ عَجِبَتْ مِنْ حَمَلاتِهِ فِي ٱلْوَغَىٰ مَلائِكَةُ ٱلسَّمَاوَاتِ
अस्सलामु अलैक या मन अजिबत मिन हमलातिही फ़िल वग़ा मलाइकतुस्समावात
तुम पर सलाम हो, जिनकी जंग की बहादुरी पर आसमान के फ़रिश्ते भी हैरान हुए

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ نَاجَىٰ ٱلرَّسُولَ فَقَدَّمَ بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاهُ ٱلصَّدَقَاتِ
अस्सलामु अलैक या मन नाजा रसूल फ़क़द्दम बैना यदई नजवाहुस्सदक़ात
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने रसूल से चुपके बात से पहले सदक़ा दिया

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَالِدَ ٱلأَئِمَّةِ ٱلْبَرَرَةِ ٱلسَّادَاتِ
अस्सलामु अलैक या वालिदल अइम्मतिल बररतिस्सादात
तुम पर सलाम हो, ऐ नेक इमामों और सरदारों के वालिद

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا تَالِيَ ٱلْمَبْعُوثِ
अस्सलामु अलैक या तालियल मबऊस
तुम पर सलाम हो, जो रसूल के बाद सबसे पहले आए

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ عِلْمِ خَيْرِ مَوْرُوثٍ
अस्सलामु अलैक या वारिस इल्मि ख़ैरि मौरूस
तुम पर सलाम हो, जो सबसे बेहतर विरासत का इल्म रखने वाले हैं

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا سَيِّدَ ٱلْوَصِيِّينَ
अस्सलामु अलैक या सैय्यिदल वसिय्यीन
तुम पर सलाम हो, ऐ तमाम वसियों के सरदार

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا إِمَامَ ٱلْمُتَّقِينَ
अस्सलामु अलैक या इमामल मुत्तक़ीन
तुम पर सलाम हो, ऐ परहेज़गारों के इमाम

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا غِيَاثَ ٱلْمَكْرُوبِينَ
अस्सलामु अलैक या ग़ीयासल मकरूबीन
तुम पर सलाम हो, ऐ दुख में फँसों की मदद करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عِصْمَةَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
अस्सलामु अलैक या इस्मतल मोमिनीन
तुम पर सलाम हो, ऐ मोमिनों की हिफ़ाज़त

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مُظْهِرَ ٱلْبَرَاهِينِ
अस्सलामु अलैक या मुज़हिरल बराहीन
तुम पर सलाम हो, ऐ दलीलें ज़ाहिर करने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا طٰهٰ وَيٰس
अस्सलामु अलैक या ताहा वा यासीन
तुम पर सलाम हो, ऐ ताहा और यासीन

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا حَبْلَ ٱللَّهِ ٱلْمَتِينَ
अस्सलामु अलैक या हबलल्लाहिल मतीन
तुम पर सलाम हो, ऐ अल्लाह की मज़बूत रस्सी

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا مَنْ تَصَدَّقَ فِي صَلاَتِهِ بِخَاتَمِهِ عَلَىٰ ٱلْمِسْكِينِ
अस्सलामु अलैक या मन तसद्दक़ फ़ी सलातिही बिख़ातमिही अलल मिस्कीन
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने नमाज़ में अपनी अंगूठी ग़रीब को दी

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا قَالِعَ ٱلصَّخْرَةِ عَنْ فَمِ ٱلْقَلِيبِ
अस्सलामु अलैक या क़ालिअस्सख़रति अन फ़मिल क़लीब
तुम पर सलाम हो, जिन्होंने कुएँ के मुँह से चट्टान हटाई

وَمُظْهِرَ ٱلْمَاءِ ٱلْمَعِينِ
वा मुज़हिरल माइल मअीन
और साफ़ मीठा पानी बहा दिया

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا عَيْنَ ٱللَّهِ ٱلنَّاظِرَةَ
अस्सलामु अलैक या ऐनल्लाहिन्नाज़िरा
तुम पर सलाम हो, ऐ अल्लाह की देखने वाली आँख

وَيَدَهُ ٱلْبَاسِطَةَ
वा यदहुल बासिता
और उसकी फैली हुई क़ुदरत

وَلِسَانَهُ ٱلْمُعَبِّرَ عَنْهُ فِي بَرِيَّتِهِ أَجْمَعِينَ
वा लिसानहुल मुअब्बिर अन्हु फ़ी बरिय्यतिही अजमईन
और उसकी तरफ़ से सारी मख़लूक़ तक बात पहुँचाने वाली ज़बान

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ عِلْمِ ٱلنَّبِيِّينَ
अस्सलामु अलैक या वारिस इल्मिन्नबिय्यीन
तुम पर सलाम हो, ऐ नबियों के इल्म के वारिस

وَمُسْتَوْدَعَ عِلْمِ ٱلأَوَّلِينَ وَٱلآخِرِينَ
वा मुस्तवदअ इल्मिल अव्वलीन वल आख़िरीन
और पहले और बाद वालों के इल्म के अमानतदार

وَصَاحِبَ لِوَاءِ ٱلْحَمْدِ
वा साहिब लिवाइल हम्द
और हम्द के झंडे को उठाने वाले

وَسَاقِيَ أَوْلِيَائِهِ مِنْ حَوْضِ خَاتَمِ ٱلنَّبِيِّينَ
वा साक़ी औलियाइही मिन हौज़ि खातमिन्नबिय्यीन
और अपने चाहने वालों को रसूल के हौज़ से पानी पिलाने वाले

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا يَعْسُوبَ ٱلدِّينِ
अस्सलामु अलैक या यअसूबद्दीन
तुम पर सलाम हो, ऐ दीन के सरदार

وَقَائِدَ ٱلْغُرِّ ٱلْمُحَجَّلِينَ
वा क़ाइदल गुर्रिल मुहज्जलीन
और रौशन चेहरों वाले लोगों के रहनुमा

وَوَالِدَ ٱلأَئِمَّةِ ٱلْمَرْضِيِّينَ
वा वालिदल अइम्मतिल मर्ज़िय्यीन
और पसंदीदा इमामों के वालिद

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें तुम पर हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّضِيِّ
अस्सलामु अला इस्मिल्लाहिर रज़िय्यी
सलाम हो अल्लाह के उस नाम पर जिससे वह राज़ी है

وَوَجْهِهِ ٱلْمُضِيءِ
वा वज्हिहिल मुज़ीई
और उसके रौशन चेहरे पर

وَجَنْبِهِ ٱلْقَوِيِّ
वा जन्बिहिल क़वी
और उसकी मज़बूत क़ुदरत पर

وَصِرَاطِهِ ٱلسَّوِيِّ
वा सिरातिहिस्सवी
और उसके सीधे रास्ते पर

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلإِمَامِ ٱلتَّقِيِّ
अस्सलामु अलल इमामित् तक़ी
सलाम हो उस परहेज़गार इमाम पर

ٱلْمُخْلِصِ ٱلصَّفِيِّ
अल मुख़लिसिस्सफ़ी
जो सच्चे और चुने हुए हैं

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْكَوكَبِ ٱلدُّرِّيِّ
अस्सलामु अलल कौकबिद्दुर्री
सलाम हो उस चमकते सितारे पर

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلإِمَامِ أَبِي ٱلْحَسَنِ عَلِيٍّ
अस्सलामु अलल इमामि अबिल हसन अली
सलाम हो इमाम अबुल हसन अली पर

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ أَئِمَّةِ ٱلْهُدَىٰ
अस्सलामु अला अइम्मतिल हुदा
सलाम हो हिदायत देने वाले इमामों पर

وَمَصَابِيحِ ٱلدُّجَىٰ
वा मसाबीहिद्दुजा
जो अंधेरे में चिराग़ हैं

وَأَعْلامِ ٱلتُّقَىٰ
वा अअलामित्तुक़ा
और परहेज़गारी की निशानियाँ हैं

وَمَنَارِ ٱلْهُدَىٰ
वा मनारिल हुदा
और हिदायत की रोशनी हैं

وَذَوِي ٱلنُّهَىٰ
वा ज़विन्नुहा
और समझ-बूझ वाले हैं

وَكَهْفِ ٱلْوَرَىٰ
वा कह्फ़िल वरा
और लोगों के लिए पनाह हैं

وَٱلْعُرْوَةِ ٱلْوُثْقَىٰ
वल उरवतिल वुस्क़ा
और मज़बूत सहारा हैं

وَٱلْحُجَّةِ عَلَىٰ أَهْلِ ٱلدُّنْيَا
वल हुज्जति अला अह्लिद्दुन्या
और दुनिया वालों पर अल्लाह की दलील हैं

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ نُورِ ٱلأَنْوَارِ
अस्सलामु अला नूरिल अनवार
सलाम हो नूरों के नूर पर

وَحُجَّةِ ٱلْجَبَّارِ
वा हुज्जतिल जब्बार
और ज़बरदस्त रब की दलील पर

وَوَالِدِ ٱلأَئِمَّةِ ٱلأَطْهَارِ
वा वालिदिल अइम्मतिल अतहार
और पाक इमामों के वालिद पर

وَقَسِيمِ ٱلْجَنَّةِ وَٱلنَّارِ
वा क़सीमिल जन्नति वन्नार
और जन्नत व जहन्नम का फ़ैसला करने वाले पर

ٱلْمُخْبِرِ عَنِ ٱلآثَارِ
अल मुख़बिरि अनिल आसार
जो पहले की बातें बताते हैं

ٱلْمُدَمِّرِ عَلَىٰ ٱلْكُفَّارِ
अल मुदम्मिरि अलल कुफ़्फ़ार
और ज़ालिम काफ़िरों को मिटाने वाले हैं

مُسْتَنْقِذِ ٱلشِّيعَةِ ٱلْمُخْلِصِينَ مِنْ عَظِيمِ ٱلأَوْزَارِ
मुस्तनक़िज़िश्शीअतिल मुख़लिसीन मिन अज़ीमिल औज़ार
और सच्चे शियाओं को बड़े गुनाहों से बचाने वाले हैं

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلْمَخْصُوصِ بِٱلطَّاهِرَةِ ٱلتَّقِيَّةِ ٱبْنَةِ ٱلْمُخْتَارِ
अस्सलामु अलल मख़्सूसि बित्ताहिरतित्तक़िय्यति इब्नतिल मुख़्तार
सलाम हो उस पर जिन्हें चुने हुए नबी की पाक बेटी मिली

ٱلْمَوْلُودِ فِي ٱلْبَيْتِ ذِي ٱلأَسْتَارِ
अल मौलूदि फ़िल बैतिज़िल अस्तार
जो पर्दों वाले घर में पैदा हुए

ٱلْمُزَوَّجِ فِي ٱلسَّمَاءِ بِٱلْبَرَّةِ ٱلطَّاهِرَةِ
अल मुज़व्वजि फ़िस्समाई बिल बर्रतित्ताहिरा
जिनका निकाह आसमान में पाक बीबी से हुआ

ٱلرَّضِيَّةِ ٱلْمَرْضِيَّةِ
अर्रज़िय्यतिल मर्ज़िय्या
जो अल्लाह से राज़ी और अल्लाह जिनसे राज़ी है

وَالِدَةِ ٱلأَئِمَّةِ ٱلأَطْهَارِ
वालिदतिल अइम्मतिल अतहार
जो पाक इमामों की माँ हैं

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ
अस्सलामु अलन नबइल अज़ीम
सलाम हो उस बड़ी ख़बर पर

ٱلَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
अल्लज़ी हुम फ़ीहि मुख़्तलिफ़ून
जिसमें लोग अलग-अलग राय रखते हैं

وَعَلَيْهِ يُعْرَضُونَ
वा अलैहि युअरज़ून
और जिसके सामने सब पेश किए जाएँगे

وَعَنْهُ يُسْأَلُونَ
वा अन्हु युसअलून
और जिसके बारे में सवाल किया जाएगा

اَلسَّلاَمُ عَلَىٰ نُورِ ٱللَّهِ ٱلأَنْوَرِ
अस्सलामु अला नूरिल्लाहिल अनवर
सलाम हो अल्लाह के सबसे रौशन नूर पर

وَضِيَاءِِهِ ٱلأَزْهَرِ
वा ज़ियाइहिल अज़हर
और उसकी सबसे चमकदार रोशनी पर

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ وَحُجَّتَهُ
अस्सलामु अलैक या वलिय्यल्लाहि वा हुज्जतहू
सलाम हो तुम पर, ऐ अल्लाह के वली और उसकी दलील

وَخَالِصَةَ ٱللَّهِ وَخَاصَّتَهُ
वा ख़ालिसतल्लाहि वा ख़ास्सतहू
और अल्लाह के खास चुने हुए बंदे

أَشْهَدُ أَنَّكَ يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ وَحُجَّتَهُ
अशहदु अन्नका या वलिय्यल्लाहि वा हुज्जतहू
मैं गवाही देता हूँ कि तुम अल्लाह के वली और उसकी दलील हो

لَقَدْ جَاهَدْتَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِ
लक़द जाहद्ता फ़ी सबीलिल्लाहि हक्क़ जिहादिही
तुमने अल्लाह की राह में पूरा हक़ अदा करते हुए जिहाद किया

وَٱتَّبَعْتَ مِنْهَاجَ رَسُولِ ٱللَّهِ صَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ
वत्तबअता मिन्हाज रसूलिल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिही
और अल्लाह के रसूल और उनके घराने के रास्ते पर चले

وَحَلَّلْتَ حَلاَلَ ٱللَّهِ
वा हलल्ता हलालल्लाह
अल्लाह के हलाल को हलाल बताया

وَحَرَّمْتَ حَرَامَ ٱللَّهِ
वा हर्रम्ता हरामल्लाह
और अल्लाह के हराम को हराम ठहराया

وَشَرَعْتَ أَحْكَامَهُ
वा शरअ्ता अहकामहू
और उसके हुक्म लागू किए

وَأَقَمْتَ ٱلصَّلاَةَ
वा अक़म्तस्सलात
नमाज़ क़ायम की

وَآتَيْتَ ٱلزَّكَاةَ
वा आतैतज़्ज़कात
और ज़कात अदा की

وَأَمَرْتَ بِٱلْمَعْرُوفِ
वा अमरता बिल मअरूफ़
भलाई का हुक्म दिया

وَنَهَيْتَ عَنِ ٱلْمُنْكَرِ
वा नहैत अनिल मुनकर
और बुराई से रोका

وَجَاهَدْتَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ صَابِراً نَاصِحاً
वा जाहद्ता फ़ी सबीलिल्लाहि साबिरन नासिहा
सब्र और सच्ची नसीहत के साथ अल्लाह की राह में जूझते रहे

مُجْتَهِداً مُحْتَسِباً عِنْدَ ٱللَّهِ عَظِيمَ ٱلأَجْرِ حَتَّىٰ أَتَاكَ ٱلْيَقِينُ
मुज्तहिदन मुहतसिबन इन्दल्लाहि अज़ीमल अज्रि हत्ता अताकल यक़ीन
पूरी मेहनत और अल्लाह से सवाब की उम्मीद के साथ, यहाँ तक कि मौत आ गई

فَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ دَفَعَكَ عَنْ حَقِّكَ
फ़लअनल्लाहु मन दफ़अका अन हक्क़िका
तो अल्लाह की लानत हो उन पर जिन्होंने तुम्हारा हक़ छीना

وَأَزَالَكَ عَنْ مَقَامِكَ
वा अज़ालका अन मक़ामिका
और तुम्हें तुम्हारे मुक़ाम से हटाया

وَلَعَنَ ٱللَّهُ مَنْ بَلَغَهُ ذٰلِكَ فَرَضِيَ بِهِ
वा लअनल्लाहु मन बलग़हू ज़ालिका फ़रज़िया बिही
और उन पर भी जिनको पता था फिर भी राज़ी रहे

أُشْهِدُ ٱللَّهَ وَمَلائِكَتَهُ وَأَنْبِيَاءَهُ وَرُسُلَهُ
उश्हिदुल्लाह वा मलाइकतहू वा अंबियाअहू वा रुसुलहू
मैं अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, नबियों और रसूलों को गवाह बनाता हूँ

أَنِّي وَلِيٌّ لِمَنْ وَالاَكَ
अन्नी वलिय्युन लिमन वालाका
कि मैं उससे मोहब्बत रखता हूँ जो तुमसे मोहब्बत रखे

وَعَدُوٌّ لِمَنْ عَادَاكَ
वा अदुव्वुन लिमन आदाका
और उससे दुश्मनी रखता हूँ जो तुमसे दुश्मनी रखे

اَلسَّلاَمُ عَلَيْكَ وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
अस्सलामु अलैक वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
सलाम हो तुम पर और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों

अब क़ब्र से लिपट जाओ, उसे चूमो और ये अल्फ़ाज़ पढ़ो:
أَشْهَدُ أَنَّكَ تَسْمَعُ كَلاَمِي
अशहदु अन्नका तस्मउ कलामी
मैं गवाही देता हूँ कि तुम मेरी बात सुनते हो

وَتَشْهَدُ مَقَامِي
वा तश्हदु मक़ामी
और मेरी मौजूदगी देखते हो

وَأَشْهَدُ لَكَ يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ بِٱلْبَلاَغِ وَٱلأَدَاءِ
वा अशहदु लका या वलिय्यल्लाहि बिल बलाग़ि वल अदाई
और मैं गवाही देता हूँ कि तुमने अल्लाह का पैग़ाम पूरा पहुँचा दिया

يَا مَوْلاَيَ يَا حُجَّةَ ٱللَّهِ
या मौलाया या हुज्जतल्लाह
ऐ मेरे मौला! ऐ अल्लाह की दलील!

يَا أَمِينَ ٱللَّهِ يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ
या अमीनल्लाह या वलिय्यल्लाह
ऐ अल्लाह के अमीन! ऐ अल्लाह के वली!

إِنَّ بَيْنِي وَبَيْنَ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ذُنُوباً
इन्ना बैनी वा बैनल्लाहि अज़्ज़ा वा जल्ला ज़ुनूबन
मेरे और अल्लाह के बीच बहुत से गुनाह हैं

قَدْ أَثْقَلَتْ ظَهْرِي
क़द अस्क़लत ज़हरी
जिन्होंने मेरी पीठ झुका दी है

وَمَنَعَتْنِي مِنَ ٱلرُّقَادِ
वा मनअतनी मिनर रुक़ाद
और मेरी नींद छीन ली है

وَذِكْرُهَا يُقَلْقِلُ أَحْشَائِي
वा ज़िक्रुहा युक़लक़िलु अह्शाई
उनकी याद से मेरा दिल काँप उठता है

وَقَدْ هَرَبْتُ إِلَىٰ ٱللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَإِلَيْكَ
वा क़द हरब्तु इलल्लाहि अज़्ज़ा वा जल्ला वा इलैका
इसलिए मैं अल्लाह और तुम्हारी पनाह में आया हूँ

فَبِحَقِّ مَنِ ٱئْتَمَنَكَ عَلَىٰ سِرِّهِ
फ़बिहक्क़ि मन इतमनका अला सिर्रिही
उस ज़ात के वास्ते जिसने तुम्हें अपने राज़ सौंपे

وَٱسْتَرْعَاكَ أَمْرَ خَلْقِهِ
वस्तरआका अम्र खलक़िही
और अपनी मख़लूक़ का ज़िम्मा दिया

وَقَرَنَ طَاعَتَكَ بِطَاعَتِهِ
वा क़रना ताअतका बिता्अतिही
और तुम्हारी इताअत को अपनी इताअत बनाया

وَمُوَالاَتَكَ بِمُوَالاَتِهِ
वा मुवालातका बिमुवालातिही
और तुम्हारी दोस्ती को अपनी दोस्ती ठहराया

كُنْ لِي إِلَىٰ ٱللَّهِ شَفِيعاً
कुन ली इलल्लाहि शफ़ीअन
मेरे लिए अल्लाह के यहाँ सिफ़ारिश करो

وَمِنَ ٱلنَّارِ مُجِيراً
वा मिनन्नारि मुजीरन
और मुझे जहन्नम से बचाओ

وَعَلَىٰ ٱلدَّهْرِ ظَهِيراً
वा अलद्दहरि ज़हीरन
और ज़माने की मुश्किलों में मेरी मदद करो

फिर दोबारा क़ब्र से लिपट कर उसे चूमो और ये अल्फ़ाज़ पढ़ो:
يَا وَلِيَّ ٱللَّهِ
या वलिय्यल्लाह
ऐ अल्लाह के वली!

يَا حُجَّةَ ٱللَّهِ
या हुज्जतल्लाह
ऐ अल्लाह की दलील!

يَا بَابَ حِطَّةِ ٱللَّهِ
या बाबे हित्ततिल्लाह
ऐ अल्लाह की मग़फिरत का दरवाज़ा!

وَلِيُّكَ وَزَائِرُكَ
वलिय्युका वा ज़ाइरुका
मैं तुम्हारा चाहने वाला और ज़ियारत करने वाला हूँ

وَٱللاَّئِذُ بِقَبْرِكَ
वल्लाइज़ु बिक़ब्रिका
तुम्हारी क़ब्र की पनाह लेने वाला हूँ

وَٱلنَّازِلُ بِفِنَائِكَ
वन्नाज़िलु बिफ़िनाइका
तुम्हारे आँगन में ठहरने वाला हूँ

وَٱلْمُنِيخُ رَحْلَهُ فِي جِوَارِكَ
वलमुनीखु रह्लहू फी जिवारिका
तुम्हारे पास डेरा डालने वाला हूँ

يَسْأَلُكَ أَنْ تَشْفَعَ لَهُ إِلَىٰ ٱللَّهِ فِي قَضَاءِ حَاجَتِهِ
यसअलुका अन तशफ़ा लहू इलल्लाहि फी क़ज़ाइ हाजतिही
तुमसे दरख़्वास्त है कि अल्लाह के सामने मेरी सिफ़ारिश करो

وَنُجْحِ طَلِبَتِهِ فِي ٱلدُّنْيَا وَٱلآخِرَةِ
वा नुज्हि तलिबतिही फ़िद्दुन्या वल आख़िरा
ताकि मेरी दुनिया और आख़िरत की हाजत पूरी हो

فَإِنَّ لَكَ عِنْدَ ٱللَّهِ ٱلْجَاهَ ٱلْعَظِيمَ
फ़इन्ना लका इन्दल्लाहिल जाहल अज़ीम
क्योंकि अल्लाह के पास तुम्हारा बहुत बड़ा मुक़ाम है

وَٱلشَّفَاعَةَ ٱلْمَقْبُولَةَ
वश्शफ़ाअतल मक़बूला
और तुम्हारी सिफ़ारिश क़बूल होती है

فَٱجْعَلْنِي يَا مَوْلاَيَ مِنْ هَمِّكَ
फ़जअलनी या मौलाया मिन हम्मिका
ऐ मेरे मौला! मुझे अपनी निगाह में रखो

وَأَدْخِلْنِي فِي حِزْبِكَ
वा अदख़िलनी फी हिज़्बिका
और मुझे अपने गिरोह में शामिल कर लो

وَٱلسَّلامُ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ ضَجِيعَيْكَ آدَمَ وَنُوحٍ
वस्सलामु अलैक वा अला ज़जीअयका आदम वा नूह
सलाम हो तुम पर और आदम व नूह पर

وَٱلسَّلامُ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ وَلَدَيْكَ ٱلْحَسَنِ وَٱلْحُسَيْنِ
वस्सलामु अलैक वा अला वलदैका अलहसन वलहुसैन
और सलाम हो तुम्हारे दोनों बेटों हसन और हुसैन पर

وَعَلَىٰ ٱلأَئِمَّةِ ٱلطَّاهِرِينَ مِنْ ذُرِّيَّتِكَ
वा अला अलअइम्मतित् ताहिरीन मिन ज़ुर्रिय्यतिका
और तुम्हारी पाक नस्ल के इमामों पर

وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू
और अल्लाह की रहमत और बरकतें हों


अब ज़ियारत की छह रकअत नमाज़ पढ़ो: दो अमीरुल मोमिनीन की, दो हज़रत आदम की और दो हज़रत नूह की। फिर दिल से दुआ माँगो, क्योंकि यहाँ दुआ क़बूल होती है, इंशाअल्लाह।





विदाई ज़ियारत – इक़बाल आमाल
وَ هُوَ السَّلَامُ عَلَيْكَ وَ رَحْمَةُ اللَّهِ وَ بَرَكَاتُهُ أَسْتَوْدِعُكَ اللَّهَ وَ أَقْرَأُ عَلَيْكَ
السَّلَامَ آمَنَّا بِاللَّهِ وَ بِالرَّسُولِ وَ بِمَا جَاءَ بِهِ وَ دَعَا إِلَيْهِ وَ دَلَّ عَلَيْهِ
اللَّهُمَّ لَا تَجْعَلْهُ آخِرَ الْعَهْدِ مِنْ زِيَارَتِي إِيَّاهُ
اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا ثَوَابَ مَزَارِهِ وَ ارْزُقْنَا الْعَوْدَ وَ إِنْ تَوَفَّيْتَنِي قَبْلَ ذَلِكَ فَإِنِّي أَشْهَدُ فِي مَمَاتِي بِمَا شَهِدْتُ عَلَيْهِ فِي حَيَاتِي أَشْهَدُ أَنَّهُمْ أَعْلَامُ الْهُدَى وَ نُجُومُ الْعُلَى وَ الْقَدْرُ الْبَالِغُ مَا بَيْنَكَ وَ بَيْنَ خَلْقِكَ أَشْهَدُ أَنَّ مَنْ رَدَّ ذَلِكَ هُوَ فِي دَرْكِ الْجَحِيمِ
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ أَنْ تُصَلِّيَ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِ مُحَمَّدٍ وَ تُسَمِّي الْأَئِمَّةَ وَاحِداً وَاحِداً وَ أَنْ لَا تَجْعَلْهُ آخِرَ الْعَهْدِ مِنْ وِفَادَتِهِ وَ الِانْقِضَاءِ مِنْ زِيَارَتِهِ وَ إِنْ جَعَلْتَهُ فَاجْعَلْنِي مَعَ هَؤُلَاءِ الْأَئِمَّةِ الْهُدَاةِ
اللَّهُمَّ ذَلِّلْ قَلْبِي بِالطَّاعَةِ وَ الْمُنَاصَحَةِ وَ الْمُوَالاةِ وَ حُسْنِ الْمُوَازَرَةِ وَ الْمَوَدَّةِ وَ التَّسْلِيمِ حَتَّى يَسْتَكْمِلَ بِذَلِكَ طَاعَتُكَ وَ يَبْلُغَ بِهَا مَرْضَاتَكَ وَ يَسْتَوْجِبَ بِهَا ثَوَابَكَ بِرَحْمَتِكَ
اللَّهُمَّ إِنِّي أُشْهِدُكَ بِالْوَلَايَةِ لِمَنْ وَالَيْتَ وَ وَالَتْ رُسُلُكَ وَ أَنْبِيَاؤُكَ وَ مَلَائِكَتُكَ وَ أُشْهِدُكَ بِالْبَرَاءَةِ مِمَّنْ بَرِئْتَ أَنْتَ مِنْهُ وَ بَرِئَتْ مِنْهُ رُسُلُكَ وَ أَنْبِيَاؤُكَ وَ مَلَائِكَتُكَ الْمُقَرَّبُونَ وَ السَّفَرَةُ الْأَبْرَارُ
اللَّهُمَّ وَفِّقْنِي لِكُلِّ مَقَامٍ مَحْمُودٍ وَ أَقْلِبْنِي مِنْ هَذَا الْحَرَمِ بِخَيْرٍ مَوْجُودٍ يَا ذَا الْجَلَالِ وَ الْإِكْرَامِ
अल्लाह की सलामती, रहमत और बरकत तुम पर हो। मैं तुम्हें अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ और तुम पर सलाम पढ़ता हूँ। हम अल्लाह पर, रसूल पर और उस दीन पर ईमान रखते हैं जो वह लाए, जिसकी दावत दी और जिसकी रहनुमाई की। ऐ मेरे अल्लाह! इसे मेरी आख़िरी ज़ियारत न बना। ऐ मेरे अल्लाह! हमें इस मज़ार की ज़ियारत के सवाब से महरूम न कर और हमें दोबारा आने की तौफ़ीक़ दे। और अगर इससे पहले मेरी मौत आ जाए, तो मैं अपनी मौत में वही गवाही देता हूँ जो अपनी ज़िंदगी में देता रहा हूँ। मैं गवाही देता हूँ कि ये हिदायत की निशानियाँ हैं, बुलंद सितारे हैं और तेरे और तेरी मख़लूक़ के दरमियान वसीला हैं। और जो इसे न माने, वह जहन्नम की गहराई में होगा। ऐ मेरे अल्लाह! मैं तुझसे दुआ करता हूँ कि मुहम्मद और आले मुहम्मद पर दरूद भेज।
फिर एक-एक करके इमामों का नाम लो और यूँ कहो: ऐ अल्लाह! इसे मेरी आख़िरी हाज़िरी न बना। मेरी दुनिया और आख़िरत की हाजतें पूरी करने के लिए सिफ़ारिश क़बूल फ़रमा। मुझे हिदायत देने वाले इन इमामों के साथ रख।
ऐ मेरे अल्लाह! मेरे दिल को इताअत, सच्ची नसीहत, दोस्ती, मोहब्बत और तस्लीम से नरम कर दे, ताकि मैं तेरी पूरी फरमाबरदारी कर सकूँ, तेरी रज़ा हासिल करूँ और तेरे अज्र व रहमत का हक़दार बनूँ। ऐ मेरे अल्लाह! मैं उस वलायत की गवाही देता हूँ जिसकी गवाही तेरे नबी, रसूल और फ़रिश्ते देते हैं। और मैं उनसे बरी हूँ जिनसे तू बरी है। ऐ मेरे अल्लाह! मुझे हर मक़ाम-ए-महमूद में कामयाबी दे और मुझे यहाँ से बेहतरीन फ़ायदे के साथ लौटने की तौफ़ीक़ दे। ऐ जलाल और इकराम वाले रब!
السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا تَاجَ الْأَوْصِيَاءِ
السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَأْسَ الصِّدِّيقِينَ
السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا وَارِثَ الْأَحْكَامِ السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رُكْنَ الْمَقَامِ [يَا صَاحِبَ الرُّكْنِ وَ الْمَقَامِ‌]
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنْ وَفْدِهِ الْمُبَارَكِينَ وَ زُوَّارِهِ الْمُخْلَصِينَ وَ شِيعَتِهِ الصَّادِقِينَ وَ مَوَالِيهِ النَّاصِحِينَ وَ أَنْصَارِهِ الْمُكْرَمِينَ وَ أَصْحَابِهِ الْمُؤَيَّدِينَ وَ اجْعَلْنِي أَكْرَمَ وَافِدٍ وَ أَفْضَلَ وَارِدٍ وَ أَنْبَلَ قَاصِدٍ فِي هَذَا الْحَرَمِ الْكَرِيمِ وَ الْمَقَامِ الْعَظِيمِ وَ الْمَوْرِدِ النَّبِيلِ وَ الْمَنْهَلِ الْجَلِيلِ الَّذِي أَوْجَبْتَ فِيهِ غُفْرَانَكَ وَ رَحْمَتَكَ وَ أُشْهِدُ اللَّهَ وَ مَنْ حَضَرَ مِنْ مَلَائِكَتِهِ فِي هَذَا الْحَرَمِ الَّذِي هُمْ بِهِ [فيه‌] مُحْدِقُونَ حَافُّونَ أَنَّ مَنْ سَكَنَ رَمْسَهُ وَ حَلَّ ضَرِيحَهُ طُهْرٌ مُقَدَّسٌ صِدِّيقٌ مُنْتَجَبٌ وَ وَصِيٌّ مُرْتَضًى وَاهاً لَكَ مِنْ تُرْبَةٍ ضَمِنَتْ [ضمت‌] نُوراً مِنَ الْخَيْرِ وَ شِهَاباً مِنَ النُّورِ وَ يَنْبُوعَ الْحِكْمَةِ وَ عَيْناً مِنَ الرَّحْمَةِ وَ إِبْلَاغَ الْحُجَّةِ أَنَا أَبْرَأُ إِلَى اللَّهِ مِنْ قَاتِلِيكَ وَ ظَالِمِيكَ وَ النَّاصِبِينَ لَكَ وَ الْمُعِينِينَ عَلَيْكَ وَ الْمُحَارِبِينَ لَكَ وَ أُوَدِّعُكَ يَا مَوْلَايَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ وَدَاعَ الْمَحْزُونِ لِفِرَاقِكَ الْمُكْتَئِبِ بِالزَّوَالِ عَنْ حَرَمِكَ الْمُتَفَجِّعِ عَلَيْكَ لَا جَعَلَهُ اللَّهُ آخِرَ الْعَهْدِ مِنْكَ وَ لَا مِنْ زِيَارَتِنَا لَكَ إِنَّهُ [إنك‌] سَمِيعٌ مُجِيبٌ.
सलाम हो तुम पर, ऐ औसिया के ताज! सलाम हो तुम पर, ऐ सच्चों के सरदार! सलाम हो तुम पर, ऐ अहकाम के वारिस! सलाम हो तुम पर, ऐ रुक्न और मक़ाम के मालिक! ऐ मेरे अल्लाह! मुझे उनके मुबारक ज़ायरीनों, सच्चे चाहने वालों, नेक साथियों और मददगारों में शामिल कर। मुझे इस पाक हरम में आने वालों में सबसे बेहतर बना, जहाँ तूने अपनी मग़फिरत और रहमत वादा की है। मैं अल्लाह और यहाँ मौजूद फ़रिश्तों को गवाह बनाता हूँ कि यहाँ दफ़्न होने वाले पाक, मुक़द्दस, सच्चे और चुने हुए वसी हैं। अफ़सोस उस मिट्टी पर जिसने इतना नूर, हिकमत का चश्मा और रहमत का सरचश्मा अपने अंदर लिया। मैं अल्लाह के सामने तुम्हारे क़ातिलों, ज़ालिमों और दुश्मनों से बरी हूँ। ऐ मेरे मौला, ऐ अमीरुल मोमिनीन! मैं तुमसे विदा लेता हूँ, उस दिल के साथ जो जुदाई में ग़मगीन है। अल्लाह इसे मेरी आख़िरी ज़ियारत न बनाए। बेशक वह सुनने वाला और दुआ क़बूल करने वाला है।