इमाम अली अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) और पाक इमाम (अ.स.), जो माह-ए-शाबान में इस दुआ को पढ़ा करते थे।” बेहतर है कि इस दुआ को हमेशा दिल की पूरी हाज़िरी के साथ पढ़ा जाए।
اَللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व आले मुहम्मद
ऐ अल्लाह! मुहम्मद (स.) और आले-मुहम्मद (अ.) पर रहमतें नाज़िल फ़रमा
وَٱسْمَعْ دُعَائِي إِذَا دَعَوْتُكَ
वस्मअ दुआई इज़ा दअवतुक
और जब मैं तुझसे दुआ करूँ तो मेरी दुआ सुन
وَٱسْمَعْ نِدَائِي إِذَا نَادَيْتُكَ
वस्मअ निदाई इज़ा नादैतुक
और जब मैं तुझे पुकारूँ तो मेरी पुकार सुन
وَأَقْبِلْ عَلَيَّ إِذَا نَاجَيْتُكَ
व अक़बिल अलय्य इज़ा नाजैतुक
और जब मैं तुझसे तनहाई में बात करूँ तो मेरी तरफ़ मुतवज्जेह हो
फ़क़द हरब्तु इलैक
मैं तुझी की तरफ़ भाग आया हूँ
وَوَقَفْتُ بَيْنَ يَدَيْكَ مُسْتَكِيناً لَكَ
व वक़फ्तु बैना यदैक मुस्तकीनन लक
और तेरे सामने आजिज़ी और ख़ुज़ू के साथ खड़ा हूँ
मुतज़र्रिअन इलैक
तेरे सामने गिड़गिड़ा रहा हूँ
رَاجِياً لِمَا لَدَيْكَ ثَوَابِي
राजियन लिमा लदैका सवाबी
और उस अज्र की उम्मीद रखता हूँ जो तेरे पास मेरे लिए है
وَتَعْلَمُ مَا فِي نَفْسِي
व तअलमु मा फ़ी नफ़्सी
तू जानता है जो मेरे दिल में है
व तख़बुरु हाजती
और तू मेरी ज़रूरतों से वाक़िफ़ है
व तअरिफ़ु ज़मीरी
और तू मेरे ज़मीर को जानता है
وَلاَ يَخْفَىٰ عَلَيْكَ أَمْرُ مُنْقَلَبِي وَمَثْوَايَ
व ला यख़फ़ा अलैका अम्रु मुन्क़लबी व मसवाया
और मेरी हर हालत, मेरी हर हरकत तुझसे पोशीदा नहीं
وَمَا أُرِيدُ أَنْ أُبْدِئَ بِهِ مِنْ مَنْطِقِي
व मा उरीदु अन उबदिआ बिही मिन मन्तिक़ी
और जो बात मैं अपनी ज़ुबान से शुरू करना चाहता हूँ
وَأَتَفَوَّهَ بِهِ مِنْ طَلِبَتِي
व अतफ़व्वह बिही मिन तलिबती
और जो माँग मैं बयान करना चाहता हूँ
व अरजूहु लि आक़िबती
और जो अंजाम मैं अपने लिए उम्मीद करता हूँ
وَقَدْ جَرَتْ مَقَادِيرُكَ عَلَيَّ يَا سَيِّدِي
व क़द जरत मक़ादिरुका अलय्य या सैय्यिदी
ऐ मेरे मौला! तेरे फ़ैसले मेरे बारे में जारी हो चुके हैं
فِيمَا يَكُونُ مِنِّي إِلَىٰ آخِرِ عُمْرِي
फ़ीमा यकूनु मिन्नी इला आख़िरि उम्ऱी
मेरी ज़िंदगी के आख़िरी लम्हे तक
مِنْ سَرِيرَتِي وَعَلانِيَتِي
मिन सरिरती व अलानियत़ी
चाहे वो मेरी पोशीदा हालत हो या ज़ाहिरी
وَبِيَدِكَ لاَ بِيَدِ غَيْرِكَ زِيَادَتِي وَنَقْصِي
व बियदिका ला बियदि ग़ैरिका ज़ियादती व नक़्सी
और मेरी बढ़ोतरी और कमी सिर्फ़ तेरे हाथ में है, किसी और के हाथ में नहीं
व नफ़ई व ज़र्री
और मेरा फ़ायदा और नुक़सान भी
إِلٰهِي إِنْ حَرَمْتَنِي فَمَنْ ذَا ٱلَّذِي يَرْزُقُنِي
इलाही इन हरम्तनी फ़मन ज़ा अल्लज़ी यरज़ुक़ुनी
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तू मुझे रोज़ी से महरूम कर दे, तो फिर कौन है जो मुझे रोज़ी देगा
وَإِنْ خَذَلْتَنِي فَمَنْ ذَا ٱلَّذِي يَنْصُرُنِي
व इन ख़ज़ल्तनी फ़मन ज़ा अल्लज़ी यनसुरुनी
और अगर तू मुझे छोड़ दे, तो फिर कौन है जो मेरी मदद करेगा
إِلٰهِي أَعُوذُ بِكَ مِنْ غَضَبِكَ وَحُلُولِ سَخَطِكَ
इलाही अऊज़ु बिका मिन ग़ज़बिका व हुलूलि सख़तिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरे ग़ज़ब और तेरी नाराज़गी से तेरी ही पनाह चाहता हूँ
إِلٰهِي إِنْ كُنْتُ غَيْرَ مُسْتَأْهِلٍ لِرَحْمَتِكَ
इलाही इन कुन्तु ग़ैर मुस्तअहिलिन लिरहमतिका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर मैं तेरी रहमत के क़ाबिल नहीं हूँ
فَأَنْتَ أَهْلٌ أَنْ تَجُودَ عَلَيَّ بِفَضْلِ سَعَتِكَ
फ़अन्ता अहलुन अन तजूद अलेय्य बिफ़ज़्लि सअतिक
तो तू अपनी बड़ी फ़ज़्ल और सख़ावत से मुझ पर करम करने वाला है
إِلٰهِي كَأَنِّي بِنَفْسِي وَاقِفَةٌ بَيْنَ يَدَيْكَ
इलाही कअन्नी बिनफ़्सी वाक़िफ़तुन बैना यदैक
ऐ मेरे ख़ुदा! गोया मैं ख़ुद को तेरे सामने खड़ा देख रहा हूँ
وَقَدْ أَظَلَّهَا حُسْنُ تَوَكُّلِي عَلَيْكَ
व क़द अज़ल्लहा हुस्नु तवक्कुली अलैक
और उस पर तुझ पर मेरे अच्छे भरोसे की छाया है
فَقُلْتَ مَا أَنْتَ أَهْلُهُ وَتَغَمَّدْتَنِي بِعَفْوِكَ
फ़क़ुल्ता मा अन्त अहलुहू व तग़म्मद्तनी बिअफ़्विक
तो तूने वही फ़रमाया जो तेरी शान के लायक़ है और मुझे अपनी माफ़ी में ढाँप लिया
إِلٰهِي إِنْ عَفَوْتَ فَمَنْ أَوْلَىٰ مِنْكَ بِذٰلِكَ
इलाही इन अफ़वता फ़मन औला मिंका बिज़ालिक
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तू मुझे माफ़ करे, तो तुझसे ज़्यादा इसका हक़दार कौन है
وَإِنْ كَانَ قَدْ دَنَا أَجَلِي وَلَمْ يُدْنِنِي مِنْكَ عَمَلِي
व इन काना क़द दना अजली व लम युदनिनी मिंका अमली
और अगर मेरी मौत क़रीब आ जाए और मेरे आमाल मुझे तेरे क़रीब न ला सकें
فَقَدْ جَعَلْتُ ٱلإِقْرَارَ بِٱلذَّنْبِ إِلَيْكَ وَسِيلَتِي
फ़क़द जअल्तु अल-इक़रार बिज़्ज़म्बि इलैक वसीलती
तो मैंने अपने गुनाहों का इक़रार तुझ तक पहुँचने का ज़रिया बना लिया है
إِلٰهِي قَدْ جُرْتُ عَلَىٰ نَفْسِي فِي ٱلنَّظَرِ لَهَا
इलाही क़द जुरतु अला नफ़्सी फ़िन्नज़रि लहा
ऐ मेरे ख़ुदा! मैंने अपनी ही जान पर ज़ुल्म किया है
فَلَهَا ٱلْوَيْلُ إِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَهَا
फ़लहा अल-वैलु इन लम तग़फ़िर लहा
अगर तूने इसे माफ़ न किया तो इसकी तबाही है
إِلٰهِي لَمْ يَزَلْ بِرُّكَ عَلَيَّ أَيَّامَ حَيَاتِي
इलाही लम यज़ल बिर्रुका अलेय्य अय्याम हयाती
ऐ मेरे ख़ुदा! मेरी ज़िंदगी भर तेरा करम मुझ पर जारी रहा है
فَلاَ تَقْطَعْ بِرَّكَ عَنِّي فِي مَمَاتِي
फ़ला तक़्ता बिर्रका अन्नी फ़ी ममाती
तो मेरी मौत के वक़्त भी अपना करम मुझसे मत रोकना
إِلٰهِي كَيفَ آيَسُ مِنْ حُسْنِ نَظَرِكَ لِي بَعْدَ مَمَاتِي
इलाही कैफ़ा आयसु मिन हुस्नि नज़रिका ली बाद ममाती
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरी रहमत से मायूस कैसे हो सकता हूँ, मेरी मौत के बाद भी
وَأَنْتَ لَمْ تُوَلِّنِي إِلاَّ ٱلْجَمِيلَ فِي حَيَاتِي
व अन्त लम तुवल्लिनी इल्ला अल-जमील फ़ी हयाती
जबकि तूने मेरी ज़िंदगी में हमेशा मेरे साथ भलाई ही की है
إِلٰهِي تَوَلَّ مِنْ أَمْرِي مَا أَنْتَ أَهْلُهُ
इलाही तवल्ला मिन अमरी मा अन्त अहलुहू
ऐ मेरे ख़ुदा! मेरे मामलात को उसी तरह सँभाल जैसा तेरी शान के लायक़ है
وَعُدْ عَلَيَّ بِفَضْلِكَ عَلَىٰ مُذْنِبٍ قَدْ غَمَرَهُ جَهْلُهُ
व उद् अलेय्य बिफ़ज़्लिका अला मुझ़निबिन क़द ग़मरहू जहलहू
और मुझ जैसे गुनहगार पर, जिसे उसकी नादानी ने ढाँप लिया है, अपना फ़ज़्ल लौटा दे
إِلٰهِي قَدْ سَتَرْتَ عَلَيَّ ذُنُوباً فِي ٱلدُّنْيَا
इलाही क़द सतर्त अलेय्य ज़ुनूबन फ़िद्दुनिया
ऐ मेरे ख़ुदा! तूने दुनिया में मेरे गुनाहों पर पर्दा डाला है
وَأَنَا أَحْوَجُ إِلَىٰ سَتْرِهَا عَلَيَّ مِنْكَ فِي ٱلأُخْرَىٰ
व अना अह्वजु इला सतरिहा अलय्य मिंका फ़िल आख़िरा
और आख़िरत में मुझे इन गुनाहों के छुपाए जाने की तुझसे और ज़्यादा ज़रूरत है
إِذْ لَمْ تُظْهِرْهَا لِأَحَدٍ مِنْ عِبَادِكَ ٱلصَّالِحِينَ
इज़ लम तुज़हिरहा लिअहदिम मिन इबादिका अस्सालिहीन
क्योंकि तूने इन्हें अपने किसी नेक बंदे पर भी ज़ाहिर नहीं किया
فَلاَ تَفْضَحْنِي يَوْمَ ٱلْقِيَامَةِ عَلَىٰ رُؤُوسِ ٱلْأَشْهَادِ
फ़ला तफ़दहनी यौमल क़ियामति अला रूऊसिल अशहाद
तो क़यामत के दिन सब गवाहों के सामने मुझे रुस्वा न करना
إِلٰهِي جُودُكَ بَسَطَ أَمَلِي
इलाही जूदुका बसता अमली
ऐ मेरे ख़ुदा! तेरी सख़ावत ने मेरी उम्मीद बढ़ा दी है
وَعَفْوُكَ أَفْضَلُ مِنْ عَمَلِي
व अफ़वुका अफ़ज़लु मिन अमली
और तेरी माफ़ी मेरे आमाल से कहीं बेहतर है
إِلٰهِي فَسُرَّنِي بِلِقَائِكَ يَوْمَ تَقْضِي فِيهِ بَيْنَ عِبَادِكَ
इलाही फ़सुर्रनी बिलिक़ाइका यौम तक़ज़ी फ़ीहि बैना इबादिक
ऐ मेरे ख़ुदा! जिस दिन तू अपने बंदों के बीच फ़ैसला करेगा, उस दिन मुझे अपनी मुलाक़ात से ख़ुश कर देना
إِلٰهِي ٱعْتِذَارِي إِلَيْكَ ٱعْتِذَارُ مَنْ لَمْ يَسْتَغْنِ عَنْ قَبُولِ عُذْرِهِ
इलाही इतिज़ारी इलैक इतिज़ारु मन लम यस्तग़्नी अन क़बूलि उज़्रिही
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तुझसे उस शख़्स की तरह माफ़ी माँगता हूँ जो अपनी माफ़ी क़बूल होने से बेनियाज़ नहीं हो सकता
فَٱقْبَلْ عُذْرِي يَا أَكْرَمَ مَنِ ٱعْتَذَرَ إِلَيْهِ ٱلْمُسِيئُونَ
फ़क़बल उज़्री या अकरम मन इतज़रा इलैहिल मुसीऊन
तो मेरी माफ़ी क़बूल कर, ऐ सबसे ज़्यादा करीम, जिसके सामने गुनहगार माफ़ी माँगते हैं
إِلٰهِي لاَ تَرُدَّ حَاجَتِي
इलाही ला तरुद्द हाजती
ऐ मेरे ख़ुदा! मेरी हाजत को रद्द न करना
व ला तुख़य्यिब तमई
और मेरी उम्मीद को नामुराद न करना
وَلاَ تَقْطَعْ مِنْكَ رَجَائِي وَأَمَلِي
व ला तक़ता मिंका रजाई व अमली
और तुझसे मेरी उम्मीद और आस को क़तअ न करना
إِلٰهِي لَوْ أَرَدْتَ هَوَانِي لَمْ تَهْدِنِي
इलाही लौ अरद्ता हवानी लम तहदिनी
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तू मेरी रुस्वाई चाहता तो तू मुझे हिदायत न देता
وَلَوْ أَرَدْتَ فَضِيحَتِي لَمْ تُعَافِنِي
व लौ अरद्ता फ़ज़ीहती लम तुआफ़िनी
और अगर तू मुझे ज़लील करना चाहता तो मुझे आफ़ियत न देता
إِلٰهِي مَا أَظُنُّكَ تَرُدُّنِي فِي حَاجَةٍ قَدْ أَفْنَيْتُ عُمْرِي فِي طَلَبِهَا مِنْكَ
इलाही मा अज़ुन्नुका तरुद्दुनी फ़ी हाजतिन क़द अफ़नैतु उम्री फ़ी तलबिहा मिंका
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं यह गुमान नहीं करता कि तू मेरी उस दुआ को ठुकराएगा, जिसके लिए मैंने उम्र गुज़ार दी
إِلٰهِي فَلَكَ ٱلْحَمْدُ أَبَداً أَبَداً دَائِماً سَرْمَداً
इलाही फ़लक अल्हम्दु अबदन अबदन दाइमन् सरमदन
ऐ मेरे ख़ुदा! हमेशा, हमेशा, हमेशा के लिए हर हम्द तेरे ही लिए है
يَزِيدُ وَلاَ يَبِيدُ كَمَا تُحِبُّ وَتَرْضَىٰ
यज़ीदु व ला यबीदु कमा तुहिब्बु व तरज़ा
जो बढ़ती रहे और कभी ख़त्म न हो, जैसा तू पसंद करता और राज़ी होता है
إِلٰهِي إِنْ أَخَذْتَنِي بِجُرْمِي أَخَذْتُكَ بِعَفْوِكَ
इलाही इन अख़ज़तनी बिज़ुर्मी अख़ज़तुका बिअफ़्विका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तू मुझे मेरे जुर्म पर पकड़े, तो मैं तेरी माफ़ी को थाम लूँगा
وَإِنْ أَخَذْتَنِي بِذُنُوبِي أَخَذْتُكَ بِمَغْفِرَتِكَ
व इन अख़ज़तनी बिज़ुनूबी अख़ज़तुका बिमग़फ़िरतिक
और अगर तू मुझे मेरे गुनाहों पर पकड़े, तो मैं तेरी मग़फ़िरत को थाम लूँगा
وَإِنْ أَدْخَلْتَنِي ٱلنَّارَ أَعْلَمْتُ أَهْلَهَا أَنِّي أُحِبُّكَ
व इन अदख़ल्तनी अन्नार अअलम्तु अहलहा अन्नी उहिब्बुक
और अगर तू मुझे जहन्नम में भी डाले, तो मैं उसके रहने वालों से कह दूँगा कि मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ
إِلٰهِي إِنْ كَانَ صَغُرَ فِي جَنْبِ طَاعَتِكَ عَمَلِي
इलाही इन काना सग़ुरा फ़ी जनबि ताअतिक अमली
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तेरी इताअत के मुक़ाबले मेरे आमाल छोटे हैं
فَقَدْ كَبُرَ فِي جَنْبِ رَجَائِكَ أَمَلِي
फ़क़द कबुरा फ़ी जनबि रजाइका अमली
तो तेरी रहमत से मेरी उम्मीद बहुत बड़ी है
إِلٰهِي كَيْفَ أَنْقَلِبُ مِنْ عِنْدِكَ بِٱلْخَيْبَةِ مَحْرُوماً
इलाही कैफ़ा अंक़लिबु मिन इंदिका बिलख़ैबति महरूमान
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरे पास से मायूस और महरूम होकर कैसे लौट सकता हूँ
وَقَدْ كَانَ حُسْنُ ظَنِّي بِجُودِكَ أَنْ تَقْلِبَنِي بِٱلنَّجَاةِ مَرْحُوماً
व क़द काना हुस्नु ज़न्नी बिजूदिका अन तक़लिबनी बिन्नजाति मरहूमान
जबकि तेरी सख़ावत से मेरी अच्छी उम्मीद यही रही है कि तू मुझे निजात देकर रहमत फरमाएगा
إِلٰهِي وَقَدْ أَفْنَيْتُ عُمْرِي فِي شِرَّةِ ٱلسَّهْوِ عَنْكَ
इलाही व क़द अफ़नैतु उम्री फ़ी शिर्रति अस्सह्वि अनका
ऐ मेरे ख़ुदा! मैंने अपनी उम्र तुझसे ग़ाफ़िल रहने में गुज़ार दी
وَأَبْلَيْتُ شَبَابِي فِي سَكْرَةِ ٱلتَّبَاعُدِ مِنْكَ
व अबलैतु शबाबी फ़ी सक्रति अत्तबाउदि मिंका
और अपनी जवानी तुझसे दूर रहने की मदहोशी में गँवा दी
إِلٰهِي فَلَمْ أَسْتَيْقِظْ أَيَّامَ ٱغْتِرَارِي بِكَ
इलाही फ़लम अस्तैक़िज़ अय्याम इग़्तिरारी बिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं अपने धोखे के दिनों में होश में न आया
وَرُكُونِي إِلَىٰ سَبِيلِ سَخَطِكَ
व रुकूनी इला सबीलि सख़तिक
और तेरी नाराज़गी के रास्ते पर चलता रहा
إِلٰهِي وَأَنَا عَبْدُكَ وَٱبْنُ عَبْدِكَ قَائِمٌ بَيْنَ يَدَيْكَ
इलाही व अना अब्दुका वब्नु अब्दिका क़ाइमुन बैना यदैक
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरा बंदा और तेरे बंदे का बेटा हूँ, और तेरे सामने खड़ा हूँ
مُتَوَسِّلٌ بِكَرَمِكَ إِلَيْكَ
मुतवस्सिलुन बिकरमिका इलैक
तेरी सख़ावत के सहारे तुझसे दरख़्वास्त कर रहा हूँ
إِلٰهِي أَنَا عَبْدٌ أَتَنَصَّلُ إِلَيْكَ مِمَّا كُنْتُ أُوَاجِهُكَ بِهِ
इलाही अना अब्दुन अतनस्सलु इलैक मिम्मा कुंतु उवाजिहुका बिही
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरा बंदा हूँ और उन बातों से तुझसे बरी होने की अरज़ करता हूँ
مِنْ قِلَّةِ ٱسْتِحْيَائِي مِنْ نَظَرِكَ
मिन क़िल्लति इस्तिह्याई मिन नज़रिका
जो तेरी नज़र में मेरी बेशर्मी और कमी-ए-हया की वजह से थीं
وَأَطْلُبُ ٱلْعَفْوَ مِنْكَ إِذ ِٱلْعَفْوُ نَعْتٌ لِكَرَمِكَ
व अतलुबुल अफ़्व मिंका इज़ अल-अफ़्व नअतुन लिकरमिका
और मैं तुझसे माफ़ी माँगता हूँ, क्योंकि माफ़ करना तेरी सख़ावत की पहचान है
إِلٰهِي لَمْ يَكُنْ لِي حَوْلٌ فَأَنْتَقِلَ بِهِ عَنْ مَعْصِيَتِكَ
इलाही लम यकुन ली हौलुन फ़-अन्तक़िला बिही अन मअसियतिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझमें इतनी ताक़त न थी कि मैं तेरी नाफ़रमानी से बच सकूँ
إِلاَّ فِي وَقْتٍ أَيْقَظْتَنِي لِمَحَبَّتِكَ
इल्ला फ़ी वक़्तिन ऐक़ज़्तनी लिमहब्बतिका
सिवाय उस वक़्त के जब तूने मुझे अपनी मोहब्बत के लिए जगा दिया
وَكَمَا أَرَدْتَ أَنْ أَكُونَ كُنْتُ
व कमा अरद्ता अन अकूना कुंतु
और मैं वैसा ही बन गया जैसा तू चाहता था
فَشَكَرْتُكَ بِإِدْخَالِي فِي كَرَمِكَ
फ़शक़रतुका बिइदख़ाली फ़ी करमिका
तो मैंने तेरा शुक्र अदा किया कि तूने मुझे अपनी सख़ावत में शामिल किया
وَلِتَطْهِيرِ قَلْبِي مِنْ أَوْسَاخِ ٱلْغَفْلَةِ عَنْكَ
व लितत्हीरि क़ल्बी मिन औसाख़िल ग़फ़लति अनका
और तूने मेरे दिल को तुझसे ग़ाफ़िल रहने की गंदगी से पाक कर दिया
إِلٰهِي ٱنْظُرْ إِلَيَّ نَظَرَ مَنْ نَادَيْتَهُ فَأَجَابَكَ
इलाही उन्ज़ुर इलैय्य नज़र मन नादैतहू फ़-अजाबक
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझ पर उसी तरह नज़र फ़रमा जैसे तूने उस पर फ़रमाई जिसे तूने पुकारा और उसने जवाब दिया
وَٱسْتَعْمَلْتَهُ بِمَعُونَتِكَ فَأَطَاعَكَ
व इस्तअमल्तहू बिमऊअनतिक फ़-अताअक
और जिसे तूने अपनी मदद से अपनी इताअत में लगा दिया
يَا قَرِيباً لاَ يَبْعُدُ عَنِ ٱلْمُغْتَرِّ بِهِ
या क़रीबन ला यबउदु अनिल मुग़्तर्रि बिही
ऐ क़रीब रहने वाले! जो तुझसे दिल लगाते हैं उनसे तू दूर नहीं होता
وَيَا جَوَاداً لاَ يَبْخَلُ عَمَّنْ رَجَا ثَوَابَهُ
व या जवादन ला यबख़लु अम्मन रजा सवाबहू
और ऐ बड़े करीम! जो तुझसे अज्र की उम्मीद रखे, उससे तू बुख़्ल नहीं करता
إِلٰهِي هَبْ لِي قَلْباً يُدْنِيهِ مِنْكَ شَوْقُهُ
इलाही हब ली क़ल्बन युदनीही मिंका शौक़ुहू
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे ऐसा दिल अता कर जिसकी चाहत मुझे तेरे क़रीब ले आए
وَلِسَاناً يُرْفَعُ إِلَيْكَ صِدْقُهُ
व लिसानन युरफ़उ इलैक़ सिद्क़ुहू
और ऐसी ज़ुबान दे जिसकी सच्चाई तुझ तक बुलंद हो
وَنَظَراً يُقَرِّبُهُ مِنْكَ حَقُّهُ
व नज़रन युक़र्रिबुहू मिंका हक़्क़ुहू
और ऐसी नज़र दे जिसकी सच्चाई मुझे तेरे क़रीब कर दे
إِلٰهِي إِنَّ مَنْ تَعَرَّفَ بِكَ غَيْرُ مَجْهُولٍ
इलाही इन्न मन तअर्रफ़ा बिका ग़ैरु मज्हूलिन
ऐ मेरे ख़ुदा! जो तुझे पहचान ले, वह कभी गुमनाम नहीं रहता
وَمَنْ لاَذَ بِكَ غَيْرُ مَخْذُولٍ
व मन लाज़ा बिका ग़ैरु मख़ज़ूलिन
और जो तुझसे पनाह माँगे, वह कभी नामुराद नहीं होता
وَمَنْ أَقْبَلْتَ عَلَيْهِ غَيْرُ مَمْلُولٍ
व मन अक़बल्ता अलैहि ग़ैरु ममलूलिन
और जिस पर तू रहमत से मुतवज्जेह हो जाए, वह कभी ज़लील नहीं होता
إِلٰهِي إِنَّ مَنِ ٱنْتَهَجَ بِكَ لَمُسْتَنِيرٌ
इलाही इन्न मन इंतहजा बिका लमुस्तनीरुन
ऐ मेरे ख़ुदा! जो तेरे रास्ते पर चले, वह रौशन हो जाता है
وَإِنَّ مَنِ ٱعْتَصَمَ بِكَ لَمُسْتَجِيرٌ
व इन्न मन इतअसमा बिका लमुस्तजीरुन
और जो तुझसे मज़बूती से जुड़ जाए, उसे पनाह मिल जाती है
وَقَدْ لُذْتُ بِكَ يَا إِلٰهِي فَلاَ تُخَيِّبْ ظَنِّي مِنْ رَحْمَتِكَ
व क़द लुज़्तु बिका या इलाही फ़ला तुख़य्यिब ज़न्नी मिन रहमतिका
मैंने तुझी में पनाह ली है ऐ मेरे ख़ुदा! तो अपनी रहमत से मेरी उम्मीद को मायूस न करना
وَلاَ تَحْجُبْنِي عَنْ رَأْفَتِكَ
व ला तहजुबनी अन रअफ़तिका
और मुझे अपनी मेहरबानी से महरूम न करना
إِلٰهِي أَقِمْنِي فِي أَهْلِ وِلايَتِكَ
इलाही अक़िमनी फ़ी अहलि विलायतिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे अपने वलीयों में शामिल फ़रमा
مُقَامَ مَنْ رَجَا ٱلزِّيَادَةَ مِنْ مَحَبَّتِكَ
मुक़ामा मन रजा अज़्ज़ियादत मिन महब्बतिका
उन लोगों के मक़ाम में जिनकी आरज़ू तेरी मोहब्बत में बढ़ोतरी की होती है
إِلٰهِي وَأَلْهِمْنِي وَلَهاً بِذِكْرِكَ إِلَىٰ ذِكْرِكَ
इलाही व अल्हिमनी वलहन बिज़िक्रिका इला ज़िक्रिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे अपनी याद से अपनी ही याद की तरफ़ ऐसी लगन अता फ़रमा
وَهِمَّتِي فِي رَوْحِ نَجَاحِ أَسْمَائِكَ وَمَحَلِّ قُدْسِكَ
व हिम्मती फ़ी रौहि नजाहि अस्माइका व महल्लि क़ुद्सिका
और मेरे इरादे को तेरे नामों की राहत और तेरी पाक बारगाह की तरफ़ मोड़ दे
إِلٰهِي بِكَ عَلَيْكَ إِلاَّ أَلْحَقْتَنِي بِمَحَلِّ أَهْلِ طَاعَتِكَ
इलाही बिका अलैका इल्ला अल्हक़्तनी बिमहल्लि अहलि ताअतिका
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तुझी के वासिते तुझसे चाहता हूँ कि मुझे अपने फ़रमाबरदार बंदों के मक़ाम में शामिल कर
وَٱلْمَثْوَىٰ ٱلصَّالِحِ مِنْ مَرْضَاتِكَ
वलमसवा अस्सालिहि मिन मर्ज़ातिका
और उस नेक ठिकाने में पहुँचा दे जो तेरी रज़ा का मरकज़ है
فَإِنِّي لاَ أَقْدِرُ لِنَفْسِي دَفْعاً
फ़इन्नी ला अक़्दिरु लिनाफ़्सी दफ़अन
क्योंकि मैं ख़ुद अपने लिए किसी नुक़सान को भी टालने की ताक़त नहीं रखता
وَلاَ أَمْلِكُ لَهَا نَفْعاً
व ला अम्लिकु लहा नफ़अन
और न ही अपने लिए कोई फ़ायदा हासिल कर सकता हूँ
إِلٰهِي أَنَا عَبْدُكَ ٱلضَّعِيفُ ٱلْمُذْنِبُ
इलाही अना अब्दुका अज़्ज़ईफ़ुल मुज़्निबु
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तेरा कमज़ोर और गुनहगार बंदा हूँ
व मम्लूकुका अल्मुनीबु
और तेरा वह गुलाम हूँ जो तेरी तरफ़ पलट आता है
فَلاَ تَجْعَلْنِي مِمَّنْ صَرَفْتَ عَنْهُ وَجْهَكَ
फ़ला तजअल्नी मिम्मन सरफ़्ता अन्हु वज्हका
तो मुझे उन लोगों में शामिल न करना जिनसे तूने अपना रुख़ फेर लिया
وَحَجَبَهُ سَهْوُهُ عَنْ عَفْوِكَ
व हजबहू सह्वुहू अन अफ़्विका
और जिनकी ग़फ़लत ने उन्हें तेरी माफ़ी से महरूम कर दिया
إِلٰهِي هَبْ لي كَمَالَ ٱلاِنْقِطَاعِ إِلَيْكَ
इलाही हब ली कमालल इनक़िताअि इलैक
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे अपनी तरफ़ पूरी तरह कट जाने की नेमत अता कर
وَأَنِرْ أَبْصَارَ قُلُوبِنَا بِضِيَاءِ نَظَرِهَا إِلَيْكَ
व अनिर अब्सार क़ुलूबिना बिज़ियाइ नज़रिहा इलैक
और हमारे दिलों की आँखों को अपनी तरफ़ देखने की रौशनी से मुनव्वर कर
حَتَّىٰ تَخْرِقَ أَبْصَارُ ٱلْقُلُوبِ حُجُبَ ٱلنُّورِ
हत्ता तख़रिक़ अब्सारुल क़ुलूबि हुजुबन नूर
यहाँ तक कि दिलों की नज़रें नूर के पर्दों को चीर दें
فَتَصِلَ إِلَىٰ مَعْدِنِ ٱلْعَظَمَةِ
फ़तसिला इला मअदिनिल अज़मत
और अज़मत के सरचश्मे तक पहुँच जाएँ
وَتَصِيرَ أَرْوَاحُنَا مُعَلَّقَةً بِعِزِّ قُدْسِكَ
व तसीर अरवाहुना मुअल्लक़तन बिअिज़्ज़ि क़ुद्सिका
और हमारी रूहें तेरी पाक इज़्ज़त से जुड़ जाएँ
إِلٰهِي وَٱجْعَلْنِي مِمَّنْ نَادَيْتَهُ فَأَجَابَكَ
इलाही वजअल्नी मिम्मन नादैतहू फ़-अजाबक
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे उन लोगों में शामिल कर जिन्हें तूने पुकारा और उन्होंने जवाब दिया
وَلاحَظْتَهُ فَصَعِقَ لِجَلالِكَ
व लाहज़्तहू फ़-सअिक़ा लिजलालिका
और जिन पर तूने नज़र डाली तो वे तेरी जलालत से बेख़ुद हो गए
فَنَاجَيْتَهُ سِرّاً وَعَمِلَ لَكَ جَهْراً
फ़नाजैतहू सिर्रन व अमिला लका जह्रन
फिर तूने उनसे चुपके से बात की और उन्होंने खुले तौर पर तेरे लिए अमल किया
إِلٰهِي لَمْ أُسَلِّطْ عَلَىٰ حُسْنِ ظَنِّي قُنُوطَ ٱلأَيَاسِ
इलाही लम उसल्लित अला हुस्नि ज़न्नी क़ुनूतल अयास
ऐ मेरे ख़ुदा! मेरी अच्छी उम्मीद पर मायूसी को ग़ालिब न होने देना
وَلاَ ٱنْقَطَعَ رَجَائِي مِنْ جَمِيلِ كَرَمِكَ
व ला इनक़ता रजाई मिन जमीलि करमिका
और मेरी आस को अपनी खूबसूरत सख़ावत से क़तअ न करना
إِلٰهِي إِنْ كَانَتِ ٱلْخَطَايَا قَدْ أَسْقَطَتْنِي لَدَيْكَ
इलाही इन कानतिल ख़ताया क़द अस्क़ततनी लदैका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर मेरे गुनाहों ने मुझे तेरी नज़र में गिरा दिया है
فَٱصْفَحْ عَنِّي بِحُسْنِ تَوَكُّلِي عَلَيْكَ
फ़सफ़ह अन्नी बिहुस्नि तवक्कुली अलैक
तो मेरे तुझ पर अच्छे भरोसे के सदक़े मुझे माफ़ फ़रमा
إِلٰهِي إِنْ حَطَّتْنِيَ ٱلذُّنُوبُ مِنْ مَكَارِمِ لُطْفِكَ
इलाही इन हट्टतनी अज़्ज़ुनूबु मिन मकारिमि लुत्फ़िका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर मेरे गुनाहों ने मुझे तेरे लुत्फ़ की बुलंदियों से गिरा दिया है
فَقَدْ نَبَّهَنِي ٱلْيَقِينُ إِلَىٰ كَرَمِ عَطْفِكَ
फ़क़द नब्बहनी अलयक़ीनु इला करमि अत्फ़िका
तो मेरा यक़ीन मुझे तेरी मेहरबानी और करम की तरफ़ मुतवज्जेह करता है
إِلٰهِي إِنْ أَنَامَتْنِيَ ٱلْغَفْلَةُ عَنِ ٱلإِسْتِعْدَادِ لِلِقَائِكَ
इलाही इन अनामतनी अल-ग़फ़लतु अनिल इस्तिअदादि लिलिक़ाइका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर ग़फ़लत ने मुझे तुझसे मिलने की तैयारी से सुस्त कर दिया है
فَقَدْ نَبَّهَتْنِي ٱلْمَعْرِفَةُ بِكَرَمِ آلاَئِكَ
फ़क़द नब्बहतनी अल-मआरिफ़तु बिकरमि आलाइका
तो तेरी नेमतों की पहचान ने मुझे जगा दिया है
إِلٰهِي إِنْ دَعَانِي إِلَىٰ ٱلنَّارِ عَظِيمُ عِقَابِكَ
इलाही इन दआनी इला अन्नारि अज़ीमु इक़ाबिका
ऐ मेरे ख़ुदा! अगर तेरी सख़्त सज़ा मुझे जहन्नम की तरफ़ बुलाए
فَقَدْ دَعَانِي إِلَىٰ ٱلْجَنَّةِ جَزِيلُ ثَوَابِكَ
फ़क़द दआनी इला अल-जन्नति जज़ीलु सवाबिका
तो तेरे बड़े अज्र ने मुझे जन्नत की तरफ़ बुलाया है
إِلٰهِي فَلَكَ أَسْأَلُ وَإِلَيْكَ أَبْتَهِلُ وَأَرْغَبُ
इलाही फ़लक अस्अलु व इलैक अब्तहिलु व अरग़बु
ऐ मेरे ख़ुदा! मैं तुझी से माँगता हूँ, तुझी से गिड़गिड़ाता हूँ और तुझी की तरफ़ राग़िब हूँ
وَأَسْأَلُكَ أَنْ تُصَلِّيَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِ مُحَمَّدٍ
व अस्अलुका अन तुसल्लिया अला मुहम्मदिन व आले मुहम्मद
और तुझसे दरख़्वास्त करता हूँ कि मुहम्मद (स.) और आले-मुहम्मद (अ.) पर रहमतें नाज़िल फ़रमा
وَأَنْ تَجْعَلَنِي مِمَّنْ يُدِيمُ ذِكْرَكَ
व अन तजअलनी मिम्मन युदीमु ज़िक्रका
और मुझे उन लोगों में शामिल कर जो हमेशा तेरा ज़िक्र करते रहते हैं
व ला यनक़ुज़ु अह्दका
और जो तुझसे किया हुआ अहद नहीं तोड़ते
وَلاَ يَغْفُلُ عَنْ شُكْرِكَ
व ला यग़फ़ुलु अन शुक्रिका
और तेरे शुक्र से ग़ाफ़िल नहीं होते
وَلاَ يَسْتَخِفُّ بِأَمْرِكَ
व ला यस्तख़िफ़ु बि-अम्रिका
और तेरे हुक्म को हल्का नहीं समझते
إِلٰهِي وَأَلْحِقْنِي بِنُورِ عِزِّكَ ٱلأَبْهَجِ
इलाही व अल्हिक़नी बिनूरी इज़्ज़िका अल-अबहजि
ऐ मेरे ख़ुदा! मुझे अपनी इज़्ज़त के सबसे रौशन नूर में शामिल कर दे
फ़अकूना लका आरिफ़न
ताकि मैं तुझे सही तौर पर पहचान सकूँ
وَعَنْ سِوَاكَ مُنْحَرِفاً
व अन सिवाका मुनहरिफ़न
और तेरे सिवा हर चीज़ से मुँह मोड़ लूँ
وَمِنْكَ خَائِفاً مُرَاقِباً
व मिंका ख़ाइफ़न मुराक़िबन
और तुझसे डरने वाला और तेरा ख़याल रखने वाला बन जाऊँ
يَا ذَا ٱلْجَلاَلِ وَٱلإِكْرَامِ
या ज़ल जलालि वल-इकराम
ऐ जलाल और इकराम वाले परवरदिगार!
وَصَلَّىٰ ٱللَّهُ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ رَسُولِهِ وَآلِهِ ٱلطَّاهِرِينَ
व सल्लल्लाहु अला मुहम्मदिन रसूलिही व आलिही अत-ताहिरीन
और अल्लाह मुहम्मद (स.), अपने रसूल, और उनकी पाक आले पर दुरूद भेजे
وَسَلَّمَ تَسْلِيماً كَثِيراً
व सल्लमा तसलीमन कसीरन
और उन पर बहुत ज़्यादा सलाम नाज़िल फ़रमाए