महीने का पहला दिन और चाँद देखने की दुआ
दुआ 124, 29/30 चाँद देखने की दुआ — सहिफ़ा अलाविया से, इमाम अली (अ.) द्वारा



महीने के पहले दिन की दुआ 124 — सहिफ़ा अलाविया से
اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَ الْاَرْضَ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी ख़लक़स्समावाती वल-अर्ज़
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया

، وَ جَعَلَ الظُّلُمَاتِ وَ النُّورَ
व जअलज़्-ज़ुलुमाति वन्नूर
और अंधेरों और उजाले को क़ायम किया

ثُمَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ
सुम्मल्लज़ीना कफ़रू बिरब्बिहिम यअदिलून
फिर भी काफ़िर लोग अपने रब के साथ दूसरों को बराबर ठहराते हैं

هُوَ الَّذي خَلَقَكُمْ مِنْ طِيْنٍ ثُمَّ قَضٰى اَجَلاً
हुवल्लज़ी ख़लक़कुम मिन त़ीनिन सुम्मा क़ज़ा अजला
वही है जिसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर एक मुद्दत मुक़र्रर फ़रमाई

وَ اَجَلٌ مُسَمَّى عِنْدَهُ ثُمَّ اَنْتُمْ تَمْتَرُوْنَ
व अजल्लुम मुसम्मा इन्दहू सुम्मा अन्तुम तम्तरून
और एक तयशुदा मुद्दत उसी के पास है, फिर भी तुम शक करते हो

وَ هُوَ اللهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَ فِي الْاَرْضِ يَعْلَمُ سِرَّكُمْ وَ جَهْرَكُمْ وَ يَعْلَمُ ما تَكْسِبُونَ
व हुवल्लाहु फ़िस्समावाति व फ़िल-अर्ज़ यअलमु सिर्रकुम व जह्रकुम व यअलमु मा तक्सिबून
वही अल्लाह है जो आसमानों और ज़मीन में है, तुम्हारे छुपे और ज़ाहिर सब जानता है और तुम्हारे आमाल को भी जानता है

وَ الْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ نَجَّانَا مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِيْنَ
वल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी नज्जाना मिनल-क़ौमिज़-ज़ालिमीन
और सारी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें ज़ालिम लोगों से निजात दी

وَ الْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ فَضَّلَنَا عَلٰى كَثِيْرٍ مِنْ عِبَادِهِ الْمُؤْمِنِيْنَ
वल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी फ़ज़्ज़लना अला कसीरिम मिन इबादिहिल-मोमिनीन
और सारी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें अपने बहुत से मोमिन बंदों पर फ़ज़ीलत दी

وَ الْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ وَهَبَ لِيْ عَلَى الْكِبَرِ اِسْمَاعِيْلَ وَ اِسْحَاقَ اِنَّ رَبّيِ لَسَمِيْعُ الدُّعَاءِ
वल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी वहबा ली अलल-किबरि इस्माईल व इस्हाक़ इन्ना रब्बी लसमीउद-दुआ
और सारी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने बुढ़ापे में मुझे इस्माईल और इस्हाक़ अता किए, बेशक मेरा रब दुआ सुनने वाला है

رَبِّ اجْعَلْنِيْ مُقِيْمَ الصَّلاةِ وَ مِنْ ذُرِّيَّتِيْ رَبَّنَا وَ تَقَبَّلْ دُعاءِ
रब्बिज्-जअल्नी मुक़ीमस्सलाति व मिन ज़ुर्रियती रब्बना व तक़ब्बल दुआई
ऐ मेरे रब! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना और मेरी औलाद में से भी, ऐ हमारे रब! मेरी दुआ क़ुबूल फ़रमा

رَبَّنَا اغْفِرْلِيْ وَ لِوَالِدَيَّ وَ لِلْمُؤْمِنِيْنَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسابُ
रब्बनग़्फ़िर ली व लिवालिदय्य व लिल-मोमिनीन यौमा यक़ूमुल-हिसाब
ऐ हमारे रब! मुझे, मेरे माँ-बाप को और तमाम मोमिनों को उस दिन बख़्श देना जब हिसाब क़ायम होगा

فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَ رَبِّ الْاَرْضِ رَبِّ الْعالَمينَ
फ़लिल्लाहिल्हम्दु रब्बिस्समावाति व रब्बिल-अर्ज़ि रब्बिल-आलमीन
तो तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं जो आसमानों और ज़मीन का और सारे जहानों का रब है

وَ لَهُ الْكِبْرِيَاءُ فِي السَّمَاوَاتِ وَ الْاَرْضِ وَ هُوَ الْعَزيزُ الْحَكيمُ
व लहुल-किब्रियाऊ फ़िस्समावाति वल-अर्ज़ि व हुवल-अज़ीज़ुल-हकीम
और उसी के लिए आसमानों और ज़मीन में बड़ाई है, और वही ग़ालिब और हिकमत वाला है

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَ مَا فِي الْاَرْضِ وَ لَهُ الْحَمْدُ فِي الْاَخِرَةِ وَ هُوَ الْحَكِيْمُ الْخَبِيْرُ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी लहू मा फ़िस्समावाति व मा फ़िल-अर्ज़ि व लहुल-हम्दु फ़िल-आख़िरह व हुवल-हकीमुल-ख़बीर
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसकी मिल्कियत में आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ है, और आख़िरत में भी उसी की तारीफ़ है, और वही हिकमत वाला और ख़बर रखने वाला है

يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْاَرْضِ وَ مَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَ مَا يَنْزِلُ مِنَ السَّمَاءِ وَ مَا يَعْرُجُ فِيْهَا وَ هُوَ الرَّحِيْمُ الْغَفُورُ
यअलमु मा यलिजु फ़िल-अर्ज़ि व मा यख़रुजु मिन्हा व मा यनज़िलु मिनस्समा व मा यअरुजु फीहा व हुवर-रहीमुल-ग़फ़ूर
वह जानता है जो कुछ ज़मीन में दाख़िल होता है और जो उससे निकलता है, और जो आसमान से उतरता है और जो उसमें चढ़ता है, और वही बहुत रहम करने वाला, बहुत बख़्शने वाला है

اَلْحَمْدُ لِلهِ فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَ الْاَرْضِ جَاعِلِ الْمَلاَئِكَةِ رُسُلاً اُولِيْ اَجْنِحَةٍ مَثْنٰى وَ ثُلاثَ وَ رُبَاعَ يَزِ يْدُ فِي الْخَلْقِ مَا يَشَاءُ اِنَّ اللهَ عَلٰى كُلِّ شَيْ ءٍ قَدِيْرٌ
अल्हम्दु लिल्लाहि फ़ातिरिस्समावाति वल-अर्ज़ि जाइलिल-मलाइकटि रुुसुलन ऊली अज्निहतिम मस्ना व सुलासा व रुबाअ यज़ीदु फ़िल-ख़ल्क़ि मा यशाऊ इन्नल्लाहा अला कुल्लि शैइन् क़दीर
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जो आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला है, जिसने फ़रिश्तों को रसूल बनाया जिनके दो, तीन और चार पर हैं, वह अपनी मख़लूक़ में जो चाहता है बढ़ा देता है, बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है

مَا يَفْتَحِ اللهُ للِنَّاسِ مِنْ رَحْمَةٍ فَلاَ मُمْسِكَ لَهَا وَ مَا يُمْسِكْ فَلا مُرْسِلَ لَهُ مِنْ بَعْدِهِ وَ هُوَ الْعَزيزُ الْحَكِيْمُ
मा यफ़्तहिल्लाहु लिन्नासि मिन रहमतिन फ़ला मुम्सिका लहा व मा युम्सिक् फ़ला मुर्सिला लहू मिम बअ्दिही व हुवल-अज़ीज़ुल-हकीम
अल्लाह लोगों के लिए जो रहमत खोल दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे वह रोक ले उसे उसके बाद कोई भेजने वाला नहीं, और वही ग़ालिब और हिकमत वाला है

يَا اَيُّهَا النَّاسُ اذْكُرُوْا نِعْمَتَ اللهِ عَلَيْكُمْ هَلْ مِنْ خَالِقٍ غَيْرُ اللهِ يَرْزُقُكُمْ مِنَ السَّمَاءِ وَ الْاَرْضِ لاَ اِلَهَ اِلاَّ هُو فَاَنِّى تُؤْفَكُوْنَ
या अय्युहन्नासु उज़्कुरू निअमतल्लाहि अलैकुम हल मिन ख़ालिक़िन ग़ैरुल्लाहि यरज़ुकुकुम मिनस्समा वल-अर्ज़ ला इलाहा इल्ला हुवा फ़अन्ना तुअफ़कून
ऐ लोगो! अल्लाह की नेमत को याद करो जो उसने तुम पर की है, क्या अल्लाह के सिवा कोई और ख़ालिक़ है जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रोज़ी देता हो? उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम किधर भटकाए जा रहे हो

اَلْحَمْدُ لِلهِ رَبِّ الْعَالَمِيْنَ الْحَىِّ الَّذِيْ لايَمُوتُ
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन अल-हय्यिल्लज़ी ला यमूत
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जो सारे जहानों का रब है, वही ज़िंदा है जिसे मौत नहीं

وَ الْقَائِمِ الَّذِيْ لا يَتَغَيَّرُ
वल-क़ाइमिल्लज़ी ला यतग़य्यर
और वही क़ायम रहने वाला है जो बदलता नहीं

وَ الدَّائِمِ الَّذِيْ لا يَفْنٰى
वद्दाइमिल्लज़ी ला यफ़ना
और वही हमेशा रहने वाला है जो फ़ना नहीं होता

وَ الْمَلِكِ الَّذِيْ لا يَزُوْلُ
वल-मलिकिल्लज़ी ला यज़ूल
और वही बादशाह है जो कभी ज़ाएल नहीं होता

وَ الْعَدْلِ الَّذِيْ لا يَغْفُلُ
वल-अदलिल्लज़ी ला यग़फ़ुल
और वही इंसाफ़ करने वाला है जो ग़ाफ़िल नहीं होता

وَ الْحَكَمِ الَّذِيْ لا يَحِيْفُ
वल-हकमिल्लज़ी ला यहींफ़
और वही फ़ैसला करने वाला है जो ज़ुल्म नहीं करता

وَ اللَّطِيْفِ الَّذِيْ لا يَخْفٰى عَلَيْهِ شَيْ ءٌ
वल-लतीफ़िल्लज़ी ला यख़फ़ा अलैहि शैइउन
और वही बारीक देखने वाला है जिससे कोई चीज़ छुपी नहीं रहती

وَ الْوَاسِعِ الَّذِيْ لا يُعْجِزُهُ شَيْ ءٌ
वल-वासीइल्लज़ी ला युइजिज़ुहू शैइउन
और वही वसीअ है जिसे कोई चीज़ आज़िज़ नहीं कर सकती

وَ الْمُعْطِيْ مَا يَشَاءُ لِمَنْ يَشَاءُ
वल-मुअती मा यशाऊ लिमन यशाऊ
और वही देने वाला है जो जिसे चाहता है जो चाहता है अता करता है

وَ الْاَوَّلِ الَّذِيْ لا يُسْبَقُ
वल-अव्वलिल्लज़ी ला युस्बक़
और वही अव्वल है जिसे कोई पहले नहीं कर सकता

وَ الْاَخِرِ الَّذِيْ لايُدْرَكُ
वल-आख़िरिल्लज़ी ला युद्रक
और वही आख़िर है जिसे कोई पा नहीं सकता

وَ الظَّاهِرِ الَّذِيْ لَيْسَ فَوْقَهُ شَيْ ءٌ
वज़्-ज़ाहिरिल्लज़ी लैस फ़व्क़हू शैउन्
और वही ज़ाहिर है जिसके ऊपर कुछ भी नहीं

وَ الْبَاطِنِ الَّذِيْ لَيْسَ دُوْنَهُ شَيْ ءٌ
वल-बातिनिल्लज़ी लैस दूनहू शैउन्
और वही बातिन है जिसके नीचे कुछ भी नहीं

وَ اَحاطَ بِكُلِّ شَيْ ءٍ عِلْماً
वा अहाता बिकुल्लि शैइन इल्मन
और वह हर चीज़ को अपने इल्म से घेरने वाला है

وَ اَحْصى كُلَّ شَيْ ءٍ عَدَداً
वा अह्सा कुल्ला शैइन अददा
और उसने हर चीज़ को गिनती में समेट रखा है

اَللَّهُمَ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَ الِهِ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व आलेहि
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा

وَ اَنْطِقْ بِدُعَائِكَ لِسَانِيْ، وَ اَنْجِحْ بِهِ طَلِبَتِيْ
वा अन्तिक बिदुआइका लिसानी वा अन्जिह् बिही तलबती
और मेरी ज़बान को अपनी दुआ से बोलने वाला बना, और इसी के ज़रिये मेरी मुराद पूरी फ़रमा

وَ اَعْطِنِيْ بِهِ حَاجَتِيْ، وَ بَلِّغْنِيْ فِيْهِ اَمَلِيْ
वा अअतिनी बिही हाजती वा बल्लिग़नी फीहि अमली
और इसी के ज़रिये मेरी हाजत अता फ़रमा, और मेरी उम्मीद मुझे पहुँचा दे

وَ قِني بِهِ رَهْبَتِيْ، وَ اَسْبِغْ بِهِ نَعْمَائي
वा क़िनी बिही रहबती वा अस्बिग़ बिही नअमाई
और इसी के ज़रिये मुझे मेरे डर से महफ़ूज़ रख, और अपनी नेमतें मुझ पर पूरी कर दे

وَ اسْتَجِبْ بِهِ دُعَائي، وَ زَكِّ بِهِ عَمَلِيْ
वस्तजिब बिही दुआई वा ज़क्कि बिही अमली
और इसी के ज़रिये मेरी दुआ क़बूल फ़रमा, और मेरे अमल को पाक कर दे

تَزْكِيَةً تَرْحَمُ بِهَا تَضَرُّعِيْ وَ شَكْوَاىَ
तज़्कियतन् तरहमु बिहा तज़र्रुई व शक्वाय
ऐसी पाकीज़गी जिससे तू मेरी आज़िज़ी और मेरी फ़रियाद पर रहम फ़रमाए

وَ اَسْأَلُكَ اَنْ تَرْحَمَنِيْ وَ اَنْ تَرْضِىْ عَنّي
वा असअलुका अन तरहमनी वा अन तरज़ा अन्नी
और मैं तुझसे सवाल करता हूँ कि मुझ पर रहम फ़रमा और मुझसे राज़ी हो जा

وَ تَسْتَجِيْبَ لي، اٰمِيْنَ رَبَّ الْعَالَمِيْنَ
वा तस्तजीबा ली आमीन रब्बल आलमीन
और मेरी दुआ क़बूल फ़रमा, आमीन, ऐ सारे जहानों के रब

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ يُنْشِي ءُ السَّحَابَ الثِّقَالَ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी युन्शिउस्सहाबस्सिक़ाल
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जो भारी बादलों को उठाता है

وَ يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَ الْمَلائِكَةُ مِنْ خِيْفَتِهِ، وَ يُرْسِلُ الصَّواعِقَ فَيُصيبُ بِها مَنْ يَشاءُ وَ هُمْ يُجادِلُونَ فِي اللهِ وَ هُوَ شَدِيْدُ الْمِحَالِ
वा युसब्बिहुर-रअ्दु बिहम्दिही वल-मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिही वा युर्सिलुस्सवाइक़ फ़युसीबु बिहा मन यशाऊ
और गरज उसकी तारीफ़ के साथ तस्बीह करती है, और फ़रिश्ते उसके ख़ौफ़ से, और वह बिजली भेजता है जिससे जिसे चाहता है पकड़ लेता है, और लोग अल्लाह के बारे में झगड़ते हैं जबकि वह सख़्त पकड़ वाला है

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ لَهُ دَعْوَةُ الْحَقِّ وَ هُوَ الْحَقُّ الْمُبِيْنُ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी लहू दावतुल-हक़्क़ व हुवल-हक़्क़ुल-मुबीन
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसकी पुकार सच्ची है, और वही खुला हुआ हक़ है

وَ مَا يُدْعي مِنْ دُونِهِ فَهُوَ الْباطِلُ وَ هُوَ الْعَلِي الْكَبِيْرُ
वा मा युदआ मिन दूनिही फ़हुवल-बातिल व हुवल-अलिय्युल-कबीर
और उसके सिवा जिसे पुकारा जाता है वह बातिल है, और वही बुलंद और बहुत बड़ा है

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذِيْ يَتَوَفَّى الْاَنْفُسَ حِيْنَ مَوْتِهَا وَ الَّتِيْ لَمْ تَمُتْ في مَنَامِهَا فَيُمْسِكُ الَّتِيْ قَضٰى عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَ يُرْسِلُ الْأُخْرٰى اِلٰى اَجَلٍ مُسَمًّى، اِنَّ في ذٰلِكَ لَاٰيٰاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी यतवफ़्फ़ल-अन्फ़ुस हीन मवतिहा वल-लती लम तमुत फी मनामिहा
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जो मौत के वक़्त जानों को क़ब्ज़ करता है और नींद में भी जिन्हें मौत नहीं आई, फिर जिन्हें मौत का फ़ैसला होता है उन्हें रोक लेता है और बाक़ियों को एक तयशुदा वक़्त तक लौटा देता है, बेशक इसमें सोचने वालों के लिए निशानियाँ हैं

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذي وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّماواتِ وَ الْاَرْضِ وَ لا يَؤُدُهُ حِفْظُهُما وَ هُوَ الْعَلِيُّ الْعَظيمُ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी वसिअ कुर्सिय्युहुस्समावाति वल-अर्ज़
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर फैली है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं, और वही बुलंद और अज़ीम है

اَلْحَمْدُ لِلهِ عالِمِ الْغَيْبِ وَ الشَّهادَةِ هُوَ الرَّحْمنُ الرَّحيمُ
अल्हम्दु लिल्लाहि आलिमिल-ग़ैबि वश्शहादह हुवर-रहमानुर-रहीम
तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जो छुपे और ज़ाहिर सब को जानने वाला है, वही बहुत मेहरबान, बहुत रहम करने वाला है

، هُوَ اللهُ الَّذي لا اِلهَ إلاَّ هُوَ الْمَلِكُ الْقُدُّوسُ السَّلامُ الْمُؤْمِنُ الْمُهَيْمِنُ الْعَزِيزُ الْجَّبارُ الْمُتَكَبِّرُ ،سُبْحانَ اللهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
हुवल्लाहुल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हू, अल-मलिकुल-क़ुद्दूसुस्सलामुल-मोमिनुल-मुहैमिनुल-अज़ीज़ुल-जब्बारुल-मुतकब्बिर, सुब्हानल्लाहि अम्मा युश्रिकून
वही अल्लाह है, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं; बादशाह, बहुत पाक, सलामती देने वाला, अमन देने वाला, निगरानी करने वाला, ग़ालिब, ज़बरदस्त, बुज़ुर्गी वाला; अल्लाह पाक है उन चीज़ों से जिन्हें ये लोग उसका शरीक ठहराते हैं

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذي لا اِلهِ إِلاَّ هُوَ الْخالِقُ الْبارى ءُ الْمُصَوِّرُ، لَهُ الْاَسْماءُ الْحُسْنٰى يُسَبِّحُ لَهُ ما فِي السَّماواتِ وَ الْاَرْضِ وَ هُوَ الْعَزيزُ الْحَكيمُ
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल-ख़ालिकुल-बारिउल-मुसव्विर, लहुल-अस्माउल-हुस्ना, युसब्बिहु लहू मा फिस्समावाति वल-अर्ज़, व हुवल-अज़ीज़ुल-हकीम
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं; वही पैदा करने वाला, बनाने वाला, सूरत देने वाला है; उसी के लिए अच्छे नाम हैं; जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है सब उसकी तस्बीह करता है; और वही ग़ालिब, हिकमत वाला है

اَلْحَمْدُ لِلهِ الَّذي لَمْ يَتَّخِذْ صاحِبَةً وَ لا وَلَداً وَ لَمْ يَكُنْ لَهُ شَريكٌ فِي الْمُلْكِ وَ لَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيٌّ مِنَ الذُّلِّ وَ كَبِّرْهُ تَكْبيراً
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी लम यत्तख़िज़ साहिबतन व ला वलदन, व लम यकुल लहू शरीकुन फिल-मुल्कि, व लम यकुल लहू वलिय्युम मिनज़्-ज़ुल्लि, व कब्बिरहु तक्बीरा
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने न कोई बीवी बनाई और न बेटा, और न बादशाही में उसका कोई साझी है, और न बेबसी की वजह से कोई मददगार; और उसकी बड़ाई बयान करो, खूब बड़ाई





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चाँद देखने की दुआ 29
دعاؤه عند رؤية الهلال
قال عليه السلام: اذا رأيت الهلال فلا تبرح و قل:
اَللَّهُمَّ اِنّي اَسْأَلُكَ خَيْرَ هذَا الشَّهْرِ، وَ نُورَهُ وَ نَصْرَهُ وَ بَرَكَتَهُ وَ طَهُورَهُ وَ رِزْقَهُ، وَ اَسْأَلُكَ خَيْرَ ما فيهِ وَ خَيْرَ ما بَعْدَهُ، وَ اَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ ما فيهِ وَ شَرِّ ما بَعْدَهُ.
اَللَّهُمَّ اَدْخِلْهُ عَلَيْنا بِالْاَمْنِ وَ الْايمانِ، وَ السَّلامَةِ وَ الْاِسْلامِ، وَ الْبَرَكَةِ وَ التَّقْوى، وَ التَّوْفيقِ لِما تُحِبُّ وَ تَرْضى.
अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है। ऐ अल्लाह! मैं इस महीने में तुझ से भलाई, कामयाबी, हिफ़ाज़त और रोज़ी में कुशादगी चाहता हूँ, और अगले महीने की तमाम भलाई का सवाल करता हूँ। इस महीने और अगले महीने में मुझे हर तरह की आफ़तों से अमन अता फ़रमा। ऐ अल्लाह! इस महीने को मेरे लिए अमन वाला बना, जिसमें हिफ़ाज़त और ज़्यादा परहेज़गारी हो, और मुझे ऐसे आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमा जिनसे तू मुझ से राज़ी हो जाए।
 
चाँद देखने की दुआ 30

اَيُّهَا الْخَلْقُ الْمُطيعُ الدَّائِبُ السَّريعُ، الْمُتَرَدِّدُ في فَلَكِ التَّدْبيرِ، اَلْمُتَصَرِّفُ في مَنازِلِ التَّقْديرِ، امَنْتُ بِمَنْ نَوَّرَ بِكَ الظُّلُمَ، وَ اَضاءَ بِكَ الْبُهَمَ، وَ جَعَلَكَ ايَةً مِنْ اياتِ سُلْطانِهِ، وَ امْتَهَنَكَ بِالزِّيادَةِ وَ النُّقْصانِ، وَ الطُّلُوعِ وَ الْاُفُولِ، وَ الْاِنارَةِ وَ الْكُسُوفِ، في كُلِّ ذلِكَ اَنْتَ لَهُ مُطيعٌ، وَ اِلى اِرادَتِهِ سَريعٌ.
سُبْحانَهُ ما اَحْسَنَ ما دَبَّرَ، وَ اَتْقَنَ ما صَنَعَ في مُلْكِهِ، وَ جَعَلَكَ اللَّهُ هِلالَ شَهْرٍ حادِثٍ لِاَمْرٍ حادِثٍ، جَعَلَكَ اللَّهُ هِلالَ اَمْنٍ وَ ايمانٍ وَ سَلامَةٍ وَ اِسْلامٍ، هِلالَ اَمَنَةٍ مِنَ الْعاهاتِ وَ سَلامَةٍ مِنَ السَّيِّئاتِ.
اَللَّهُمَّ اجْعَلْنا اَهْدى مَنْ طَلَعَ عَلَيْهِ، وَ اَزْكى مَنْ نَظَرَ اِلَيْهِ، وَ صَلَّى اللَّهُ عَلى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ وَ الِهِ، اَللَّهُمَّ افْعَلْ بي كَذا وَ كَذا يا اَرْحَمَ الرَّاحِمينَ.

अल्लाह के नाम से जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है।
ऐ वह ज़ात जो हमेशा इताअत में मशग़ूल है, जो तक़दीर को चलाने वाला है, आमाल की बुलंदियों तक पहुँचाने वाला है, और दिलों के भेद जानने वाला है। मुझे उस ज़ात पर ईमान है जिसने तेरी मदद से अँधेरों को रौशनी में बदला, और तारीकियों को उजाला बख़्शा, तेरी क़ुदरत को अपनी निशानियों में से क़रार दिया, और तुझे बढ़ने, घटने, छुपने, डूबने, चमकने और ग्रहण के ज़रिये आज़माया।
इन तमाम हालात में तू अल्लाह का फ़रमाबरदार रहा और उसके हुक्मों की पूरी तरह पैरवी करता रहा। अल्लाह कितना पाक है, और उसने तेरे लिए कितने हैरत-अंगेज़ क़ानून बनाए। उसने कितनी हिकमत से तख़लीक़ की और तुझे हर नए महीने के लिए चाँद मुक़र्रर किया। अल्लाह तुझे अमन, ईमान और सुकून वाले चाँदों में से बनाए। ऐसा चाँद जिसमें गुमराही से हिफ़ाज़त और बुराइयों से बचाव हो।
ऐ अल्लाह! मुझे उन सब में सबसे ज़्यादा हिदायत पाने वाला बना जिन पर यह चमका। और इसे देखने वालों में सबसे ज़्यादा परहेज़गार बना। और अल्लाह की रहमतें हों मुहम्मद और उनकी आल पर (यहाँ अपनी हाजतें माँगें) और फिर कहें: ऐ सब से बढ़ कर रहम करने वाले।


चाँद देखने की एक और दुआ
اَللَّهُمَّ اِنَّ النَّاسَ اِذا نَظَرُوا اِلَى الْهِلالِ نَظَرَ بَعْضُهُمْ في وُجُوهِ بَعْضٍ، وَ رَجا بَعْضُهُمْ بَرَكَةَ بَعْضٍ.
اَللَّهُمَّ اِنّي اَنْظُرُ اِلى وَجْهِكَ جَلَّ ثَناؤُكَ، وَ وَجْهِ نَبِيِّكَ، وَ وَجْهِ اَوْلِيائِكَ أَهْلِ بَيْتِ نَبِيِّكَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِمْ، فَصَلِّ عَلى مُحَمَّدٍ وَ الِ مُحَمَّدٍ وَ اَعْطِني ما اُحِبُّ اَنْ تُعْطِيَنيهِ فِي الدُّنْيا وَ الْاخِرَةِ، وَ اصْرِفْ عَنّي ما اُحِبُّ اَنْ تَصْرِفَهُ عَنّي فِي الدُّنْيا وَ الْاخِرَةِ، وَ اَحْيِنا عَلى طاعَتِكَ وَ طاعَةِ اَوْلِيائِكَ وَ طاعَةِ وَلِيِّكَ صَلَواتُكَ وَ رَحْمَتُكَ عَلَيْهِمْ وَ التَّسْليمِ لِأَمْرِكَ، وَ تَوَفَّنا عَلَيْهِ وَ لا تَسْلُبْناهُ، وَ تَفَضَّلْ عَلَيْنا فيهِ بِرَحْمَتِكَ.
ثمّ تقول:
ما شاءَ اللَّهُ، لا حَوْلَ وَ لا قُوَّةَ اِلاَّ بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظيمِ - عشراً، اَللَّهُمَّ صلَّ عَلى مُحَمَّدٍ وَ الِ مُحَمَّدٍ - عشراً.
ثم كان يولّيه ظهره و يقول:
رَبّي وَ رَبُّكَ اللَّهُ رَبُّ الْعالَمينَ، اَللَّهُمَّ ثَبِّتْنا عَلَى السَّلامِ وَ الْاِسْلامِ، وَ الْأَمْنِ وَ الْايمانِ، وَ دَفْعِ الْاَسْقامِ، وَ الْمُسارَعَةِ فيما تُحِبُّ وَ تَرْضى مِنْ طاعَتِنا لَكَ.


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