माह-ए-रजब

माह-ए-रजब में तारीख़वार नमाज़ें

जैसा कि किताब इक़बालुल आमाल में रिवायत किया गया है

1 2 3 4 5 6 7
8 9 10 11 12 13 14
15 16 17 18 19 20 21
22 23 24 25 26 27 28
29 30
रजब की दूसरी रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की दूसरी रात 10 (5×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और एक बार सूरह काफ़िरून पढ़े, अल्लाह उसके छोटे-बड़े तमाम गुनाह माफ़ फ़रमा देता है और अगले साल तक उसका नाम नमाज़ अदा करने वालों में लिख देता है।

रजब की तीसरी रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की तीसरी रात 10 (5×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और पाँच बार सूरह नसर पढ़े, अल्लाह उसके लिए जन्नत में एक महल बनाएगा जिसकी लंबाई और चौड़ाई दुनिया से सात गुना होगी।

रजब का तीसरा दिन – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब के तीसरे दिन 4 (2×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह बक़रह आयत 163 से 165 पढ़े, अल्लाह उसे ऐसा अज़ीम सवाब अता करेगा जिसे बयान नहीं किया जा सकता।

रजब की चौथी रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की चौथी रात 100 (50×2) रकअत नमाज़ अदा करे, पहली रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह फ़लक़ और दूसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह नास पढ़े, क़ियामत तक फ़रिश्ते उसका सवाब लिखते रहेंगे। क़ियामत के दिन उसका चेहरा चाँद की तरह रोशन होगा और उसका आमालनामा दाहिने हाथ में दिया जाएगा।

रजब की पाँचवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की पाँचवीं रात 6 (3×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद 25 बार सूरह इख़्लास पढ़े, अल्लाह उसे 40 नबियों, 40 सिद्दीक़ों और 40 शहीदों का सवाब अता करेगा और वह सिरात से बिजली की तरह गुज़रेगा।

रजब की छठी रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की छठी रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और सात बार आयतुल कुर्सी पढ़े, आसमान से आवाज़ आएगी: ऐ अल्लाह के बंदे! तू अल्लाह का सच्चा दोस्त है। हर हरफ़ के बदले उसे सत्तर हज़ार नेकियाँ दी जाएँगी।

रजब की सातवीं रात नबी-ए-अकरम ﷺ फ़रमाते हैं: जो शख़्स रजब की सातवीं रात 4 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह हम्द के बाद तीन बार सूरह तौहीद, एक बार सूरह फ़लक़ और एक बार सूरह नास पढ़े, नमाज़ के बाद सलवात और दस बार तस्बीहाते अरबा पढ़े, अल्लाह उसे अर्श के साए में जगह देगा, रमज़ान के रोज़ेदार का सवाब देगा और मौत व क़ब्र की सख़्ती से बचाएगा।

रजब की आठवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की आठवीं रात 20 (10×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह तौहीद, काफ़िरून और फ़लक़ तीन-तीन बार पढ़े, अल्लाह उसे साबिरों और शुक्रगुज़ारों का सवाब देगा और जन्नत की खुशख़बरी दी जाएगी।

रजब की नौवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की नौवीं रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और पाँच बार सूरह तकासुर पढ़े, अल्लाह उसके गुनाह माफ़ करेगा, सौ हज और उमरा का सवाब देगा और अगर अस्सी दिन में उसका इंतिक़ाल हो जाए तो वह शहीद माना जाएगा।

रजब की दसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की दसवीं रात 12 (6×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा एक बार और सूरह इख़्लास तीन बार पढ़े, अल्लाह उसके लिए लाल याक़ूत के स्तंभ पर एक शानदार महल बनाएगा, जिसमें सात सौ कमरे होंगे, जो दुनिया से भी बड़े होंगे।

रजब की ग्यारहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की ग्यारहवीं रात 12 (6×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और बारह बार आयतुल कुर्सी पढ़े, अल्लाह उसे तौरेत, इंजील, ज़बूर और क़ुरआन पढ़ने वाले के बराबर सवाब अता करता है। अर्श से आवाज़ आएगी: अपने आमाल नए सिरे से शुरू करो, बेशक अल्लाह ने तुम्हें माफ़ कर दिया है।

रजब की बारहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की बारहवीं रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और दस बार सूरह बक़रह आयत 285–286 पढ़े, अल्लाह उसे नेक काम का हुक्म देने वालों और बुराई से रोकने वालों का सवाब देगा और सत्तर रहमतें अता करेगा।

रजब की तेरहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की तेरहवीं रात 10 (5×2) रकअत नमाज़ अदा करे, पहली रकअत में सूरह फ़ातिहा और सूरह आदियात एक-एक बार पढ़े और बाकी रकअतों में सूरह फ़ातिहा और सूरह तकासुर पढ़े,
अल्लाह उसे माफ़ फ़रमा देगा, पुल सिरात से वह बिजली की तरह गुज़रेगा, उसका आमालनामा दाहिने हाथ में दिया जाएगा और उसे जन्नत में हज़ार बस्तियाँ दी जाएँगी।

रजब की चौदहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की चौदहवीं रात 30 (15×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा, सूरह इख़्लास और सूरह कहफ़ की आयत 110 पढ़े,
अल्लाह की क़सम, उसके गुनाह चाहे आसमान के सितारों से भी ज़्यादा हों, वह पूरी तरह पाक हो जाएगा और ऐसा सवाब पाएगा जैसे पूरी किताब पढ़ ली हो।

रजब की पंद्रहवीं रात

रजब की सोलहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की सोलहवीं रात 30 (15×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा और सूरह इख़्लास दस-दस बार पढ़े,
अल्लाह उसे सत्तर शहीदों का सवाब देगा, क़ियामत के दिन उसका नूर मक्का और मदीना के बीच की दूरी की तरह चमकेगा और वह आग, निफ़ाक़ और क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ रहेगा।

रजब की सत्रहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की सत्रहवीं रात 30 (15×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में सूरह फ़ातिहा और सूरह इख़्लास दस-दस बार पढ़े,
अल्लाह उसे नमाज़ पूरी होने से पहले ही सत्तर शहीदों का सवाब अता करेगा।

रजब की अठारहवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की अठारहवीं रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा तथा सूरह इख़्लास, फ़लक़ और नास दस-दस बार पढ़े,
नमाज़ के बाद अल्लाह फ़रिश्तों से फ़रमाएगा कि मैंने इसके गुनाह माफ़ कर दिए हैं और आग से बचाव के लिए इसके और जहन्नम के बीच बड़ी दूरियाँ रख दी जाएँगी।
रजब की उन्नीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की उन्नीसवीं रात 4 (2×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, पंद्रह बार आयतुल कुर्सी और पंद्रह बार ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़े,
अल्लाह उसे हज़रत मूसा जैसा सवाब देगा, फ़रिश्ते उसे खुशख़बरी देंगे और वह बिना हिसाब जन्नत में दाख़िल होगा।
रजब की बीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की बीसवीं रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और पाँच बार सूरह क़द्र पढ़े,
अल्लाह उसे इब्राहीम, मूसा, यह्या और ईसा अलैहिमुस्सलाम के बराबर सवाब देगा, वह जिन्न और इंसान के नुक़सान से महफ़ूज़ रहेगा और अल्लाह की रहमत उसके साथ होगी।
रजब की इक्कीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की इक्कीसवीं रात 6 (3×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, दस बार सूरह कौसर और दस बार सूरह इख़्लास पढ़े,
अल्लाह फ़रिश्तों (किरामन कातिबीन) को हुक्म देता है कि एक साल तक उसके बुरे आमाल न लिखें और सिर्फ़ उसके नेक आमाल लिखें। नबी ﷺ फ़रमाते हैं: अल्लाह अपने फ़रिश्तों के सामने इस नमाज़ पर फ़ख़्र करता है और फ़रमाता है, बेशक मैंने इसे माफ़ कर दिया।
रजब की बाईसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: 8 (4×2) रकअत नमाज़ अदा करो, हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और सात बार सूरह काफ़िरून पढ़ो। नमाज़ के बाद दस बार सलवात पढ़ो और दस बार अस्तग़फ़िरुल्लाह रब्बी व अतूबु इलैह पढ़ो।
इसका सवाब यह है कि इंसान दुनिया से रुख़्सत होने से पहले जन्नत में अपनी जगह देख लेगा, मुसलमान की हालत में इंतिक़ाल करेगा और सत्तर नबियों का सवाब पाएगा।
रजब की 22 तारीख़ की नमाज़ (किताब “मनाज़िरुल आख़िरह” – शैख़ अब्बास क़ुम्मी) 8 रकअत नमाज़ (2 रकअत × 4) अदा करो। हर रकअत में सूरह हम्द के बाद सात बार सूरह तौहीद पढ़ो। नमाज़ के बाद दस बार सलवात और दस बार अस्तग़फ़िरुल्लाह रब्बी व अतूबु इलैह पढ़ो। यह अमल मौत के वक़्त फ़ायदेमंद बताया गया है।
रजब की तेईसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की तेईसवीं रात 2 रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और पाँच बार सूरह दुहा पढ़े,
अल्लाह हर हरफ़ के बदले उसे जन्नत में दर्जा देगा, सत्तर हज का सवाब देगा, हज़ार जनाज़ों में शरीक होने, हज़ार मरीज़ों की अयादत और हज़ार मुसलमानों की ज़रूरत पूरी करने का सवाब अता करेगा।
रजब की चौबीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की चौबीसवीं रात 40 (20×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, सूरह बक़रह आयत 285–286 और सूरह इख़्लास पढ़े,
अल्लाह उसके लिए हज़ार नेकियाँ लिखेगा, हज़ार गुनाह मिटाएगा, हज़ार दर्जे बुलंद करेगा और हज़ार फ़रिश्ते उस पर रहमत भेजेंगे। उसे दुनिया और आख़िरत में सेहत अता होगी और ऐसा होगा जैसे उसने शबे-क़द्र पाई हो।
रजब की पच्चीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की पच्चीसवीं रात मग़रिब और इशा के दरमियान 20 (10×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, सूरह बक़रह आयत 285–286 और सूरह इख़्लास पढ़े,
अल्लाह उसकी जान, माल, बीवी, दीन और आख़िरत की हिफ़ाज़त करेगा और वह अपनी जगह से उठने से पहले माफ़ कर दिया जाएगा।
रजब की छब्बीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की छब्बीसवीं रात 12 (6×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और चालीस बार सूरह इख़्लास पढ़े (कुछ रिवायतों में चार बार आया है),
फ़रिश्ते उसे गले लगाएंगे। जिसे फ़रिश्ते गले लगाएँ, वह पुल सिरात, हिसाब और मीज़ान की सख़्ती से बचा लिया जाएगा। अल्लाह सत्तर फ़रिश्ते मुक़र्रर करेगा जो सुबह तक उसके लिए मग़फ़िरत की दुआ करेंगे।
रजब की सत्ताईसवीं रात
रजब की अट्ठाईसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की अट्ठाईसवीं रात 12 (6×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, दस बार सूरह आला और दस बार सूरह क़द्र पढ़े, नमाज़ के बाद सौ बार सलवात और सौ बार इस्तिग़फ़ार करे,
अल्लाह उसके लिए फ़रिश्तों की इबादत का सवाब लिखेगा।
रजब की उनतीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की उनतीसवीं रात 12 (6×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा, दस बार सूरह आला और दस बार सूरह क़द्र पढ़े, नमाज़ के बाद सौ बार सलवात और सौ बार इस्तिग़फ़ार करे,
अल्लाह उसके लिए फ़रिश्तों की इबादत का सवाब लिखेगा।
रजब की तीसवीं रात – रसूल-ए-ख़ुदा ﷺ से रिवायत है: जो शख़्स रजब की तीसवीं रात 10 (5×2) रकअत नमाज़ अदा करे और हर रकअत में एक बार सूरह फ़ातिहा और दस बार सूरह इख़्लास पढ़े,
अल्लाह उसे जन्नत में सात शहर अता करेगा, वह क़ब्र से चाँद की तरह चमकते चेहरे के साथ उठेगा, बिजली की तरह पुल सिरात पार करेगा और आग से महफ़ूज़ रहेगा।